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झारखंड का यह अनूठा टाउन दिखता है मिनी लंदन, सदियों पुराना इतिहास और विरासत समेटे है यह खूबसूरत जगहयात्रा
24 अग॰ 2026, 6:49 am (65 दिन पहले)· 3

झारखंड का यह अनूठा टाउन दिखता है मिनी लंदन, सदियों पुराना इतिहास और विरासत समेटे है यह खूबसूरत जगह

रांची से करीब 65 किलोमीटर दूर स्थित मैक्लुस्कीगंज एक ऐसा ऐतिहासिक शहर है जहां आज भी अंग्रेजों के जमाने के बंगले, चर्च और स्कूल अपनी पुरानी शान के साथ मौजूद हैं। यह जगह अपनी अनोखी वास्तुकला और शांत माहौल के लिए जानी जाती है।

झारखंड की राजधानी रांची से महज 65 किलोमीटर की दूरी पर बसा मैक्लुस्कीगंज एक ऐसा अनोखा गंतव्य है, जहां समय जैसे थम सा गया है। इस पूरे इलाके की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि अंग्रेजों के दौर में तैयार किए गए रिहायशी बंगले, वॉच टावर, प्रार्थना स्थल, बगीचे और शिक्षण संस्थान आज भी अपनी मूल अवस्था में सुरक्षित हैं। इसकी प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक बनावट हर आने वाले को अपनी ओर आकर्षित करती है।

हेरिटेज लुक और पुरानी जीवनशैली का अनूठा संगम

यहां के स्थानीय लोग और बाहर से आने वाले पर्यटक पुराने मकानों को संरक्षित करना और उन्हें हेरिटेज अंदाज में बनाए रखना पसंद करते हैं। घरों की मूल बनावट में किसी तरह का बड़ा बदलाव नहीं किया गया है। यदि कोई एक सदी पुरानी जीवनशैली का अनुभव करना चाहता है, तो उसे इस जगह की यात्रा अवश्य करनी चाहिए। इस पूरे कस्बे में आधुनिक कंक्रीट की ऊंची इमारतें देखने को नहीं मिलती हैं।

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ऐतिहासिक स्कूल और मजबूत ब्रिटिश वास्तुकला

इस क्षेत्र में स्थित प्रतिष्ठित डॉन बॉस्को स्कूल भी अंग्रेजों के शासनकाल में ही बनवाया गया था। इस शिक्षण संस्थान की वास्तुकला पूरी तरह से अंग्रेजी शैली की झलक देती है। लाल रंग की ढालनुमा छत और बंगले जैसी डिजाइन वाली इसकी दीवारें इतनी चौड़ी और मजबूत हैं कि अब तक इन्हें जीर्णोद्धार की आवश्यकता ही महसूस नहीं हुई है। यह संस्थान इलाके के बेहतरीन स्कूलों में शुमार है और इसके चारों ओर घना जंगल फैला हुआ है, जिसके कारण यहां पढ़ना कई बच्चों के लिए एक खास अनुभव होता है।

आधुनिकता की दौड़ से दूर शांत माहौल

मैक्लुस्कीगंज में आज भी आपको शहरीकरण की अंधी दौड़ देखने को नहीं मिलेगी। यहां की तंग गलियां, पुरानी सड़कें, चारों तरफ फैला सघन वन और उनके बीच ब्रिटिश शैली में खड़े बंगले एक अलग ही आभास कराते हैं। सरकारी सेवा से सेवानिवृत्त हुए अधिकारी और कर्मचारी यहां शांति से रहना पसंद करते हैं। कई लोगों ने अपनी रिटायरमेंट के बाद इसी शांत आंचल में अपना स्थायी ठिकाना बना लिया है।

नदी, धार्मिक एकता और लंदन जैसी सड़कें

इस खूबसूरत कस्बे के पास ही देगा देगी नदी बहती है, जो इसकी सुंदरता में चार चांद लगाती है। यहां की एक और खास बात यह है कि मंदिर, मस्जिद और चर्च तीनों एक ही परिसर के भीतर देखने को मिलते हैं। शहर के शोरगुल से कोसों दूर यहां पूरी तरह शांति रहती है। यहां की सड़कें बिल्कुल साफ-सुथरी हैं और हवा में एक अलग ही ताजगी महसूस होती है, जिसे लोग अक्सर लंदन की सड़कों और माहौल से जोड़कर देखते हैं। यही वजह है कि दूर-दराज से पर्यटक यहां सुकून की तलाश में आते हैं।

छिपे हुए घर और स्थानीय कृषि

पहली बार आने वाले पर्यटकों को ऐसा लग सकता है कि यह सिर्फ एक घना जंगल है और यहां कोई बसावट नहीं है। लेकिन जब आप थोड़ा अंदर की तरफ कदम बढ़ाते हैं, तो पता चलता है कि घने पेड़ों के बीच करीने से घर बने हुए हैं और लोग वहां जीवन बिता रहे हैं। इस इलाके में मधुमक्खी पालन या शहद का उत्पादन काफी बड़े पैमाने पर होता है। इसके अलावा स्थानीय ग्रामीण नाशपाती, गेहूं और विभिन्न प्रकार की सब्जियों की खेती भी करते हैं।

सवाल-जवाब

मैक्लुस्कीगंज कहां स्थित है और रांची से इसकी दूरी कितनी है?
मैक्लुस्कीगंज झारखंड के रांची से करीब 65 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है।
मैक्लुस्कीगंज की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?
यह पूरा शहर अंग्रेजों के जमाने के बंगलों, चर्च, वॉच टावर और बिना किसी आधुनिक बदलाव वाली पुरानी जीवनशैली के लिए जाना जाता है।
यहां कौन सा प्रसिद्ध स्कूल स्थित है?
यहां अंग्रेजों के समय का बना डॉन बॉस्को स्कूल स्थित है जो अपनी मजबूत वास्तुकला और घने जंगलों के बीच स्थिति के लिए जाना जाता है।
मैक्लुस्कीगंज में कौन सी नदियां और धार्मिक स्थल पास में हैं?
यहां पास में देगा देगी नदी बहती है और एक ही परिसर में मंदिर, मस्जिद और चर्च तीनों देखने को मिलते हैं।
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