प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत ने नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (नालसर) यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनने के आमंत्रण को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगा दिया है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उन्होंने इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए कभी सहमति ही नहीं दी थी, इसलिए वहां जाने अथवा न जाने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।
दीक्षांत समारोह को लेकर बढ़ा था विवाद
नालसर यूनिवर्सिटी के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में सीजेआई सूर्यकांत की उपस्थिति की खबरों के बीच छात्रों के एक वर्ग ने विरोध दर्ज कराया था। इसके बाद मामला उस समय और अधिक पेचीदा हो गया जब बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने इस विवाद में हस्तक्षेप किया। बीसीआई ने विरोध में शामिल स्नातकोत्तर छात्रों के बहिष्कार का फरमान जारी कर दिया था, हालांकि बाद में विवाद बढ़ता देख बीसीआई ने अपना बयान वापस लेते हुए खेद प्रकट किया था।
बीसीआई के हस्तक्षेप पर जताई थी कड़ी आपत्ति
मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई से जवाब भी तलब किया था। सीजेआई सूर्यकांत ने बार काउंसिल के इस प्रकार के कड़े कदम पर असंतोष व्यक्त करते हुए कहा था कि यह मुद्दा सीधे तौर पर उनके और विद्यार्थियों के बीच का है और इसमें किसी तीसरे पक्ष के अनावश्यक हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं थी।
जोधपुर में कुलपतियों की बैठक के बाद दिया बयान
राजस्थान के जोधपुर में देश की विभिन्न नेशनल लॉ यूनिवर्सिटीज के कुलपतियों (VCs) के सम्मेलन को संबोधित करने के बाद सीजेआई सूर्यकांत ने स्थिति साफ की। उन्होंने बताया कि नालसर प्रशासन की ओर से मिले निमंत्रण पर उनकी तरफ से कभी कोई स्वीकृति नहीं दी गई थी। इस बयान के बाद दीक्षांत समारोह के मुख्य अतिथि को लेकर बना संशय समाप्त हो गया है।





















