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उत्तराखंड के युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने बनाया उड़ने वाला वाहन, हैपिडा स्काईनेक्स का किया सफल परीक्षणतकनीक
8 अग॰ 2026, 8:26 pm (80 दिन पहले)· 3

उत्तराखंड के युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने बनाया उड़ने वाला वाहन, हैपिडा स्काईनेक्स का किया सफल परीक्षण

अल्मोड़ा निवासी रवि टम्टा ने इलेक्ट्रिक ड्रोन तकनीक पर आधारित हैपिडा स्काईनेक्स फ्लाइंग व्हीकल का प्रोटोटाइप तैयार कर सफल टेस्ट फ्लाइट पूरी की है।

उत्तराखंड के अल्मोड़ा जिले से ताल्लुक रखने वाले युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने व्यक्तिगत स्काई मोबिलिटी के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर हासिल किया है। उनकी स्टार्टअप कंपनी हैपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड ने अपने स्वदेशी फ्लाइंग व्हीकल 'हैपिडा स्काईनेक्स' के प्रोटोटाइप की सफल परीक्षण उड़ान संपन्न की है। सार्वजनिक हुए एक वीडियो में रवि टम्टा खुद इस व्हीकल के अंदर बैठकर उसे हवा में नियंत्रित और संचालित करते हुए दिखाई दे रहे हैं। उनका मुख्य विजन आम नागरिकों के दैनिक आवागमन को पारंपरिक सड़क परिवहन से आगे बढ़ाकर हवाई मार्ग तक पहुंचाना है।

इलेक्ट्रिक तकनीक और वर्टिकल टेक ऑफ पर आधारित डिजाइन

हैपिडा स्काईनेक्स पूरी तरह से एक इलेक्ट्रिक फ्लाइंग क्राफ्ट है, जिसे मॉडिफाइड ड्रोन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके डिजाइन किया गया है। रवि टम्टा के अनुसार, मानव सभ्यता ने हमेशा परिवहन के साधनों में बड़ा बदलाव देखा है। प्राचीन काल में आवागमन जानवरों के जरिए होता था, जिसके बाद गाड़ियों, रेल नेटवर्क और आधुनिक विमानों का विकास हुआ। हालांकि, मौजूदा समय में उपलब्ध एयरक्राफ्ट सिस्टम काफी महंगे हैं और सामान्य लोगों के लिए आसानी से सुलभ नहीं हैं। इसी समस्या के समाधान के रूप में यह व्हीकल वर्टिकल टेक ऑफ और लैंडिंग क्षमता प्रदान करता है।

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"मौजूदा हवाई साधन बहुत महंगे हैं, इसलिए मैं एक ऐसा विकल्प देना चाहता हूं जिसका इस्तेमाल आपात स्थिति में सीधे घर से किया जा सके।"

एक साल की मेहनत और भविष्य में रेंज बढ़ाने की योजना

इस प्रोटोटाइप व्हीकल को तैयार करने में रवि टम्टा को लगभग एक साल का समय लगा है। इसकी यात्रा दूरी और क्षमता के विषय में उन्होंने स्पष्ट किया कि इस फ्लाइंग व्हीकल की दूरी कवर करने की कोई कठोर सीमा नहीं रखी गई है। आवश्यकतानुसार इसकी बैटरी कैपेसिटी, चार्जिंग सिस्टम और रेंज को आसानी से बढ़ाया जा सकता है। यह तकनीक पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के लिए बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां सड़कों के माध्यम से यात्रा करने में अधिक समय लगता है।

डीजीसीए से स्वीकृतियों की प्रक्रिया और राज्य सरकार की सराहना

व्यावसायिक और व्यक्तिगत उपयोग के लिए जरूरी कानूनी अनुमतियों पर बात करते हुए रवि टम्टा ने बताया कि नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और संबंधित सरकारी विभागों के साथ बातचीत चल रही है। स्थानीय प्रशासन भी इस प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने में मदद कर रहा है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को साकार करने में उनके परिवार का लगातार और मजबूत समर्थन रहा है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने रवि टम्टा की इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सफलता यह साबित करती है कि उत्तराखंड के युवाओं में वैज्ञानिक सोच, नवाचार और असाधारण प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। प्रशासनिक स्तर पर इसे भविष्य की परिवहन व्यवस्था के लिए एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है।

सवाल-जवाब

हैपिडा स्काईनेक्स फ्लाइंग व्हीकल किसने बनाया है?
इस फ्लाइंग व्हीकल को उत्तराखंड के अल्मोड़ा निवासी युवा इनोवेटर रवि टम्टा ने अपनी कंपनी हैपिडा स्काई प्राइवेट लिमिटेड के तहत बनाया है।
हैपिडा स्काईनेक्स किस तकनीक पर काम करता है?
यह पूरी तरह से एक इलेक्ट्रिक क्राफ्ट है जो वर्टिकल टेक ऑफ और लैंडिंग के लिए मॉडिफाइड ड्रोन तकनीक का उपयोग करता है।
इस फ्लाइंग व्हीकल को बनाने में कितना समय लगा?
रवि टम्टा को हैपिडा स्काईनेक्स के इस प्रोटोटाइप को तैयार करने में एक साल का समय लगा।
क्या इस व्हीकल को उड़ाने के लिए सरकारी अनुमति मिल गई है?
अभी व्यावसायिक उड़ानों के लिए DGCA और संबंधित सरकारी विभागों के साथ अनुमतियों की प्रक्रिया चल रही है।
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