रसोई में रोजाना खाना बनाते वक्त चावल धोने के बाद बचे पानी को अक्सर बेकार समझकर सिंक में बहा दिया जाता है। अगर आप अपने घर में बागवानी के शौकीन हैं और गमलों में लहलहाते पौधे देखना चाहते हैं, तो यह पानी आपके लिए किसी कीमती टॉनिक से कम नहीं है। चावल को धोते समय निकलने वाले इस मटमैले तरल में प्राकृतिक स्टार्च के साथ सूक्ष्म पोषक तत्व मौजूद होते हैं। यदि इस पानी को रसोई से निकलने वाले संतरे के छिलकों, अंडे के खोल और थोड़े से गुड़ के साथ फर्मेंट कर लिया जाए, तो घर पर ही बेहद असरदार तरल खाद तैयार हो जाती है। हालांकि इस प्राकृतिक मिश्रण को तैयार करने और पौधों की जड़ों में डालने के लिए सही नियम और संतुलन समझना जरूरी है, क्योंकि गलत तरीके से इस्तेमाल करने पर पौधों को फायदा पहुंचने की जगह नुकसान भी हो सकता है।
साफ कंटेनर में चावल का पानी जमा करने का तरीका
इस घरेलू फर्टिलाइजर को बनाने की शुरुआत चावल के पानी को सही ढंग से इकट्ठा करने से होती है। रोजाना चावल पकाने से पहले उसे दो से तीन बार अच्छी तरह धोया जाता है। इस प्रक्रिया से निकलने वाले मटमैले पानी को एक साफ-सुथरी प्लास्टिक बोतल या किसी ढक्कनदार डिब्बे में जमा करते रहें। अगर आपके घर में रोजाना चावल बनते हैं, तो कुछ दिनों तक इस पानी को धीरे-धीरे इकट्ठा किया जा सकता है। ध्यान रहे कि जिस बर्तन या बोतल में आप इसे रख रहे हैं, वह पूरी तरह स्वच्छ हो और उसमें किसी भी प्रकार के साबुन, डिटर्जेंट या केमिकल के अंश न बचे हों।
फर्मेंटेशन यानी किण्वन की प्रक्रिया के दौरान बोतल के भीतर प्राकृतिक तौर पर गैस बनती है। इसलिए कभी भी कंटेनर को ऊपर तक पूरा न भरें। बोतल के भीतर करीब 20 से 25 प्रतिशत जगह खाली छोड़ना बेहद आवश्यक है ताकि बनने वाली गैस के लिए पर्याप्त स्थान बना रहे। यदि ढक्कन को बहुत कसकर बंद कर दिया जाए और लंबे समय तक यूं ही छोड़ दिया जाए, तो भीतर दबाव बहुत ज्यादा बढ़ सकता है। बोतल को खोलते समय उसे हमेशा अपने चेहरे से दूर रखें और ढक्कन को बहुत आहिस्ता-आहिस्ता खोलकर अतिरिक्त गैस को बाहर निकलने दें।
संतरे के छिलकों का इस्तेमाल और तीखी गंध पर नियंत्रण
चावल का पानी बोतल में इकट्ठा करने के बाद उसमें एक या दो संतरे अथवा किन्नू के छिलके छोटे टुकड़ों में काटकर मिलाए जा सकते हैं। छिलकों को मिश्रण में डालने से पहले साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि उन पर जमी धूल साफ हो जाए। संतरे या किन्नू के छिलके डालने का सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि सड़न और किण्वन के दौरान पैदा होने वाली तीखी या अप्रिय गंध काफी हद तक दब जाती है।
हालांकि यह ध्यान रखना जरूरी है कि खट्टे फलों के छिलके मिलाने से तैयार हो रहे घोल का पीएच मान कितना परिवर्तित होगा, इसका कोई निश्चित वैज्ञानिक पैमाना घरेलू स्तर पर तय नहीं होता। इसलिए इसे किसी लैब में तैयार संतुलित रासायनिक खाद का सटीक विकल्प समझने के बजाय एक सहज घरेलू प्रयोग के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।
अंडे के छिलके और गुड़ मिलाने की सही विधि
घोल में कैल्शियम की मात्रा बढ़ाने के लिए अंडों के छिलकों का इस्तेमाल किया जाता है। अंडों के छिलकों को कभी भी सीधे बड़े टुकड़ों के रूप में तरल में नहीं डालना चाहिए। सबसे पहले उन्हें पानी से धोकर धूप में अच्छी तरह सुखा लें, फिर मिक्सी या खरल में कूटकर उनका बारीक चूरा बना लें। अंडे के छिलकों में कैल्शियम कार्बोनेट भरपूर मात्रा में होता है। बारीक पीसने से उनका सतह क्षेत्र बढ़ जाता है, हालांकि यह जरूरी नहीं कि चूरा पानी में तुरंत पूरी तरह घुलकर पौधों को मिल ही जाए। इसलिए इस मिश्रण को पौधों की संपूर्ण कैल्शियम आवश्यकता की पूर्ण गारंटी नहीं माना जा सकता।
इसके बाद मिश्रण में लगभग एक से दो चम्मच गुड़ मिला दें। गुड़ में मौजूद प्राकृतिक मिठास और शर्करा उन सूक्ष्मजीवों के लिए भोजन का कार्य करती है जो फर्मेंटेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हैं। इस पूरे मिश्रण को ढक्कन लगाकर किसी सुरक्षित और छांव वाली जगह पर रख दें। गैस के दबाव को कम करने के लिए बीच-बीच में सावधानीपूर्वक ढक्कन खोलते रहें। लगभग सात से दस दिनों के भीतर घोल में बदलाव साफ नजर आने लगता है। अगर मिश्रण से बहुत ज्यादा सड़ी हुई असहनीय दुर्गंध आने लगे, उस पर फफूंद जम जाए या उसका रंग बिल्कुल असामान्य दिखे, तो उसे पौधों में डालने से बचें।
तैयार तरल खाद को पौधों में डालने की सावधानी
फर्मेंटेशन पूरा होने के बाद तैयार हुए इस गाढ़े घोल को कभी भी सीधे गमले की मिट्टी में नहीं डालना चाहिए। घरेलू तरीके से बने इस तरल में पोषक तत्वों की सघनता नियंत्रित नहीं होती, इसलिए सीधा इस्तेमाल पौधों की कोमल जड़ों को नुकसान पहुंचा सकता है। उपयोग करने के लिए हमेशा एक हिस्सा फर्मेंटेड लिक्विड लें और उसमें दस हिस्सा सादा पानी मिलाकर उसे अच्छी तरह पतला कर लें।
इस पतले घोल को पहली बार इस्तेमाल करते समय किसी एक ही पौधे पर थोड़ी मात्रा में डालकर परखें और कुछ दिनों तक उसकी प्रतिक्रिया देखें। जब पौधा इस घोल को आसानी से स्वीकार कर ले, तब इसे गुलाब, गुड़हल, मिर्च और टमाटर जैसे फूलों और सब्जियों वाले पौधों की मिट्टी में कभी-कभार दिया जा सकता है। नियमित तौर पर सीमित मात्रा में इसका छिड़काव पौधों को स्वस्थ बनाए रखने में सहायक होता है।


















