विंबलडन चैंपियन जूलियन कैश और लॉयड ग्लासपूल ने एटीपी टूर पर बड़ा आरोप लगाया है, उनका कहना है कि टूर के प्रस्तावित बदलाव डबल्स खिलाड़ियों की नौकरी छीनने वाले हैं। पिछले साल विंबलडन में साथ मिलकर अपना पहला ग्रैंड स्लैम खिताब जीतने वाली यह ब्रिटिश जोड़ी उन प्रमुख डबल्स खिलाड़ियों में शामिल है जिन्होंने पुरुष टूर पर आरोप लगाया है कि वह डबल्स को बतौर करियर विकल्प खत्म करने पर तुला है।
ग्लासपूल कहते हैं, "विंबलडन के दौरान हमें ऐसी बातों से जूझना पड़े या इनके बारे में सोचना भी पड़े, यह वाकई खीझ पैदा करने वाला है। मुझे नहीं पता वे इससे हासिल क्या करना चाहते हैं।"
छोटे ड्रॉ, कम मौके
नए प्रस्तावों के तहत एटीपी 1000 टूर्नामेंट में अब सिर्फ 16 टीमें ही डबल्स खेल पाएंगी, जबकि छोटे टूर्नामेंट्स में यह संख्या घटकर 8 टीम रह जाएगी। मतलब साफ है, हर सीजन में डबल्स खिलाड़ियों के लिए बड़े टूर्नामेंट्स में उतरने के मौके और उनसे मिलने वाली कमाई, दोनों काफी घट जाएंगे। टूर्नामेंट आयोजकों का यह भी कहना है कि डबल्स इवेंट्स का मौजूदा आकार खिलाड़ियों के लिए लॉकर रूम और प्रैक्टिस कोर्ट जैसी सुविधाओं पर दबाव बढ़ाता है।
इनाम राशि में भी सिंगल्स की तरफ झुकाव
प्रस्ताव के मुताबिक इनाम राशि में डबल्स का हिस्सा 20 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने की बात भी है, और बची हुई रकम सिंगल्स खिलाड़ियों में बांट दी जाएगी। कमाई का यह फासला इंडियन वेल्स में साफ नजर आया, जहां साल के पहले मास्टर्स 1000 टूर्नामेंट में सिंगल्स खिताब जीतने पर यानिक सिनर को $1.151m (£860,000) मिले, जबकि डबल्स खिताब जीतने वाले गीदो आंद्रेओत्सी और मानुएल गिनार् को $234,000 (£175,000) प्रत्येक मिले।
"हमें कमतर मत आंकिए"
ब्रिटेन के पूर्व वर्ल्ड नंबर वन नील स्कूप्स्की का कहना है कि खिलाड़ियों का गुस्सा इस बात से जुड़ा है कि वे कितनी मेहनत करते हैं और बदले में उन्हें कितनी कम पहचान मिलती है। स्कूप्स्की कहते हैं, "हम समझते हैं कि इस खेल में हमारी स्थिति क्या है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि हमें कमतर आंका जाना चाहिए। कुछ लोगों को अंदाजा नहीं है कि हम इस खेल के लिए रोज कितनी मेहनत करते हैं। ऐसा नहीं है कि हम बस टूर्नामेंट में पहुंचते हैं, मस्ती करते हैं और अगले टूर्नामेंट की तरफ निकल जाते हैं।"
टॉप 30 से बाहर वालों का भविष्य खतरे में
डबल्स खिलाड़ियों का कहना है कि इन बदलावों से दुनिया की टॉप 30 रैंकिंग से बाहर के खिलाड़ियों का करियर खत्म हो जाएगा, क्योंकि छोटे ड्रॉ में उनके लिए जगह ही नहीं बचेगी। एटीपी ने अपनी योजना ऑल इंग्लैंड क्लब में हुई खिलाड़ियों की एक बैठक में रखी, जहां डबल्स खिलाड़ियों की तरफ से इटली के आंद्रेया वावासोरी और अल साल्वाडोर के मार्सेलो अरेवालो मौजूद थे। दो बार के फ्रेंच ओपन चैंपियन अरेवालो ने कहा, "यह अभी सिर्फ एक प्रस्ताव है। लेकिन यह समय टेनिस खिलाड़ियों को ज्यादा मौके देने का होना चाहिए, न कि उनसे मौके छीनने का।" एटीपी के एक प्रवक्ता ने कहा, "हम डबल्स प्रोडक्ट, ड्रॉ के आकार और खिलाड़ियों को मिलने वाली रकम के बंटवारे का आकलन कर रहे हैं, ताकि टूर पर डबल्स की अहम भूमिका बरकरार रखते हुए एक लंबे समय तक टिकने वाला मॉडल तैयार किया जा सके।"
क्या 20 प्रतिशत हिस्सा ज्यादा है?
खेल जगत में कई लोगों का मानना है कि डबल्स को मिलने वाला 20 प्रतिशत हिस्सा उस दिलचस्पी के मुकाबले कहीं ज्यादा है जो दर्शक इस फॉर्मेट में दिखाते हैं। मौजूदा ऑस्ट्रेलियन ओपन चैंपियन स्कूप्स्की खुद मानते हैं कि एटीपी टूर पर डबल्स मैच शायद ही कभी खचाखच भरे स्टेडियम में खेले जाते हैं, और चाहे स्टेडियम में हो या घर से देख रहे दर्शक, सिंगल्स ही असली आकर्षण बना रहता है। इसके बावजूद डबल्स खिलाड़ियों का मानना है कि टूर को अपने इस फॉर्मेट को बढ़ावा देने और उसमें दिलचस्पी बढ़ाने के लिए कहीं ज्यादा मेहनत करनी चाहिए, न कि सीधे कटौती कर देनी चाहिए।
"खिलाड़ियों की हिफाजत के लिए बनी थी एटीपी"
कैश कहते हैं, "हम सब एटीपी के सदस्य हैं, हम सब सदस्यता शुल्क चुकाते हैं और इसे बनाया ही इसलिए गया था ताकि खिलाड़ियों की हिफाजत हो सके। यह खेल के किसी हिस्से को खत्म करने के लिए नहीं है।" डबल्स खिलाड़ी इस फॉर्मेट के 1884 में विंबलडन से शुरू हुए इतिहास का हवाला देकर कहते हैं कि इसे कहीं ज्यादा सम्मान मिलना चाहिए। उनका यह भी कहना है कि क्लब स्तर पर ज्यादातर खिलाड़ी खुद डबल्स ही खेलते हैं, इसलिए उनकी नजर में यह फॉर्मेट सिंगल्स के मुकाबले आम दर्शकों के लिए कहीं ज्यादा जुड़ाव वाला है।
"यह प्रोडक्ट की नहीं, मार्केटिंग की समस्या है"
दुनिया में संयुक्त रूप से छठे नंबर पर मौजूद कैश और ग्लासपूल का मानना है कि असली दिक्कत मार्केटिंग की है, खासकर सोशल मीडिया पर, न कि खुद डबल्स फॉर्मेट में किसी कमी की। 32 साल के ग्लासपूल कहते हैं, "वे कहते हैं कि यह प्रोडक्ट की समस्या है, लेकिन जब सिंगल्स के जाने-पहचाने और मार्केट किए गए खिलाड़ी डबल्स कोर्ट पर उतरते हैं तो स्टेडियम खचाखच भर जाता है। तो फिर यह प्रोडक्ट की समस्या तो नहीं हुई ना? अगर आप खिलाड़ियों को जानते हैं तो आप उन्हें सिंगल्स हो या डबल्स, देखेंगे ही।"
बिना बातचीत के लिए गए फैसले पर गुस्सा
2023 में नीदरलैंड्स के वेस्ली कूलहॉफ के साथ मिलकर विंबलडन का पुरुष डबल्स खिताब जीत चुके स्कूप्स्की अभी दुनिया में नंबर पांच पर हैं। उनका कहना है कि खिलाड़ियों का ज्यादातर गुस्सा इस बात को लेकर है कि प्रस्ताव लाने से पहले उनसे कोई सलाह नहीं ली गई। 36 साल के स्कूप्स्की चाहते हैं कि एटीपी "ज्यादा पारदर्शी" बने, हालांकि उन्हें नहीं लगता कि किसी तरह का विरोध प्रदर्शन खिलाड़ियों के काम आएगा। ग्लासपूल का आरोप है कि गवर्निंग बॉडी इस मुद्दे पर खिलाड़ियों के इस समूह के साथ बैठकर बात करने को तैयार ही नहीं है। उन्होंने कहा, "वे बस यही कहते हैं कि इससे कुछ हासिल नहीं होगा क्योंकि आप लोग गुस्से में हैं। हम कहते हैं कि हम गुस्से में इसलिए हैं क्योंकि आप हमारी नौकरी छीन रहे हैं, तो आप हमसे क्या चाहते हैं? हमने 20 साल मेहनत करके यह मुकाम हासिल किया है।"
बड़े नामों से उम्मीद
कैश और ग्लासपूल को उम्मीद है कि खेल के बड़े नाम खुलकर बोलेंगे और एटीपी टूर पर दबाव बनाएंगे ताकि यह कटौती टल जाए। ग्लासपूल कहते हैं, "मुझे लगता है कि इन प्रस्तावों का समय चुनना एक सोची-समझी चाल है। उन्हें पता है कि टॉप खिलाड़ी हमारी मदद करेंगे, लेकिन ग्रैंड स्लैम के दौरान उनके ऐसा करने की संभावना सबसे कम रहती है क्योंकि तब सबका ध्यान सबसे बड़े टूर्नामेंट्स पर होता है।" कैश ने एक पुरानी मिसाल का जिक्र करते हुए कहा, "मुझे याद है 2011 में भी कुछ ऐसी ही स्थिति बनी थी, तब राफा (नडाल) और रोजर (फेडरर) खुद आगे आए थे और उसी के साथ पूरा मामला वहीं थम गया था।"
महिला डबल्स पर फिलहाल कोई असर नहीं
महिला टेनिस की बात करें तो डब्ल्यूटीए टूर की फिलहाल महिला डबल्स इवेंट्स में इस तरह का कोई बदलाव करने की योजना नहीं है।













