ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों की यात्रा केवल गंगा नदी के किनारे टहलने, प्राचीन मंदिरों में मत् टेकने और खूबसूरत पहाड़ों के नजारों को निहारने तक ही सीमित नहीं रहती है। जब पर्यटक इस पावन नगरी से अपने घर लौटते हैं, तो वे यहां की कई अनूठी और विशेष चीजें अपने साथ ले जाना नहीं भूलते हैं। यही एक प्रमुख कारण है कि ऋषिकेश के स्थानीय बाजारों में पूरे बारह महीने खरीदारों की चहल-पहल बनी रहती है। विशेष तौर पर वे वस्तुएं जो इस शहर की गहरी आध्यात्मिक पहचान और समृद्ध पहाड़ी संस्कृति का प्रतीक होती हैं, सैलानियों को अपनी ओर सबसे ज्यादा खींचती हैं।
रुद्राक्ष और धार्मिक सामानों की जबरदस्त मांग
दुकानदार शिव अग्रवाल ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ऋषिकेश के बाजारों में रुद्राक्ष की माला उन वस्तुओं में सबसे ऊपर शुमार है जिन्हें पर्यटक सबसे ज्यादा खरीदना पसंद करते हैं। धर्मस्थलों और प्रसिद्ध मंदिरों के दर्शन करने आने वाले लोग इसे अपनी पूजा-पाठ और गहरी आध्यात्मिक आस्था का अहम हिस्सा मानकर खरीदते हैं। इसके अलावा विभिन्न प्रकार की पूजा सामग्री, देवी-देवताओं की छोटी और बड़ी मूर्तियां, पवित्र तस्वीरें तथा तमाम आध्यात्मिक सामान भी सैलानी बड़े चाव से अपने साथ ले जाते हैं। इनमें से कई लोग इन पवित्र वस्तुओं को अपने घर के मंदिर में स्थापित करने के लिए लेते हैं, तो कुछ अपने इष्ट-मित्रों और परिवारजनों के लिए उपहार के रूप में खरीदते हैं।
योग से जुड़ी वस्तुओं का विशेष आकर्षण
दुनियाभर में योग और ध्यान की राजधानी के रूप में अपनी खास पहचान रखने वाले ऋषिकेश में योग से जुड़े सामानों की भी बाजार में हमेशा अच्छी खासी मांग बनी रहती है। योग मैट, ध्यान साधना में काम आने वाले उपकरण, छोटे आध्यात्मिक उत्पाद और कई पारंपरिक वस्तुएं सैलानियों को खूब भाती हैं। यह क्रेज सिर्फ देश के अन्य हिस्सों से आने वाले लोगों तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी पर्यटकों के बीच भी इस तरह की खरीदारी का भारी उत्साह देखा जाता है। तमाम विदेशी सैलानी इस शहर में बिताए गए अपने अनमोल पलों की एक खूबसूरत याद के रूप में यहां से छोटी-छोटी सौगातें खरीदकर अपने वतन वापस ले जाते हैं।
पहाड़ी स्वाद और स्थानीय उत्पादों का जलवा
यहां आने वाले लोगों की शॉपिंग का दायरा केवल धार्मिक और आध्यात्मिक वस्तुओं तक ही बंधा नहीं रहता है। पहाड़ों से जुड़े तमाम स्थानीय उत्पाद भी यहां के बाजारों में बड़े पैमाने पर बिकते हैं। शुद्ध पहाड़ी मसाले, प्राकृतिक शहद, खास किस्म की चाय और अन्य स्थानीय खाद्य उत्पाद पर्यटकों को बहुत आकर्षित करते हैं। इन चीजों की सबसे बड़ी खूबी यह होती है कि लोग इन्हें अपने खुद के दैनिक उपयोग के लिए भी खरीदते हैं और अपने परिजनों के लिए गिफ्ट के रूप में भी साथ ले जाते हैं। स्थानीय बाजारों में मिलने वाले शहद और पहाड़ी मसालों के प्रति खरीदारों की जिज्ञासा हमेशा देखने लायक होती है। पर्यटक दुकानदारों के पास रुककर इन उत्पादों की गुणवत्ता के बारे में विस्तार से पूछताछ करते हैं और फिर अपनी पसंद के अनुसार खरीदारी का फैसला लेते हैं। कई लोग ऐसी विशिष्ट चीजें तलाशते हैं जो उन्हें आम तौर पर अपने गृह नगरों के बाजारों में आसानी से नहीं मिल पाती हैं।
हस्तशिल्प और पारंपरिक कला का जादू
ऋषिकेश के स्थानीय बाजारों में हस्तशिल्प कला से जुड़ी हुई अनगिनत वस्तुएं भी देखने को मिल जाती हैं। हाथ से तराशी और बनाई गई सजावटी सामग्रियां, पारंपरिक कलाकृतियां और पहाड़ी संस्कृति की अनूठी झलक पेश करने वाली चीजें पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। खासकर वे लोग जो अपनी इस यात्रा की सुनहरी यादों को केवल मोबाइल की तस्वीरों या वीडियो में समेटने के बजाय किसी ठोस वस्तु के रूप में अपने पास संजोकर रखना चाहते हैं, वे इस तरह की कलात्मक खरीदारी जरूर करते हैं। स्थानीय पहनावे के कपड़े और पहाड़ी डिजाइनों से सजी चीजें भी पर्यटकों की पसंद की सूची में प्रमुखता से शामिल होती हैं। बाजारों की संकरी गलियों में घूमते हुए सैलानी पहले इत्मीनान से दुकानों का जायजा लेते हैं, अलग-अलग सामानों के मोलभाव और कीमतों के बारे में पूछते हैं और फिर अपनी पसंद की मुहर लगाते हैं। यही छोटी-छोटी खरीदारी यहां के स्थानीय बाजारों की रौनक में चार चांद लगाने का काम करती है।



















