सिंसिनाटी ओपन के दूसरे दौर में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला, जहां अर्जेंटीना के टेनिस खिलाड़ी थियागो तिरानते ने दुनिया के पांचवें नंबर के खिलाड़ी नोवाक जोकोविच को 2-6 6-4 6-4 से हराकर टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। अपने करियर में तीन बार सिंसिनाटी ओपन का खिताब जीत चुके 39 वर्षीय नोवाक जोकोविच मैच के दौरान भीषण गर्मी और उमस से काफी परेशान नजर आए। जुलाई में विंबलडन के सेमीफाइनल में यानिक सिन्नर के खिलाफ मिली हार के बाद 24 बार के ग्रैंड स्लैम चैंपियन जोकोविच का यह पहला मुकाबला था, लेकिन वह इस मुकाबले में अपनी लय बरकरार नहीं रख सके।
भीषण गर्मी और कोर्ट पर मेडिकल टाइमआउट
मुकाबले की शुरुआत में नोवाक जोकोविच ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला सेट आसानी से 6-2 से अपने नाम किया। हालांकि, दूसरे सेट में मौसम की मार ने खेल का रुख बदल दिया। दूसरे सेट का तीसरा गेम लगभग 18 मिनट तक चला, जिसके बाद जोकोविच शारीरिक रूप से काफी पस्त दिखने लगे। मैच के दौरान वह अपने हाथों और घुटनों के बल कोर्ट पर गिर पड़े और उन्हें दो बार उल्टी होती हुई भी दिखाई दी। जोकोविच की बिगड़ती हालत को देखते हुए फिजियो और डॉक्टर तुरंत कोर्ट पर पहुंचे और उन्हें मेडिकल टाइमआउट दिया गया। दूसरा सेट 6-4 से जीतकर तिरानते ने मैच में बराबरी कर ली, जिसके बाद दोनों खिलाड़ी ड्रेसिंग रूम में लौट गए।
मैच का टर्निंग प्वाइंट और तीसरे सेट का रोमांच
ड्रेसिंग रूम से लौटने के बाद तीसरे और निर्णायक सेट में कड़ा मुकाबला देखने को मिला। दुनिया के 50वें नंबर के खिलाड़ी थियागो तिरानते ने दबाव के बावजूद बेहतरीन संयम दिखाया। तीसरे सेट के नौवें गेम में जोकोविच की सर्विस टूट गई, जिसका पूरा फायदा उठाते हुए दक्षिण अमेरिकी खिलाड़ी ने बढ़त बना ली। इसके बाद तिरानते ने अपनी सर्विस बचाते हुए मुकाबला 2-6 6-4 6-4 से अपने नाम कर लिया।
ऐतिहासिक रिकॉर्ड और करियर की सबसे बड़ी जीत
ओहायो के इस टूर्नामेंट में 2005 में अपना पदार्पण करने के बाद से नोवाक जोकोविच कभी भी अंतिम 32 के दौर से पहले बाहर नहीं हुए थे। इस लिहाज से यह उनके करियर की दुर्लभ हार में से एक है। दूसरी तरफ थियागो तिरानते के लिए यह जीत उनके करियर की सबसे बड़ी उपलब्धि बन गई। अपनी इस ऐतिहासिक जीत पर खुशी जताते हुए अर्जेंटीना के खिलाड़ी ने कहा कि यह उनके करियर की सबसे बेहतरीन जीत है। उन्होंने स्वीकार किया कि जोकोविच जैसे महान खिलाड़ी के सामने खेलते समय भारी दबाव और घबराहट पर नियंत्रण पाना उनके लिए बेहद चुनौतीपूर्ण था।


















