चिप बनाने वाली दिग्गज कंपनी क्वालकॉम अब सिलिकॉन वैली की चर्चित स्टार्टअप मॉड्यूलर को करीब 4 बिलियन डॉलर में खरीदने जा रही है। दोनों कंपनियों ने बुधवार को इस सौदे का ऐलान किया। क्वालकॉम के मुताबिक इस डील में वह अपने कॉमन स्टॉक के 19.2 मिलियन शेयर तक जारी कर सकती है, जो कंपनी के पिछले क्लोजिंग शेयर भाव के हिसाब से 4 बिलियन डॉलर से थोड़ा कम बैठता है। यह अधिग्रहण इस साल की दूसरी छमाही में पूरा होने की उम्मीद है।
खास बात यह है कि यह सौदा ठीक उस वक्त आया है जब मॉड्यूलर को फंडिंग जुटाए महज नौ महीने हुए हैं। तब स्टार्टअप ने 1.6 बिलियन डॉलर के वैल्यूएशन पर 250 मिलियन डॉलर जुटाए थे।
मॉड्यूलर करती क्या है
मॉड्यूलर एक चिप सॉफ्टवेयर प्लेटफॉर्म बनाती और बेचती है। इसके साथ ही कंपनी की अपनी एक खास कोडिंग लैंग्वेज भी है, जिसकी मदद से डेवलपर्स ऐसा AI सॉफ्टवेयर लिख सकते हैं जो अलग-अलग चिप पर चल जाए, और हर चिप के लिए कोड दोबारा लिखने की जरूरत न पड़े। डील के तहत स्टार्टअप की पूरी टीम क्वालकॉम का हिस्सा बनेगी, जिसमें इसके दोनों को-फाउंडर और करीब 150 कर्मचारी शामिल हैं।
क्वालकॉम के प्रेसिडेंट और CEO क्रिस्टियानो आमोन ने एक बयान में कहा, “हमारा मानना है कि भविष्य ऐसे डेवलपर-फ्रेंडली, हॉरिजॉन्टल प्लेटफॉर्म का है जो अलग-अलग कंप्यूट माहौल में चल सकें और ग्राहकों को यह असली विकल्प दें कि वे AI को कहां और कैसे तैनात करना चाहते हैं।”
मोबाइल से आगे की रणनीति
यह सौदा साफ इशारा करता है कि क्वालकॉम अब सिर्फ मोबाइल डिवाइस बाजार की चिप तक सीमित नहीं रहना चाहती, जहां से कंपनी की ज्यादातर कमाई आती है। आमोन हाल ही में बता चुके हैं कि कंपनी AI गैजेट्स के लिए 40 अलग-अलग चिप डिज़ाइन पर काम कर रही है। इनमें स्मार्ट ग्लास, ज्वेलरी, ईयरबड्स, पिन और घड़ियां तक शामिल हैं। इसके अलावा क्वालकॉम डेटा सेंटर बाजार में भी बड़ा दांव लगा रही है, जहां और ज्यादा दमदार चिप की जरूरत पड़ती है।
पिछले साल के आखिर में कंपनी ने वेंटाना माइक्रो सिस्टम्स को खरीदा था। यह स्टार्टअप RISC-V पर आधारित सर्वर CPU बनाने पर केंद्रित है, जो एक ओपन-स्टैंडर्ड चिप आर्किटेक्चर है। साथ ही क्वालकॉम डेटा सेंटर के लिए कस्टम ASIC डिज़ाइन यानी एप्लिकेशन-स्पेसिफिक इंटीग्रेटेड सर्किट पर भी काम कर रही है, और चीन की बाइटडांस इसकी शुरुआती ग्राहकों में बताई जा रही है।
कौन हैं मॉड्यूलर के पीछे के दिमाग
मॉड्यूलर की शुरुआत 2022 में क्रिस लैटनर और टिम डेविस ने की थी। अपनी कंपनी शुरू करने से पहले दोनों गूगल के TPU चिप पर काम कर चुके थे। गूगल से पहले लैटनर का करियर खासा दमदार रहा है। उन्होंने ओपन सोर्स कंपाइलर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट LLVM बनाया, और एप्पल की स्विफ्ट प्रोग्रामिंग लैंग्वेज भी तैयार की। थोड़े समय के लिए वे टेस्ला के ऑटोपायलट सॉफ्टवेयर प्रोग्राम के मुखिया भी रहे। बाद में यह जिम्मेदारी मशहूर AI रिसर्चर एंड्रेज कारपैथी ने संभाली, जो हाल ही में एंथ्रोपिक से जुड़े हैं।
दिग्गजों को चुनौती और फिर उन्हीं से साझेदारी
लैटनर और डेविस एक ऐसी एकीकृत सॉफ्टवेयर परत बनाना चाहते थे जो क्लाउड कारोबार को GPU और CPU से ज्यादा से ज्यादा दम निचोड़ने में मदद करे। इसी कोशिश में मॉड्यूलर ने एनवीडिया के CUDA को चुनौती दी, जो GPU के लिए एक बंद सॉफ्टवेयर सिस्टम है, और AMD के ROCm को भी, जो ओपन-सोर्स तो है लेकिन हमेशा दूसरी चिप पर ले जाना आसान नहीं होता।
इससे मॉड्यूलर एक उलझन भरी स्थिति में आ गई। आखिरकार कंपनी ने उन्हीं बड़े चिप निर्माताओं के साथ, अमेज़न जैसी हाइपरस्केलर कंपनियों के साथ और यहां तक कि एप्पल के साथ भी साझेदारी कर ली, जबकि उन्हीं के और उनके बनाए सॉफ्टवेयर के साथ मुकाबला भी करती रही।
उस वक्त लैटनर का मानना था कि वे और डेविस जिस सॉफ्टवेयर समस्या को सुलझा रहे हैं, उसे किसी बड़ी टेक कंपनी के माहौल से बाहर रहकर ही हल किया जा सकता है, क्योंकि यह दिक्कत “स्ट्रक्चरल” है। लेकिन आखिर में क्वालकॉम का ढांचा ही भारी पड़ा।













