हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय के जजेज लाउंज में एक बेहद खास और भावनात्मक पल देखने को मिला, जब देश के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने स्कूली विद्यार्थियों के साथ रक्षाबंधन का पर्व मनाया। इस दौरान बिहार के सीवान से जुड़ी 11वीं कक्षा की एक छात्रा ने सीजेआई को अपने हाथों से तैयार की गई राखी बांधी। इस अनोखे और स्नेहपूर्ण वाकये के बाद से हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर यह छात्रा कौन है और उसकी यह खास मुलाकात कैसे संभव हुई।
कौन हैं रागिनी ओझा और क्या है उनका बिहार कनेक्शन
इस विशेष कार्यक्रम में शामिल होने वाली छात्रा का नाम रागिनी ओझा है, जो वर्तमान में दिल्ली के राजकीय सर्वोदय कन्या विद्यालय, पश्चिम विनोद नगर में कक्षा 11 विज्ञान की पढ़ाई कर रही हैं। रागिनी का मूल रूप से बिहार के सीवान जिले के जीरादेई गांव से गहरा पैतृक संबंध है। यह पहला मौका था जब रागिनी को सर्वोच्च न्यायालय परिसर के भीतर जाने और देश के मुख्य न्यायाधीश से सीधे रूबरू होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
कैसे हुई मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की शुरुआत
इस मुलाकात के पीछे रागिनी की एक सरल और भावुक इच्छा जुड़ी थी। रक्षाबंधन के पावन अवसर पर उन्होंने खुद अपने हाथों से एक सुंदर राखी तैयार की थी और मुख्य न्यायाधीश को इसे अपनी कलाई पर बांधने की विनम्र इच्छा जताते हुए संपर्क किया था। एक स्कूली छात्रा की इस स्नेहिल और मासूम अभिव्यक्ति से प्रभावित होकर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने सर्वोच्च न्यायालय परिसर स्थित जजेज लाउंज में विशेष रूप से रक्षाबंधन समारोह आयोजित करने का निर्देश दिया था, जिसमें दिल्ली के 20 स्कूली विद्यार्थियों का एक समूह शामिल हुआ।
मुख्य न्यायाधीश का सादगी भरा व्यक्तित्व और आत्मीय संवाद
सर्वोच्च न्यायालय के भीतर मुख्य न्यायाधीश के साथ बिताए पलों ने रागिनी के मन पर गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने बताया कि न्यायमूर्ति सूर्यकांत का बेहद सरल, सहज और जमीन से जुड़ा हुआ व्यक्तित्व उन्हें अत्यधिक प्रेरणादायी लगा। विद्यार्थियों के साथ उनका आत्मीय व्यवहार और बिना किसी प्रकार की औपचारिकता के खुलकर संवाद करने की शैली ने रागिनी को अंदर तक प्रभावित किया। उन्होंने यह भी साझा किया कि इस छोटी सी मुलाकात के दौरान उन्हें कई अमूल्य जीवन-मूल्य और सीख मिली हैं, जिन्हें वह अपने भविष्य के सफर में जरूर अपनाएंगी। इसके अलावा, रागिनी ने मुख्य न्यायाधीश का आटोग्राफ यानी हस्ताक्षर भी हासिल किया, जिसे वह अपनी जिंदगी भर की एक अमूल्य और अनमोल स्मृति-चिह्न के रूप में संभाल कर रखना चाहती हैं।
एक सपने जैसा अहसास और मेहमाननवाजी
रागिनी के लिए सर्वोच्च न्यायालय के अंदर कदम रखने का वह क्षण किसी सुनहरे सपने से कम नहीं था। जब सुरक्षा द्वारों को पार करते हुए एस्कॉर्ट वाहन उन्हें सर्वोच्च न्यायालय परिसर के भीतर लेकर पहुंचा, तो उन्हें पहली बार ऐसा अद्भुत सम्मान और गरिमा महसूस हुई जिसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि उस वक्त उन्हें ऐसा लगा मानो वह सचमुच कोई सपना देख रही हों। सर्वोच्च न्यायालय के एक प्रोटोकॉल अधिकारी ने बेहद आदरपूर्वक उनका स्वागत किया और उन्हें सही सलामत समारोह स्थल तक पहुंचाया। पूरे आयोजन के दौरान मिले उसार और स्नेह ने उनके दिलो-दिमाग पर एक कभी न मिटने वाली छाप छोड़ी है। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों के लिए गरिमापूर्ण अल्पाहार और जलपान की भी बेहतरीन व्यवस्था की गई थी।
यादों का अनमोल पिटारा लेकर लौटीं छात्रा
मुख्य न्यायाधीश को राखी बांधकर वापस लौटते वक्त रागिनी के पास यादों का एक ऐसा अनमोल पिटारा था, जो उनके जीवन भर काम आएगा। वह सिर्फ एक राखी बांधने नहीं गई थीं, बल्कि अपने साथ ढेर सारी मीठी यादें, जीवनोपयोगी शिक्षाएं और कभी न भूलने वाले अनुभव लेकर लौटीं। रागिनी का कहना है कि इस अविस्मरणीय और अद्भुत अनुभव के लिए वह मुख्य न्यायाधीश के प्रति जितना भी आभार जताएं, वह कम है। उनके लिए यह रक्षाबंधन केवल एक त्योहार भर नहीं, बल्कि ताउम्र दिल के करीब रहने वाली एक अनमोल सौगात है।



















