कर्मचारी भविष्य निधि संगठन यानी ईपीएफओ के करोड़ों खाताधारकों को अब अपने खाते का विवरण, हालिया लेन-देन और क्लेम की स्थिति देखने के लिए बार-बार आधिकारिक पोर्टल या मोबाइल एप्लिकेशन पर लॉगिन करने की जरूरत नहीं पड़ेगी। ईपीएफओ एक ऐसी प्रणाली पर काम कर रहा है जिसके जरिए पंजीकृत अंशधारक सीधे लोकप्रिय मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप पर अपनी जरूरी सेवाएं हासिल कर सकेंगे। इस नई डिजिटल पहल के तहत सदस्य अपने मोबाइल फोन से ही फंड बैलेंस, पासबुक डाउनलोड, हालिया लेन-देन की सूची और दाखिल किए गए दावों की प्रगति की निगरानी कर सकेंगे। वर्तमान में इस पूरी प्रणाली का तकनीकी परीक्षण चल रहा है और इसे देश भर में आम अंशधारकों के लिए आधिकारिक तौर पर लाइव करने की निश्चित समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
डिजिटल सेवाओं के विस्तार की इस व्यापक योजना में केवल मैसेजिंग सुविधा ही शामिल नहीं है, बल्कि कई अन्य बड़े प्रशासनिक और तकनीकी सुधार भी शामिल किए जा रहे हैं। ईपीएफओ अंशधारकों के लिए यूपीआई के जरिए सीधे फंड से पैसे निकालने की प्रक्रिया विकसित कर रहा है। इसके साथ ही जब कोई कर्मचारी अपनी कंपनी बदलता है, तो उसके फंड का स्वतः ट्रांसफर सुनिश्चित करने और साधारण दावों को बिना इंसानी दखल के तेजी से निपटाने के लिए ऑटो-सेटलमेंट की वित्तीय सीमा को बढ़ाने पर भी तेजी से काम चल रहा है। इन तमाम बदलावों का बुनियादी उद्देश्य कागजी औपचारिकताएं घटाकर सदस्यों को त्वरित और पारदर्शी सेवा उपलब्ध कराना है।
व्हाट्सएप चैटबॉट के जरिए कैसे काम करेगा यह नया सिस्टम
इस नई मैसेजिंग सुविधा के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद, ईपीएफओ के सदस्य संगठन के प्रमाणित व्हाट्सएप नंबर पर केवल 'Hello' लिखकर बातचीत का सिलसिला शुरू कर सकेंगे। इसके तुरंत बाद स्क्रीन पर एक इंटरएक्टिव मेनू दिखाई देगा, जिसमें खाताधारक की आवश्यकता के अनुसार विभिन्न सेवाओं के विकल्प मौजूद रहेंगे। उपयोगकर्ता सिर्फ कुछ विकल्पों का चयन करके अपने फंड का वर्तमान बैलेंस देख सकेंगे, हाल ही में जमा या निकाले गए अंशदान का विवरण जान सकेंगे, अपने क्लेम का ताजा स्टेटस ट्रैक कर सकेंगे और सीधे अपनी इलेक्ट्रॉनिक पासबुक डाउनलोड कर सकेंगे।
इसके अतिरिक्त, इस चैट इंटरफेस में आधार प्रमाणीकरण से जुड़ी सहायता और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर यानी डीबीटी से संबंधित अपडेट भी प्राप्त होने की उम्मीद जताई गई है। देश के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले कर्मचारियों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए इस प्रणाली को कई क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध कराने की तैयारी है, ताकि भाषा की बाधा के बिना हर श्रमिक और वेतनभोगी इसका आसानी से इस्तेमाल कर सके। फिलहाल इसका ट्रायल रन जारी है और देशव्यापी शुरुआत के लिए अंतिम तकनीकी मंजूरियों का इंतजार किया जा रहा है।
यूपीआई से निकासी और ऑटो-ट्रांसफर के साथ सेंट्रलाइज्ड डाटाबेस
भविष्य निधि प्रणाली को आधुनिक बनाने के लिए ईपीएफओ की रणनीति सिर्फ चैट सपोर्ट तक सीमित नहीं है। संगठन वित्तीय लेन-देन के पारंपरिक तरीकों को बदलकर बेहद आधुनिक और सुगम बनाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। इसमें सबसे प्रमुख कदम यूपीआई के माध्यम से पीएफ राशि की सीधी निकासी का विकल्प जोड़ना है, जिससे आपात स्थिति में सदस्यों को त्वरित नकदी मिल सके। साथ ही, छोटे और सीधे मामलों को तेजी से निपटाने के लिए ऑटो-सेटलमेंट की सीमा में भी विस्तार किया जा रहा है, जिससे सामान्य क्लेम बिना किसी क्लर्क स्तर की समीक्षा के स्वतः स्वीकृत हो जाएंगे।
नौकरी बदलने वाले कर्मचारियों के लिए भी यह बदलाव काफी राहत देने वाला साबित होगा। नई व्यवस्था लागू होने के बाद जब भी कोई कर्मचारी एक संस्थान छोड़कर दूसरे संस्थान में जाएगा, तो उसका संचित फंड बिना किसी जटिल आवेदन के स्वतः नए खाते में ट्रांसफर हो जाएगा। संगठन इसके लिए एक मजबूत सेंट्रलाइज्ड डाटाबेस भी तैयार कर रहा है। यह केंद्रीयकृत प्रणाली अलग-अलग क्षेत्रीय कार्यालयों के बिखरे हुए रिकॉर्ड्स को एक ही मंच पर जोड़ देगी, जिससे सिस्टम में होने वाली तकनीकी गड़बड़ियों और दावों के निपटारे में लगने वाले गैर-जरूरी समय को काफी हद तक समाप्त किया जा सकेगा।
बीमारी, पढ़ाई और शादी के लिए एडवांस निकासी के निर्धारित नियम
ईपीएफओ के मौजूदा दिशा-निर्देशों में अंशधारकों की तात्कालिक और दीर्घकालिक जीवन आवश्यकताओं के अनुसार फंड से एडवांस राशि निकालने के स्पष्ट प्रावधान तय किए गए हैं। बीमारी के आधार पर धन निकालने के मामले में सदस्य अपने स्वयं के उपचार अथवा अपने परिवार के सदस्यों के गंभीर इलाज के लिए फंड से एडवांस प्राप्त कर सकते हैं, और इस विशेष श्रेणी के तहत क्लेम दाखिल करने की कोई अधिकतम संख्या सीमा निर्धारित नहीं की गई है।
अन्य सामाजिक और व्यक्तिगत दायित्वों के लिए निकासी की संख्या पर निश्चित सीमाएं तय की गई हैं। उच्च शिक्षा के खर्चों की पूर्ति के लिए खाताधारक अपने स्वयं के अथवा अपने परिवार के सदस्यों के अध्ययन हेतु अधिकतम 10 बार तक एडवांस ले सकते हैं। विवाह संबंधी खर्चों के लिए जीवनकाल में कुल 5 बार तक अग्रिम राशि निकालने की अनुमति दी गई है। इसके अलावा नया घर खरीदने, नए मकान का निर्माण कराने, होम लोन की बकाया राशि चुकाने अथवा मौजूदा घर की आवश्यक मरम्मत कराने जैसे आवासीय कार्यों के लिए भी सदस्य अधिकतम 5 बार तक अग्रिम निकासी का लाभ उठा सकते हैं।
संगठन के नियमों में कुछ अप्रत्याशित और असाधारण परिस्थितियों के लिए भी विशेष अग्रिम राशि की व्यवस्था रखी गई है, जिसके तहत सदस्य एक वित्तीय वर्ष के भीतर अधिकतम 2 बार तक धनराशि निकाल सकते हैं। कुछ विशिष्ट मामलों में अंशधारकों को अपने कुल जमा बैलेंस का 75 प्रतिशत तक अग्रिम के तौर पर निकालने का अधिकार मिलता है, हालांकि यह निकासी संबंधित श्रेणी के दिशा-निर्देशों और सदस्य की व्यक्तिगत पात्रता पर निर्भर करती है। मैसेजिंग ऐप के जरिए सारी जानकारियां सुलभ होने के बाद सदस्यों को इन तमाम नियमों, बकायों और ब्योरों को जानने के लिए ईपीएफओ कार्यालयों के चक्कर काटने या पोर्टल की तकनीकी समस्याओं से जूझने की जरूरत नहीं पड़ेगी।


















