मानसून के मौसम में पहाड़ों की खूबसूरती में चार चांद लग जाते हैं। बारिश की बूंदों से जब देवदार के पेड़ भीगकर चमकने लगते हैं और पहाड़ियों की चोटियों पर हरियाली की चादर बिछ जाती है, तब वादियां किसी मनमोहक तस्वीर जैसी नजर आने लगती हैं। बादलों के रास्तों के बीच उतर आने से सफर का अनुभव ताउम्र याद रहने वाला बन जाता है। यदि आप अगस्त के महीने में किसी शांत और सुकून भरी पहाड़ी जगह की तलाश में हैं, तो उत्तराखंड का चकराता आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प साबित हो सकता है। इस क्षेत्र की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यहां मसूरी और नैनीताल जैसे लोकप्रिय हिल स्टेशनों की तरह पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को नहीं मिलती है, जिससे आपको प्रकृति के बेहद करीब शांत माहौल में समय बिताने का भरपूर अवसर मिल जाता है।
चकराता पहुंचने के बाद घूमने वाली जगहों की सूची में टाइगर फॉल्स को सबसे ऊपर रखना चाहिए। घने और सघन जंगलों के बीच छिपा हुआ यह शानदार झरना बारिश के दिनों में पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन जाता है। मानसूनी बौछारों के कारण आसपास का पूरा परिवेश और अधिक हरा-भरा व जीवंत हो जाता है, जबकि ऊंचे से गिरते हुए झरने का पानी पूरे वातावरण में ताजगी भर देता है। इस वाटरफॉल तक पहुंचने के रास्ते में भी पर्यटकों को कुदरती नजारों और शांत जंगलों की खूबसूरती का लुत्फ उठाने का मौका मिलता है, जो इस सफर को और भी ज्यादा रोमांचक बना देता है।
प्रकृति प्रेमियों और शांति की तलाश करने वालों के लिए कनासर किसी जन्नत से कम नहीं है। यह खूबसूरत इलाका अपने विशाल और घने देवदार के जंगलों के लिए पूरे क्षेत्र में प्रसिद्ध है। इन प्राचीन और ऊंचे पेड़ों के बीच सैर करते हुए सैलानियों को शहर की व्यस्त जिंदगी और शोरगुल से कोसों दूर होने का अहसास होता है। अगस्त के महीने में बारिश थमने के बाद यहां का तापमान काफी सुहाना रहता है और चारों तरफ हरियाली फैली रहती है। सुकून भरे पल बिताने, नेचर वॉक करने और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए यह जगह एकदम मुफीद है।
देवबन से निहारें हिमालयन चोटियों का विहंगम दृश्य
चकराता की अपनी इस यात्रा में देवबन को भी जरूर शामिल किया जाना चाहिए। काफी ऊंचाई पर स्थित यह क्षेत्र अपने देवदार के जंगलों और हिमालय के मनमोहक पहाड़ी दृश्यों के लिए जाना जाता है। यदि आसमान साफ रहे, तो यहां से दूर-दूर तक फैली पर्वत श्रृंखलाएं स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। मानसून के मौसम में बादलों की लुकाछिपी और लगातार आवाजाही के कारण यहां का नजारा बिल्कुल अलौकिक रूप ले लेता है। हालांकि, यात्रा पर निकलने से पहले बारिश के दौरान रास्तों की मौजूदा स्थिति और मौसम के मिजाज की जानकारी अवश्य जुटा लेनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
यदि आपको किसी एकांत और शांत स्थान पर बैठकर चाय की चुस्की लेते हुए पहाड़ों के विहंगम दृश्यों को देखना पसंद है, तो चिलमिरी नेक की यात्रा जरूर करें। यह चकराता की सबसे ऊंची जगहों में गिनी जाती है और यहां से आसपास की घाटियों तथा पहाड़ी श्रृंखलाओं का अद्भुत पैनोरमिक व्यू दिखाई देता है। अगर मौसम मेहरबान हो और आसमान साफ रहे, तो यहां से उगते हुए सूरज यानी सूर्योदय और ढलते हुए सूरज यानी सूर्यास्त का नजारा बेहद दिलकश और यादगार बन जाता है।
अगस्त में यात्रा के दौरान इन जरूरी बातों का रखें ख्याल
चकराता में अगस्त के दौरान मौसम भले ही बहुत सुहावना और आकर्षक रहता हो, लेकिन मानसून सीजन होने के कारण पहाड़ी रास्तों पर फिसलन और भूस्खलन जैसी समस्याओं का जोखिम भी बना रहता है। इसलिए घर से निकलने से पहले मौसम विभाग के पूर्वानुमान और सड़कों की स्थिति की पूरी जांच-पड़ताल कर लें। अपने साथ पर्याप्त मात्रा में रेनकोट, छाता, जरूरी फर्स्ट-एड्स और अच्छी ग्रिप वाले मजबूत ट्रैकिंग शूज जरूर रखें। यदि बारिश बहुत ज्यादा हो रही हो, तो किसी भी नदी, झरने या जोखिम भरे ट्रैक के बिल्कुल नजदीक जाने से बचना चाहिए ताकि किसी भी अनहोनी से सुरक्षित रहा जा सके।



















