सार्वजनिक परिवहन के साधनों को परस्पर जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए तेलंगाना प्रशासन ने दोहरी टिकटिंग की मशक्कत समाप्त कर दी है। राजधानी के दैनिक यात्रियों को अब भूमिगत रेलगाड़ियों और सड़क पर दौड़ने वाली सरकारी सिटी बसों में आवागमन के लिए पृथक टोकन या पर्ची नहीं खरीदनी पड़ेगी। प्रजा भवन परिसर में आयोजित औपचारिक समारोह के दौरान उप मुख्यमंत्री मल्लू भट्टी विक्रमार्क तथा परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने संयुक्त रूप से इस एकीकृत आवागमन प्रणाली की शुरुआत की। शासन का मुख्य उद्देश्य निजी वाहनों पर निर्भरता घटाना, प्रमुख चौराहों पर जाम की स्थिति से निपटना तथा वायु प्रदूषण के स्तर को नियंत्रित करना है।
साझा पास योजना की संरचना और किराया विकल्प
सड़क एवं रेल यातायात को एक धागे में पिरोने वाली इस व्यवस्था को तेलंगाना सरकार, टीजीएसआरटीसी तथा हैदराबाद मेट्रो रेल लिमिटेड के आपसी समन्वय से धरातल पर उतारा गया है। यात्रियों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने दो अलग श्रेणियां निर्धारित की हैं। प्रतिदिन आने जाने वाले लोगों के लिए सिंगल डे पास की दर चार सौ रुपये रखी गई है, जिसमें तीन सौ रुपये रेल यात्रा मद में तथा सौ रुपये बस भाड़े के रूप में आवंटित होंगे।
नियमित नौकरीपेशा और व्यवसायियों की सुविधा के लिए मासिक पास की व्यवस्था भी की गई है, जिसकी कुल लागत साढ़े आठ हजार रुपये निर्धारित है। इस मासिक शुल्क में सात हजार रुपये मेट्रो प्रणाली के हिस्से में जाएंगे, जबकि पंद्रह सौ रुपये बस निगम के खाते में दर्ज होंगे। मेट्रो स्टेशन के बुकिंग पटल से कोई भी नागरिक इसे प्राप्त कर सकता है। शुरुआती चरण में कार्ड जारी कराते समय यात्रियों को सौ रुपये बतौर जमानत राशि जमा करानी होगी, जो भविष्य में स्मार्ट कार्ड वापस करने की स्थिति में पूरी तरह लौटा दी जाएगी।
भौगोलिक दायरा और सेवाओं की पात्रता
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि साझा पास का लाभ शहर के बाहरी घेरे यानी आउटर रिंग रोड की परिधि में संचालित सभी सामान्य तथा एक्सप्रेस नगरीय बसों और संपूर्ण मेट्रो नेटवर्क पर मिलेगा। हालांकि, हवाई अड्डे के मार्ग पर चलने वाली विशेष पुष्पक वातानुकूलित बस सेवा को इस संयुक्त योजना से अलग रखा गया है। इसके अतिरिक्त शेष सभी मार्गों पर यात्री बिना किसी व्यवधान के एक माध्यम से उतरकर दूसरे में सवार हो सकेंगे।
डिजिटल टिकटिंग के लिए नया मोबाइल समाधान
काउंटरों पर कतारें कम करने और नकद भुगतान की दिक्कतों को दूर करने के लिए टीजीएसआरटीसी ने ‘मी टिकट’ मोबाइल ऐप का लोकार्पण किया है। इस डिजिटल ऐप्लिकेशन के जरिए यात्री अपने स्मार्टफोन से प्रस्थान स्थल तथा गंतव्य चुनकर त्वरित टिकट कटा सकते हैं। ऑनलाइन माध्यम से राशि का भुगतान होते ही फोन पर एक गतिशील क्यूआर कोड बन जाता है। वाहन में यात्रा के दौरान कंडक्टर इस डिजिटल कोड का सत्यापन करेगा, जिससे खुले पैसों को लेकर होने वाली रोजमर्रा की तकरार पूरी तरह खत्म हो जाएगी।
साप्ताहिक बस पास और नवीनीकरण की प्रक्रिया
डिजिटल प्रणाली को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से छह सौ रुपये मूल्य का एक विशेष वीकली बस पास भी प्रस्तुत किया गया है। यह सुविधा केवल ‘मी टिकट’ ऐप्लिकेशन पर ही उपलब्ध कराई गई है, जिसमें किसी भी प्रकार के कागजी दस्तावेज की जरूरत नहीं होगी। खरीद संपन्न होते ही यात्री के फोन पर एक गतिशील कोड सक्रिय हो जाता है, जिसे कंडक्टर द्वारा सीधे स्कैन किया जा सकेगा। इसके अंतर्गत सात दिनों तक नगर सीमा की सभी स्वीकृत बसों में असीमित यात्रा की छूट मिलेगी, तथा वैधता समाप्त होने पर ऐप से ही उसका नवीनीकरण कराया जा सकेगा।
प्रणाली के प्रति जनविश्वास जगाने मंत्रियों का सफर
आम जनता के बीच इस नई पहल के प्रति भरोसा कायम करने के लिए सरकार के शीर्ष मंत्रियों ने जमीनी स्तर पर यात्रा करने की योजना बनाई। उप मुख्यमंत्री ने अपने मंत्रिमंडलीय सहयोगियों के लिए स्वयं एक दिवसीय पास खरीदे। परिवहन मंत्री पोन्नम प्रभाकर ने कहा, “कल सुबह 10 बजे हम बेगमपेट मेट्रो स्टेशन से कॉमन पास लेकर सफर शुरू करेंगे और फिर आगे की यात्रा आरटीसी बस से पूरी करेंगे।”
ऑटो रिक्शा की नई किराया दरें अधिसूचित
परिवहन नेटवर्क के आधुनिकीकरण के साथ ही प्रशासन ने तिपहिया वाहनों के भाड़े में भी एक दशक बाद संशोधन कर दिया है। वर्ष 2014 के पुराने ढांचे को बदलते हुए पहले 1.6 किलोमीटर का आधार किराया तीस रुपये नियत किया गया है। इस न्यूनतम दूरी के उपरांत प्रत्येक किलोमीटर की दर चौदह रुपये लागू होगी। इसके साथ ही पचहत्तर पैसे प्रति मिनट की दर से प्रतीक्षा शुल्क तथा पचास पैसे का सामान प्रभार जोड़ा जाएगा। देर रात ग्यारह बजे से अलसुबह पांच बजे के मध्य यात्रा करने वाले मुसाफिरों को सामान्य तालिका से डेढ़ गुना अधिक राशि चुकानी होगी।





















