यदि आप दिल्ली-एनसीआर की चिलचिलाती गर्मी और महानगर की भागदौड़ से ऊब चुके हैं और इस मानसून किसी सुकून भरी पहाड़ी जगह की तलाश में हैं, तो उत्तराखंड का कनाताल आपके लिए एक आदर्श ठिकाना साबित हो सकता है। टिहरी गढ़वाल की गोद में बसा यह छोटा और बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन अपने सघन जंगलों, हरी-भरी वादियों और सुहावने ठंडे मौसम के लिए खासा मशहूर है। बरसात के इस मौसम में यहां की प्राकृतिक सुंदरता कई गुना बढ़ जाती है और हर तरफ एक अलग ही रौनक देखने को मिलती है।
मानसून में कनाताल का मनमोहक रूप
बारिश के दिनों में कनाताल की पहाड़ियां पूरी तरह से जीवंत हो उठती हैं और चारों तरफ फैली हरियाली आंखों को सुकून देती है। आसमान में मंडराते बादल, देवदार और चीड़ के लंबे पेड़ों से घिरे घुमावदार रास्ते तथा पहाड़ों के बीच से गुजरते पानी के छोटे स्रोत आपके सफर को वाकई यादगार बना देते हैं। यदि आपको हिल स्टेशनों पर अत्यधिक भीड़भाड़ के बजाय एकांत और शांति पसंद है, तो कनाताल आपके लिए एक बेहतरीन डेस्टिनेशन है। हालांकि, बरसात के मौसम में पहाड़ी इलाकों का सफर करते वक्त अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी होता है। मूसलाधार बारिश के चलते कई बार रास्तों पर यातायात प्रभावित हो जाता है, इसलिए घर से निकलने से पहले मौसम के मिजाज और स्थानीय सड़क मार्गों की पूरी जानकारी जरूर हासिल कर लें।
आसपास घूमने की खास जगहें
कनाताल में प्रकृति के आंचल में वक्त बिताने के अलावा आप कई बेहतरीन पर्यटक स्थलों की सैर भी कर सकते हैं। यहां आने वाले सैलानियों के लिए सुरकंडा देवी मंदिर जाना सबसे लोकप्रिय गतिविधियों में शुमार है। यह प्रसिद्ध मंदिर कद्दूखाल क्षेत्र के पास स्थित है और यहां से चारों तरफ फैले विशाल पहाड़ों का विहंगम दृश्य बेहद मनमोहक प्रतीत होता है। इसके अलावा, यहां के शांत जंगलों में पैदल सैर करना, ट्रेकिंग का रोमांच उठाना और कैंपिंग का मजा लेना पर्यटकों को खूब लुभाता है। बारिश थमने के बाद भीगे हुए जंगल और पहाड़ियां फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एकदम परफेक्ट बैकग्राउंड तैयार करती हैं।
साहसिक गतिविधियों के शौकीनों के लिए रोमांच
यह शांत पहाड़ी स्थान केवल मानसिक शांति चाहने वालों के लिए ही नहीं, बल्कि एडवेंचर के दीवानों के लिए भी एक शानदार जगह है। जब मौसम साफ और अनुकूल रहता है, तो पर्यटक यहां ट्रेकिंग, कैंपिंग और नेचर वॉक जैसी रोमांचक गतिविधियों का लुत्फ उठा सकते हैं। हालांकि, मानसून सीजन के दौरान किसी भी तरह के साहसिक कार्य में हाथ डालने से पहले स्थानीय मौसम और सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की जानकारी अवश्य ले लेनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार की असुविधा से बचा जा सके।
सड़क और रेल मार्ग से ऐसे पहुंचें
भौगोलिक स्थिति की बात करें तो कनाताल देश की राजधानी दिल्ली से लगभग 300 से 320 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। सड़क मार्ग के जरिए अपनी गाड़ी या बस से यहां तक का सफर तय करने में ट्रैफिक और मौसम की स्थिति को देखते हुए करीब 8 से 10 घंटे का समय लग जाता है। इसके अलावा आप दिल्ली से ट्रेन या बस के माध्यम से पहले देहरादून या ऋषिकेश पहुंच सकते हैं, और वहां से आसानी से टैक्सी या अन्य लोकल वाहनों के जरिए कनाताल की खूबसूरत पहाड़ियों तक पहुंच सकते हैं।
यात्रा से जुड़ी जरूरी बातें
कनाताल की सैर करना साल के अलग-अलग महीनों में पर्यटकों को बिल्कुल अलग और नया अनुभव कराता है। बरसात के दिनों में यहां बादलों और हरियाली का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, लेकिन तेज बारिश के दौरान सफर करना थोड़ा चुनौतीपूर्ण भी साबित हो सकता है। इसलिए यदि आप इस मानसून सीजन में वहां जाने का पक्का मन बना चुके हैं, तो जाने से पहले मौसम का पूर्वानुमान और स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस जरूर जांच लें।



















