भारत के अंतरिक्ष परिदृश्य में पूर्वोत्तर क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने के लिए स्पेस इंडस्ट्री एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एसआईए-इंडिया) गुवाहाटी में एक बड़े दो दिवसीय आयोजन की तैयारी कर रहा है। इस कार्यशाला में देश-विदेश से दो सौ से अधिक विशेषज्ञ, सरकारी प्रतिनिधि, उद्योग जगत के दिग्गज और शोधकर्ता जुटेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य पूर्वोत्तर को केवल तकनीक के उपभोक्ता तक सीमित न रखकर, उसे अंतरिक्ष-आधारित समाधानों का डेवलपर, परीक्षण केंद्र और एक मजबूत व्यावसायिक बाजार के रूप में स्थापित करना है।
पूर्वोत्तर भारत अंतरिक्ष कार्यशाला 2026 की रूपरेखा
पूर्वोत्तर भारत अंतरिक्ष कार्यशाला 2026 का आयोजन एसआईए-इंडिया द्वारा नॉर्थ ईस्टर्न स्पेस एप्लीकेशन्स सेंटर (एनईएसएसी) की साझेदारी में किया जा रहा है। यह कार्यक्रम इस महीने की 26 और 27 तारीख को गुवाहाटी के एफआरईएमएए, असम वाटर सेंटर में आयोजित होगा। कार्यशाला का केंद्रीय विषय लेवरेजिंग स्पेस टेक्नोलॉजी: रीजनल ट्रांसफॉर्मेशन टू ग्लोबल Reach रखा गया है, जिसके तहत इस बात पर मंथन होगा कि कैसे यह क्षेत्र स्पेस टेक्नोलॉजी के मामले में वैश्विक दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए एक प्रवेश द्वार बन सकता है।
राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस और सामरिक महत्व
इस आयोजन का समय राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस की पृष्ठभूमि में बेहद खास है, जो 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा पर चंद्रयान-3 की सफल सॉफ्ट लैंडिंग की याद दिलाता है। नई दिल्ली के बाहर एसआईए-इंडिया द्वारा आयोजित यह अपनी तरह का पहला बड़ा क्षेत्रीय सम्मेलन है। संगठन का मानना है कि देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 7.97 प्रतिशत हिस्सा समेटने वाले आठ पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति बेहद सामरिक है, क्योंकि ये पांच देशों के साथ 5484 किलोमीटर लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करते हैं। इस भौगोलिक बनावट और दुर्गम इलाकों के कारण वहां उपग्रह संचार, पृथ्वी अवलोकन, सिंथेटिक एपर्चर रडार और भू-स्थानिक खुफिया जैसे समाधानों की भारी मांग है।
संस्थागत क्षमताएं और मौजूदा परियोजनाएं
इस क्षेत्र में पहले से ही कई संस्थान अंतरिक्ष अनुप्रयोगों पर काम कर रहे हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एनईएसएसी के माध्यम से पूर्वोत्तर में कृषि, आपदा प्रबंधन, प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, बुनियादी ढांचे के विकास और संचार जैसे क्षेत्रों में लगभग 130 परियोजनाएं चलाई जा चुकी हैं। इसके अलावा नॉर्थ ईस्टर्न स्पैटियल डेटा रिपॉजिटरी (एनΕΣडीआर) इस क्षेत्र का एक व्यापक भू-स्थानिक डेटाबेस प्रदान करता है, जिसमें जमीन, जल, भूभाग और आपदा से जुड़ा रिकॉर्ड उपलब्ध है। आगामी कार्यशाला का लक्ष्य इन मौजूदा क्षमताओं को निजी स्टार्टअप, निवेशकों और प्रौद्योगिकी निर्माताओं से जोड़ना है।
निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी और निवेश
यह कार्यशाला ऐसे समय में हो रही है जब भारत का अंतरिक्ष उद्योग तेजी से वाणिज्यिक दौर में प्रवेश कर रहा है। एसआईए-इंडिया के आंकड़ों के अनुसार, साल 2021 से अब तक भारतीय स्पेसटेक स्टार्टअप्स ने 285 कंपनियों को शामिल करते हुए 241 फंडिंग राउंड के जरिए लगभग 871 मिलियन अमेरिकी डॉलर जुटाए हैं, जबकि 2021 में यह आंकड़ा 12 राउंड में मात्र 43 मिलियन अमेरिकी डॉलर था। अकेले 2026 के दौरान इन स्टार्टअप्स ने लगभग 113 मिलियन अमेरिकी डॉलर की इक्विटी फंडिंग हासिल की है। इसके साथ ही भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACe) द्वारा जुलाई 2026 तक निजी संस्थाओं को 105 प्राधिकरण जारी किए जा चुके हैं, और विक्रम-1 के सफल मिशन ने निजी कक्षीय लॉन्च क्षमता में नया अध्याय जोड़ा है।
विशेषज्ञों की राय और भविष्य की दिशा
एसआईए-इंडिया के अध्यक्ष डॉ. सुब्बा राव पावुुलुरी ने कहा कि पूर्वोत्तर का सामरिक भूगोल और दक्षिण-पूर्व एशिया के करीब होना इस क्षेत्र को अपनी सीमाओं से परे क्षमताएं विकसित करने का अवसर देता है। एसआईए-इंडिया के महानिदेशक अनिल प्रकाश ने जोर देकर कहा कि इस क्षेत्र की अगली प्राथमिकता अपने वैज्ञानिक संस्थानों और वाणिज्यिक अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र के बीच मजबूत सेतु बनाना होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूर्वोत्तर वैश्विक दक्षिण के बाजारों के लिए एक लॉन्चपैड बन सकता है। असम लखीम नस्ल की बछड़ी और मेघालय पुलिस नोडल अधिकारी से जुड़ी क्षेत्रीय पहलों के बीच यह अंतरिक्ष सम्मेलन क्षेत्र के विकास को एक नई गति देगा।



















