कियारा आडवाणी ने प्रेग्नेंसी में की टॉक्सिक की कठिन शूटिंग, सेट पर गार्ड्स बनकर ख्याल रखते थे यश और गीतू मोहनदासरेलवे स्टेशन से बाहर निकलते ही श्री हनुमान के दर्शन, अंबाला में दो सदी पुराने मंदिर की अटूट धार्मिक परंपरागुरु और नीच के मंगल की कर्क राशि में युति, इन तीन राशियों को होगा धन लाभ, पढ़ें मंगल दोष निवारण नियमसाप्ताहिक राशिफल 16 से 22 अगस्त 2026: सूर्य और बुध के गोचर से 5 राशियों की चमकेगी किस्मत, जानें किसे मिलेगा धन और पदोन्नतिकानपुर पुलिस कमिशनरेट में विवाहिता ने दी आत्मदाह की धमकी, ससुराल पक्ष पर तंत्र-मंत्र और दहेज उत्पीड़न का आरोपशुक्रवार तड़के भारत से अफगानिस्तान तक भूकंप के 4 झटके, नासिक और चंबा समेत कांपे कई इलाकेखीरा, टमाटर और मूंगफली का यह देसी सलाद रखेगा वजन पर काबू, जानिए इसे बनाने की आसान विधि और फायदेनल्सार कानून स्नातकों की वकालत पर लगी रोक हटी, बीसीआई ने सीजेआई दीक्षांत समारोह विवाद में वापस लिया फैसला19 अगस्त को अश्लेषा नक्षत्र का रुख करेंगे देवगुरु, इन चार राशि के जातकों का बदलेगा भाग्यचीनी मिशन चांग-ई-8 के साथ 2029 में चंद्रमा पर पहुंचेगा पाकिस्तान का पहला रोवर जिन्ना-1
नल्सार कानून स्नातकों की वकालत पर लगी रोक हटी, बीसीआई ने सीजेआई दीक्षांत समारोह विवाद में वापस लिया फैसलातेलंगाना
14 अग॰ 2026, 7:45 am (1 घंटे पहले)· 3

नल्सार कानून स्नातकों की वकालत पर लगी रोक हटी, बीसीआई ने सीजेआई दीक्षांत समारोह विवाद में वापस लिया फैसला

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने नल्सार यूनिवर्सिटी हैदराबाद के 2026 बैच के स्नातकों के वकालत पंजीकरण पर लगी रोक हटा दी है। सीजेआई सूर्यकांत के दीक्षांत समारोह विरोध विवाद की समीक्षा के बाद छात्रों को राहत दी गई है।

हैदराबाद स्थित नल्सार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के वर्ष 2026 बैच के कानून स्नातकों के लिए एक बड़ी राहत सामने आई है। बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने राज्य बार काउंसिलों को दिए गए अपने उस पूर्व निर्देश को आधिकारिक रूप से वापस ले लिया है, जिसके तहत इस बैच के छात्रों के वकील के रूप में पंजीकरण पर रोक लगा दी गई थी। बीसीआई के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय के बाद छात्रों के खिलाफ प्रस्तावित सभी अनुशासनात्मक कार्यवाहियों को पूरी तरह बंद कर दिया गया है। परिषद की समीक्षा में पाया गया कि अधिकांश विद्यार्थियों की ऐसी कोई मंशा नहीं थी कि वे दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि और भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत का विरोध करने वाले किसी अभियान में शामिल होकर अव्यवस्था फैलाएं।

बार काउंसिल की समीक्षा और छात्रों के लिए निर्देश

बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने वरिष्ठ अधिवक्ताओं, बार एसोसिएशन के सदस्यों, कानून के विद्यार्थियों और आम जनता से प्राप्त विस्तृत प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के पश्चात यह कदम उठाया। जांच में यह स्पष्ट हुआ कि नल्सार के वर्ष 2026 बैच के विद्यार्थियों की किसी भी प्रकार की गड़बड़ी, आंदोलन अथवा संस्थागत व्यवधान में कोई भूमिका नहीं थी। बीसीआई ने स्नातकों को उनके भावी कानूनी करियर के लिए शुभकामनाएं दीं और उन्हें स्मरण कराया कि विधि की शिक्षा पूर्ण करने के बाद वे देश की न्याय व्यवस्था के एक महत्वपूर्ण घटक के रूप में जिम्मेदारी संभालेंगे।

लोकतांत्रिक व्यवस्था में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए बीसीआई ने कहा कि विद्यार्थियों को अपनी राय खुलकर व्यक्त करने का अधिकार है, किंतु ऐसा करते समय संवैधानिक संस्थाओं और उनके पदों की गरिमा का सम्मान बनाए रखना अनिवार्य है। परिषद ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय और मुख्य न्यायाधीश का पद देश के लिए सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक हैं। किसी निर्णय अथवा नीति से असहमति प्रकट करना लोकतंत्र में स्वाभाविक है, परंतु सार्वजनिक मंचों पर संवैधानिक संस्थाओं का अनादर करना किसी मुद्दे का हल निकालने के बजाय मामले को अधिक उलझा देता है। इन्हीं आधारों को ध्यान में रखते हुए बार काउंसिल ने 2026 बैच के स्नातकों के विरुद्ध सभी रोक हटाने की घोषणा की।

दीक्षांत समारोह विवाद और छात्रों के विरोध की वजह

यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब नल्सार यूनिवर्सिटी के वर्ष 2026 बैच के लगभग 70 विद्यार्थियों के एक समूह ने विश्वविद्यालय प्रशासन को एक औपचारिक पत्र लिखा। कुलपति, कुलसचिव, संकाय सदस्यों और प्रशासनिक अधिकारियों को भेजे गए इस पत्र में 2026 के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने के फैसले पर पुनर्विचार का आग्रह किया गया था। यद्यपि नल्सार में दीक्षांत समारोह के दौरान भारत के मुख्य न्यायाधीश को आमंत्रित करने की एक दीर्घकालिक परंपरा रही है, परंतु विरोध दर्ज कराने वाले छात्रों का कहना था कि अकादमिक स्वतंत्रता और संवैधानिक जवाबदेही जैसे मूल्य सर्वोपरि हैं।

छात्रों की आपत्तियां मुख्य रूप से नीट परीक्षा से जुड़े विवादों और हाल ही में जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन के दौरान उत्पन्न हुई परिस्थितियों पर केंद्रित थीं। 70 छात्रों द्वारा शुरू किया गया यह पत्र अभियान देखते ही देखते विश्वविद्यालय के अन्य बैचों में भी फैल गया। जुलाई के अंत तक वर्ष 2027 से 2031 बैच के लगभग 380 से 450 अतिरिक्त विद्यार्थी भी इस विरोध में शामिल हो गए थे।

न्यायिक टिप्पणियां और मामले का समापन

छात्रों के असंतोष के पीछे उच्चतम न्यायालय में हुई एक याचिका की सुनवाई का भी संदर्भ था। जंतर मंतर पर सीजेपी मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई के खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते समय CJI सूर्यकांत ने टिप्पणी करते हुए कहा था कि "हमारा समय बर्बाद मत कीजिए।" इस टिप्पणी के बाद कानून के छात्रों के बीच संस्थागत जवाबदेही और अभिव्यक्ति के अधिकारों को लेकर बहस छिड़ गई थी।

बार काउंसिल ऑफ इंडिया द्वारा जारी नए फैसले के बाद नल्सार 2026 बैच के विधि स्नातकों के लिए विभिन्न राज्य बार काउंसिलों में एडवोकेट के रूप में पंजीकृत होने का रास्ता साफ हो गया है। छात्र अब बिना किसी प्रशासनिक रुकावट के कानूनी प्रैक्टिस प्रारंभ कर सकेंगे। बीसीआई चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा के X पर जारी संदेश और नियामक मंडल के रुख के साथ यह विवाद अब पूरी तरह समाप्त हो गया है।

ये भी पढ़ें

सवाल-जवाब

बीसीआई ने नल्सार के 2026 बैच के छात्रों पर से प्रतिबंध क्यों हटाया?
बार काउंसिल ऑफ इंडिया ने समीक्षा के बाद पाया कि अधिकांश छात्र बेकसूर थे और उनकी मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत के विरोध अभियान में व्यवधान डालने या संवैधानिक पद का अपमान करने की कोई मंशा नहीं थी।
नल्सार के छात्रों ने सीजेआई सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने का विरोध क्यों किया था?
छात्रों ने नीट विवाद तथा जंतर मंतर पर प्रदर्शनकारियों से जुड़ी याचिकाओं की सुनवाई के दौरान अदालत में हुई टिप्पणियों को लेकर आपत्ति जताते हुए पत्र लिखा था।
इस विरोध प्रदर्शन और पत्र अभियान में कुल कितने छात्र शामिल थे?
शुरुआत 2026 बैच के लगभग 70 विद्यार्थियों द्वारा पत्र लिखने से हुई थी, जिसके बाद जुलाई के अंत तक अन्य बैचों के मिलाकर लगभग 380 से 450 छात्र इसमें शामिल हो गए थे।
बार काउंसिल के इस फैसले से लॉ ग्रेजुएट्स को क्या लाभ होगा?
2026 बैच के स्नातक अब देश के विभिन्न राज्य बार काउंसिलों में बिना किसी रुकावट के एडवोकेट के रूप में अपना एनरोलमेंट कराकर कानूनी वकालत शुरू कर सकेंगे।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·16 मिनट पहले

यह घटना कानूनी शिक्षा संस्थानों और विधिक निकायों के बीच के संवेदनशील संतुलन को दर्शाती है। बार काउंसिल द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेना यह साबित करता है कि विरोध और पेशेवर अधिकारों को अलग रखा जाना चाहिए। हालांकि, भविष्य में छात्रों के लिए यह एक कड़ा संदेश है कि संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, अन्यथा ऐसे मामलों में विधिक निकायों की सख्त नजर बनी रहेगी।

Ravikash Gupta@ravikash·16 मिनट पहले

यह घटना कानूनी शिक्षा संस्थानों और विधिक निकायों के बीच के संवेदनशील संतुलन को दर्शाती है। बार काउंसिल द्वारा अनुशासनात्मक कार्रवाई वापस लेना यह साबित करता है कि विरोध और पेशेवर अधिकारों को अलग रखा जाना चाहिए। हालांकि, भविष्य में छात्रों के लिए यह एक कड़ा संदेश है कि संवैधानिक पदों की गरिमा बनाए रखना उनकी प्राथमिक जिम्मेदारी है, अन्यथा ऐसे मामलों में विधिक निकायों की सख्त नजर बनी रहेगी। साथ ही, यह कॉर्पोरेट और पेशेवर जगत में भी एक बड़ा सबक है कि संस्थागत असहमति और करियर के अवसरों को आपस में न उलझाया जाए, ताकि युवा प्रोफेशनल्स बिना किसी प्रशासनिक बाधा के अपने भविष्य की ओर बढ़ सकें।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR