तेलंगाना में इस साल मॉनसून की सुस्ती के बीच राजनीतिक माहौल बेहद गर्म हो गया है। राज्य में कम बारिश के कारण पैदा हो रहे हालात पर सत्तारूढ़ कांग्रेस और मुख्य विपक्षी दल भारत राष्ट्र समिति के बीच तीखा वाकयुद्ध शुरू हो गया है। कांग्रेस की ओर से बीआरएस के वरिष्ठ नेता टी. हरीश राव पर बेहद गंभीर और अजीबोगरीब आरोप लगाए गए हैं, जिसमें कहा गया है कि उन्होंने राज्य में मॉनसून को रोकने और सूखा जैसी स्थिति पैदा करने के लिए विशेष अनुष्ठान करवाए हैं। दूसरी तरफ बीआरएस ने इन तमाम दावों को बेबुनियाद बताते हुए करारा हमला बोला है।
कांग्रेस का गंभीर आरोप: तांत्रिक क्रियाओं से बारिश रोकने का दावा
तेलंगाना कांग्रेस अध्यक्ष बी. महेश कुमार गौड़ ने सार्वजनिक रूप से दावा किया है कि बीआरएस नेता टी. हरीश राव ने राज्य में बारिश को बाधित करने के इरादे से क्षुद्र पूजा यानी तांत्रिक अनुष्ठान करवाए। कांग्रेस का आरोप है कि विपक्ष की मंशा राज्य में फसलों को नुकसान पहुंचाने और जनता को संकट में डालने की है। सत्तारूढ़ दल के अनुसार, यदि राज्य में सूखा पड़ता है और आम लोग परेशान होते हैं, तो इससे कांग्रेस सरकार के खिलाफ जनाक्रोश पैदा होगा और बीआरएस को इसका सीधा राजनीतिक लाभ मिल सकेगा।
अपने आरोपों को विस्तार देते हुए बी. महेश कुमार गौड़ ने विशिष्ट तिथियों और स्थानों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मार्च, मई और जून के महीनों के दौरान टी. हरीश राव ने कर्नाटक के शिवमोगा और तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली (तिरुचि) स्थित कुछ विशिष्ट मंदिरों की यात्राएं की थीं। कांग्रेस अध्यक्ष का दावा है कि इन धार्मिक स्थलों पर इस प्रकार के विशेष अनुष्ठान किए जाते हैं। गौड़ ने बीआरएस नेता से सवाल किया कि यदि उन्होंने बारिश रोकने या सरकार को नुकसान पहुंचाने के उद्देश्य से कोई पूजा नहीं कराई है, तो उन्हें जनसमक्ष आकर अपनी इन यात्राओं के वास्तविक उद्देश्य को स्पष्ट करना चाहिए।
बीआरएस का पलटवार: हिंदू धर्म और अघोरी परंपरा का अपमान
कांग्रेस के इन आरोपों पर बीआरएस की ओर से कड़ी और तीखी प्रतिक्रिया आई है। बीआरएस नेता आर. एस. प्रवीण कुमार ने इन आरोपों को घटिया दर्जे की राजनीति करार देते हुए पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेतृत्व ने इस तरह के बेतुके दावे करके न केवल टी. हरीश राव की छवि धूमिल करने का प्रयास किया है, बल्कि पूरे हिंदू समाज और प्राचीन अघोरी परंपरा का भी गंभीर अपमान किया है।
आर. एस. प्रवीण कुमार ने कांग्रेस पार्टी से मांग की है कि उसके नेताओं को हिंदू समुदाय की भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाले अपने बयानों के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए। वर्तमान में कांग्रेस ने इन आरोपों को साबित करने के लिए कोई सार्वजनिक दस्तावेज या ठोस सबूत पेश नहीं किया है। दूसरी तरफ बीआरएस इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर रही है, जिससे राज्य का राजनीतिक माहौल पूरी तरह गर्माया हुआ है।
तेलंगाना में बारिश के आंकड़े और सूखे का संकट
यह पूरा राजनीतिक विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब तेलंगाना में मॉनसून की गति काफी धीमी बनी हुई है और किसान बारिश का इंतजार कर रहे हैं। राज्य के कई हिस्सों में सामान्य से काफी कम वर्षा दर्ज की गई है, जिससे कृषि गतिविधियों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है और सूखे की आशंका गहराती जा रही है।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 10 जुलाई तक की अवधि में तेलंगाना में सामान्य तौर पर 6.5 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की जानी चाहिए थी। हालांकि, इस साल इस अवधि के दौरान केवल 4.3 सेंटीमीटर बारिश ही हो सकी है, जो सामान्य स्तर से लगभग 33 प्रतिशत कम है। इसकी तुलना में पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान राज्य में 6.6 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई थी।
राज्य के कुल 33 जिलों के आंकड़ों का विश्लेषण करने पर पता चलता है कि केवल 13 जिलों में ही अब तक सामान्य बारिश हुई है। इसके विपरीत, 20 जिले ऐसे हैं जो भारी बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं। यदि 1 जून से 10 जुलाई तक के पूरे मॉनसून सत्र की बात करें, तो राज्य में 19.5 सेंटीमीटर वर्षा होनी चाहिए थी, लेकिन वास्तव में केवल 15.8 सेंटीमीटर बारिश दर्ज की गई है। इस तरह पूरे तेलंगाना राज्य में कुल मिलाकर लगभग 19 प्रतिशत बारिश की कमी बनी हुई है।



















