यूरोपीय ऊर्जा बाजारों में आगामी सर्दियों के दौरान प्राकृतिक गैस की कीमतों में तेजी बने रहने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं। सीमित तरलीकृत प्राकृतिक गैस यानी एलएनजी की आपूर्ति और औसत से नीचे दर्ज किए गए गैस भंडारण स्तरों ने पूरे क्षेत्र को लचीली एलएनजी खेपों पर अत्यधिक निर्भर बना दिया है। मौसम की अत्यधिक ठंड या एलएनजी आयातों में अचानक गिरावट आने पर ईंधन की कीमतों में और तेजी आने का जोखिम मंडरा रहा है। इसके बावजूद, यूरोपीय संघ में ऊर्जा मांग में आई समग्र कमी और एलएनजी बुनियादी ढांचे के विस्तार ने उस स्थिति को टाल दिया है, जिसने वर्ष 2022 में कीमतों में अभूतपूर्व उछाल पैदा किया था।
सीमित आपूर्ति और कमजोर भंडारण से दबाव
यूरोपीय गैस मंडियों में वर्तमान समीकरण आयातित ईंधन पर अत्यधिक निर्भरता की ओर इशारा कर रहे हैं। वैश्विक स्तर पर एलएनजी कार्गो हासिल करने की प्रतिस्पर्धा लगातार तेज हो रही है, जिससे क्षेत्रीय बाजारों में दबाव बढ़ रहा है। नॉर्मन लीबके ने सचेत किया कि आगामी सर्दियों में एलएनजी की कड़ी प्रतिस्पर्धा और निचले भंडारण स्तरों के चलते यूरोपीय गैस दरें ऊंची बनी रहेंगी। कड़ाके की सर्दी पड़ने या आयात खेप घटने की स्थिति में बाजार में नए सिरे से उछाल आ सकता है। राहत की एकमात्र बात यह है कि खपत पिछले सालों की तुलना में काफी कम है, तथा उत्तरी अमेरिका एवं एशिया में यदि सर्दी हल्की रहती है तो यूरोपीय बाजार को अप्रत्याशित राहत मिल सकती है।
विश्लेषण के अनुसार, यूरोप का मौजूदा गैस भंडार पूरे शीतकाल को सहजता से पार कराने के लिए पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। सामान्य शीतकालीन परिस्थितियों और हर महीने करीब 11 अरब घन मीटर की सामान्य एलएनजी आपूर्ति के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि अगले वर्ष मार्च के अंत तक यूरोप का गैस भंडारण घटकर लगभग 22% रह जाएगा। भंडार के इस निचले स्तर पर पहुंचने का सीधा अर्थ यह है कि सर्दियों के पूरे दौर में बाजार को हर महीने लगातार आने वाले एलएनजी कार्गो पर निर्भर रहना पड़ेगा।
अगले वर्ष दरों में गिरावट की उम्मीद और कतर का प्रभाव
मध्यम अवधि के दृष्टिकोण को देखें तो अगले साल गैस कीमतों में उल्लेखनीय सुधार दर्ज होने की संभावना जताई गई है। अगले वर्ष गैस की दरें काफी गिरकर लगभग 50 यूरो प्रति MWh के आसपास आने का अनुमान है। इस अनुमानित गिरावट के पीछे सबसे बड़ा कारण पश्चिम एशिया में जारी तनाव में संभावित नरमी को माना जा रहा है। हालांकि, यह साफ किया गया है कि कीमतों के युद्ध-पूर्व स्तरों तक पूरी तरह लौटने की संभावना नहीं दिखती है।
दीर्घकालिक आपूर्ति ढांचे पर नजर डालें तो कतर की ओर से आने वाली आपूर्ति में बाधाएं अभी कुछ समय तक बनी रहेंगी। कतर से गैस आपूर्ति लगभग 17% क्षमता के मध्यम अवधि नुकसान के कारण वर्ष 2028 तक सीमित रहने का अनुमान है। वर्ष 2026 में उत्पादन की जो कमी सामने आएगी, उसकी भरपाई वर्ष 2027 में होने वाले क्षमता विस्तार से संभव हो सकेगी, लेकिन बाजार में पूरी स्थिरता आने में अभी समय लगेगा।
कमोडिटी तकनीकी संकेतक और बाजार की चाल
प्राकृतिक गैस अनुबंधों में कारोबारी सत्र के दौरान जोरदार हलचल दर्ज की गई है। लाइव बाजार आंकड़ों के मुताबिक, प्राकृतिक गैस (NG=F) की कीमत 17.60% उछलकर 3.06 डॉलर पर पहुंच गई, जबकि इसका पिछला बंद भाव 2.60 डॉलर था। 52 हफ्तों के दौरान इसका दायरा 2.48 डॉलर से 7.83 डॉलर के बीच दर्ज किया गया है, और इसका कारोबारी वॉल्यूम 20 दिनों के औसत के 0.99 गुना रहा।
तकनीकी संकेतकों पर नजर डालें तो 14-दिवसीय RSI वर्तमान में 53 पर स्थित है, जो संतुलित दायरे का संकेत देता है। एमएसीडी (MACD) स्तर -0.05 पर है जबकि सिग्नल लाइन -0.00 पर दर्ज की गई है, जिससे इसका हिस्टोग्राम -0.04 का मंदी रुख दर्शा रहा है। एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज में EMA20 स्तर 2.97 डॉलर, EMA50 स्तर 2.97 डॉलर तथा दीर्घकालिक EMA200 स्तर 3.23 डॉलर पर है। सिंपल मूविंग एवरेज में SMA50 स्तर 2.96 डॉलर और SMA200 स्तर 3.08 डॉलर पर स्थित है। ईएमए 50 के ईएमए 200 से नीचे रहने के कारण बाजार में डेथ क्रॉस बना हुआ है, जिससे कीमत लंबी अवधि के डाउनट्रेंड में दिखाई देती है। बोलिंजर बैंड्स 2.66 डॉलर से 3.41 डॉलर के बीच हैं जिसका मध्य स्तर 3.04 डॉलर है, और वर्तमान मूल्य इसी दायरे के भीतर चल रहा है। एडीएक्स (ADX) 27 पर ट्रेंड की पुष्टि कर रहा है, जबकि स्टोकेस्टिक फास्ट लाइन 67 और सिग्नल लाइन 28 पर है। दैनिक वोलैटिलिटी दर्शाने वाला एटीआर (ATR) 0.17 पर है, जिसमें 20-दिवसीय समर्थन लगभग 2.50 डॉलर और प्रतिरोध लगभग 3.33 डॉलर के आसपास देखा जा रहा है। प्रमुख स्तरों में पिवट 3.03 डॉलर, प्रतिरोध R1 3.10 डॉलर, R2 3.14 डॉलर तथा समर्थन S1 2.99 डॉलर और S2 2.92 डॉलर पर बना हुआ है।
मुद्रा बाजारों और अन्य परिसंपत्तियों की स्थिति
वैश्विक वित्तीय बाजारों में व्यापक स्तर पर उठापटक देखने को मिल रही है। अमेरिकी डॉलर इंडेक्स ने तीन कारोबारी दिनों में 0.6% की बढ़त हासिल की और 102.00 से ऊपर दो सप्ताह के नए उच्च स्तर पर पहुंच गया। निवेशक अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा बुधवार को नीतिगत दरों पर आक्रामक रुख बनाए रखने की आशंकाओं के बीच डॉलर की ओर लौटे हैं। साथ ही अमेरिका और ईरान के बीच किसी तत्काल शांति समझौते की उम्मीदें घटने से भी सुरक्षित निवेश माने जाने वाले डॉलर को बल मिला है। 3 नवंबर को होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले अमेरिकी डॉलर निर्णायक मोड़ पर खड़ा है, जहां कांग्रेस पर नियंत्रण की लड़ाई राजकोषीय नीति और 2027 की मौद्रिक नीति की दिशा तय कर सकती है।
अन्य मुद्राओं में ऑस्ट्रेलियाई डॉलर (AUD/USD) मंगलवार को सकारात्मक गति पकड़ते हुए एशियाई सत्र के दौरान 0.7030 के स्तर पर पहुंच गया। रिजर्व बैंक ऑफ ऑस्ट्रेलिया की ब्याज दरों पर सख्त नीतियों की अपेक्षाओं ने ऑस्ट्रेलियाई मुद्रा को सहारा दिया, हालांकि बुधवार को आने वाले सितंबर सीपीआई आंकड़ों और फेड फैसले से पहले यह 100-दिवसीय एसएमए प्रतिरोध से नीचे बना रहा। जापानी येन के मुकाबले अमेरिकी डॉलर (USD/JPY) लगातार तीसरे दिन बढ़त के साथ एक महीने के निचले स्तर से उबरता दिखा। बैंक ऑफ जापान द्वारा आक्रामक दर वृद्धि टालने के अनुमानों ने येन पर दबाव डाला।
कमोडिटी और क्रिप्टो संपत्तियों में भी मिला-जुला रुख रहा। अमेरिकी कारोबारी घंटों के दौरान सोने की कीमतों में हल्की बढ़त देखी गई, जिसे कच्चे तेल में आई मामूली गिरावट से सहारा मिला, यद्यपि मजबूत डॉलर ने बढ़त को सीमित रखा। दूसरी ओर, क्रिप्टोकरेंसी बाजार में गिरावट का रुख रहा, जहां बिटकॉइन (BTC) गिरकर अहम 80,000 डॉलर के स्तर से नीचे आ गया। एथेरियम (ETH) ने भी बिटकॉइन की चाल का अनुसरण करते हुए कमजोर रुख दर्शाया, जबकि रिपल (XRP) 1.30 डॉलर के आसपास घूमता नजर आया।



















