क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में इंफ्रास्ट्रक्चर की सबसे बड़ी चुनौती को दूर करते हुए तकनीकी कंपनी आईबीएम ने एक क्रांतिकारी अल्ट्राकोल्ड सिस्टम पेश किया है। क्वांटम फ्रिज नाम के इस नए मॉड्यूलर क्रायोजेनिक सिस्टम को सैकड़ों क्वांटम कंप्यूटर चिप्स को आपस में जोड़ने के उद्देश्य से डिजाइन किया गया है। वर्तमान समय में क्वांटम कंप्यूटिंग की सबसे बड़ी बाधा यह है कि इसमें गणना के दौरान गलतियों या नॉइस की संभावना काफी अधिक होती है। आईबीएम का यह नया आर्किटेक्चर रियल टाइम में गलतियों को सुधारने वाली क्वांटम एरर करेक्शन तकनीक पर आधारित है, जिससे बिना किसी रुकावट के लगातार क्वांटम ऑपरेशन किए जा सकेंगे। कंपनी का लक्ष्य साल 2029 तक दुनिया का पहला पूरी तरह फॉल्ट टॉलरेंट क्वांटम कंप्यूटर बाजार में उतारना है, जिसे स्टारलिंग नाम दिया गया है। इस सुपरकंप्यूटर के आने से भौतिक विज्ञान और रसायन विज्ञान जैसे विषयों में जटिल शोध के नए रास्ते खुलेंगे और वैज्ञानिक वर्तमान सुपरकंप्यूटर की सीमाओं से बहुत आगे जाकर सटीक गणनाएं कर सकेंगे।
डीप स्पेस से भी 180 गुना ज्यादा ठंडा क्रायोजेनिक फ्रिज
मौजूदा दौर के साधारण क्वांटम सिस्टम और भविष्य के त्रुटिरहित यानी फॉल्ट टॉलरेंट क्वांटम कंप्यूटरों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर का एक बड़ा अंतर रहा है। फॉल्ट टॉलरेंट सिस्टम वे होते हैं जो बिना किसी त्रुटि के लगातार करोड़ों जटिल गणितीय ऑपरेशन पूरे कर सकते हैं। आईबीएम के शोधकर्ताओं का दावा है कि उन्होंने मॉड्यूलर और एक दूसरे से जुड़े हुए क्रायोजेनिक फ्रिज तैयार करके इस बुनियादी समस्या का समाधान खोज लिया है। आकार की बात करें तो यह नया क्रायोजेनिक ढांचा 8 फीट लंबा और 8 फीट चौड़ा है, जिसकी आंतरिक क्षमता लगभग 9 क्यूबिक फीट है। देखने में यह काफी हद तक घरेलू रेफ्रिजरेटर की तरह प्रतीत होता है, लेकिन इसकी कार्यप्रणाली सामान्य फ्रिज से बिल्कुल अलग है।
यह सिस्टम 10 मिलीकेल्विन तक के बेहद कम तापमान को हासिल कर सकता है, जो माइनस 273.14 डिग्री सेल्सियस के बराबर होता है। यह स्थिति विज्ञान में absolute zero यानी परम शून्य तापमान के बेहद करीब मानी जाती है। यह तापमान गहरे अंतरिक्ष यानी डीप स्पेस के औसतन तापमान से भी 180 गुना अधिक ठंडा है। आईबीएम के सुपरकंडक्टिंग क्वांटम प्रोसेसिंग यूनिट्स (QPUs) को सुचारू रूप से संचालित करने के लिए इतने कम तापमान की जरूरत होती है। वैज्ञानिकों ने इतिहास में पहली बार दो अलग-अलग क्रायोजेनिक मॉड्यूल के बीच लाइव कनेक्टिविटी और डेटा ट्रांसफर को सफलतापूर्वक प्रदर्शित किया है।
हीलियम कंप्रेसर और थर्मल शील्ड से कंट्रोल होता है तापमान
पारंपरिक कंप्यूटिंग की ही तरह सुपरकंडक्टिंग क्वांटम कंप्यूटर भी डेटा प्रोसेसिंग के लिए इन-बिल्ट सर्किट का इस्तेमाल करते हैं, जिन्हें गेट्स कहा जाता है। एक अकेली सिलिकॉन या सुपरकंडक्टिंग चिप पर सीमित संख्या में ही क्यूबिट्स फिट किए जा सकते हैं। आईबीएम के इस नए आर्किटेक्चर में प्रत्येक चिप को माइनस 273.14 डिग्री सेल्सियस से नीचे ठंडा रखना अनिवार्य होता है। इसका मुख्य कारण यह है कि क्यूबिट्स पर्यावरण के प्रति बेहद संवेदनशील होते हैं और उनमें बहुत अधिक नॉइस पैदा होता है, जिससे वे आम कंप्यूटर पार्ट्स की तुलना में बहुत तेजी से गलतियां करते हैं।
सुपरकंडक्टिंग धातुओं की क्वांटम विशेषताओं का सही फायदा उठाने के लिए बाहरी गर्मी और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक तरंगों के हस्तक्षेप को पूरी तरह शून्य के करीब लाना पड़ता है। इस अत्यधिक ठंडे तापमान को बनाए रखने के लिए आईबीएम के इस नए फ्रिज में हीलियम क्रायो कंप्रेसर के साथ कमर्शियल डाइल्यूशन रेफ्रिजरेशन इंजन का उपयोग किया गया है। सिस्टम को बाहरी तापमान से बचाने के लिए वैक्यूम-सील्ड कवर और मल्टीलेयर माइलर सुपर-इंसुलेशन हीट शील्ड लगाई गई है। इस सिस्टम को माइनस 269.15 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा होने में चार दिन से अधिक का समय लगता है, जिसके तुरंत बाद इसका तापमान 15 मिलीकेल्विन से भी नीचे गिर जाता है।
एल-कपलर केबल से जुड़ेगा प्रोसेसर नेटवर्क
यदि किसी क्वांटम कंप्यूटर में एक हजार से अधिक गेट्स का इस्तेमाल करना हो, तो उसके लिए अधिक चिप्स और बहुत बड़े स्थान की जरूरत होती है। हालांकि, केवल एक विशाल ठंडी इमारत बनाकर उसमें सैकड़ों चिप्स भरना व्यावहारिक नहीं है, क्योंकि चिप्स की जांच या रखरखाव के दौरान टेंपरेचर सील टूट सकती है और पूरा ऑपरेशन ठप हो सकता है। आईबीएम का मॉड्यूलर क्रायोजेनिक सिस्टम इसी समस्या को हल करता है। इसमें अलग-अलग छोटे मॉड्यूल में सीमित संख्या में चिप्स रखे जाते हैं।
इस तकनीक का सबसे बड़ा नवाचार इन अलग-अलग मॉड्यूल को एल-कपलर्स नामक एल्युमिनियम के सुपरकंडक्टिंग केबलों के माध्यम से आपस में जोड़ना है। लगभग 1 मीटर लंबे इन केबलों के जरिए अलग-अलग क्वांटम प्रोसेसर अपनी क्षमता साझा कर सकते हैं। आईबीएम में क्वांटम ऑपरेशंस के वाइस प्रेसिडेंट ओलिवर डायल ने बताया कि आमतौर पर क्यूबिट्स के बीच क्वांटम ऑपरेशन चिप के अंदर मौजूद ऑन-चिप कपलर्स से ही होते हैं, लेकिन एल-कपलर्स की मदद से अब एल्युमिनियम केबल के जरिए अलग-अलग क्रायोजेनिक मॉड्यूल के बीच डेटा ट्रांसफर संभव हो गया है, जो मॉड्यूलर डिजाइन की सफलता के लिए बेहद महत्वपूर्ण कदम है।
2027 से 2029 का रोडमैप: स्टारलिंग की तैयारी
आईबीएम की योजना साल 2027 तक इस नए मॉड्यूलर क्रायोजेनिक आर्किटेक्चर का व्यावसायिक संस्करण लॉन्च करने की है। शुरुआती चरण के इस सिस्टम में दो से तीन सेल होंगे, जो कुल मिलाकर 1000 क्यूबिट्स को सपोर्ट करेंगे। इसके बाद कंपनी का अंतिम लक्ष्य साल 2029 तक स्टारलिंग क्वांटम कंप्यूटर को बाजार में प्रस्तुत करना है। यह कंप्यूटर एक ही सेशन के भीतर 10 करोड़ क्वांटम ऑपरेशन बिना किसी गलती के पूरा करने में सक्षम होगा।
वर्तमान में वैज्ञानिकों ने दो क्रायोजेनिक मॉड्यूल को आपस में सफलतापूर्वक जोड़कर उन्हें एक साथ काम करने योग्य तापमान तक ठंडा करने में सफलता पाई है। इसके अलावा कंपनी के फ्लेमिंगो प्रोसेसर के साथ शुरुआती गेट ऑपरेशंस की टेस्टिंग पूरी कर ली गई है। आने वाले समय में आईबीएम की टीम अपनी अगली पीढ़ी के नाइटहॉक प्रोसेसर के साथ अधिक जटिल बहु-मॉड्यूल ऑपरेशंस का परीक्षण करने जा रही है।



















