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बहराइच में कतर्नियाघाट सफारी की तैयारी? जानिए जंगल में घुसने से पहले कहां मिलेगा पारंपरिक भट्टी का नाश्तायात्रा
27 अग॰ 2026, 9:12 am (62 दिन पहले)· 3

बहराइच में कतर्नियाघाट सफारी की तैयारी? जानिए जंगल में घुसने से पहले कहां मिलेगा पारंपरिक भट्टी का नाश्ता

उत्तर प्रदेश के बहराइच स्थित कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी में मानसून के बाद नवंबर से पर्यटन सत्र शुरू होने जा रहा है। सेंचुरी के मुख्य क्षेत्र से 34 किलोमीटर पहले ककराहा रेलवे स्टेशन के पास एक ऐतिहासिक पुश्तैनी जलपान गृह है, जहां का पारंपरिक भट्टी वाला समोसा बेहद लोकप्रिय है।

उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में स्थित कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी प्राकृतिक सौंदर्य और दुर्लभ वन्यजीवों का अद्भुत केंद्र है। मानसून का सीजन समाप्त होने के बाद हर साल नवंबर महीने में इस अभ्यारण्य के कपाट सैलानियों के लिए दोबारा खोल दिए जाते हैं। यदि आप भी इस खूबसूरत जंगल की सफारी पर निकलने की योजना बना रहे हैं, तो रास्ते के महत्वपूर्ण पड़ावों और खान-पान की सुविधाओं की जानकारी रखना अत्यंत आवश्यक है। घने जंगल के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश करने से पहले एक ऐसा स्थान है, जहां रुककर जलपान करना हर यात्री के लिए जरूरी साबित होता है।

ककराहा रेलवे स्टेशन के पास का एकमात्र जलपान गृह

कतर्नियाघाट सेंचुरी के मुख्य कोर क्षेत्र में दाखिले से ठीक 34 किलोमीटर पहले ककराहा रेलवे स्टेशन पड़ता है। इसी रेलवे स्टेशन के समीप मुख्य मार्ग के किनारे एक देसी जलपान गृह स्थित है। इस पूरे रास्ते पर ककराहा के पास बना यह इकलौता ढाबा या दुकान है, जहां भोजन और नाश्ते की व्यवस्था मिलती है। जो यात्री अपने घर से खाने-पीने की सामग्री या पानी लाना भूल जाते हैं, वे यहां से अपनी जरूरत का सामान आसानी से खरीद सकते हैं।

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इस पड़ाव पर मिनरल वाटर, गरमा-गरम ताजी चाय, स्थानीय मिठाइयां, पकौड़ियां और समोसे प्रचुर मात्रा में उपलब्ध रहते हैं। यदि यात्री ककराहा के इस केंद्र पर जलपान करना भूल जाते हैं, तो आगे घने जंगल के रास्ते में किसी भी तरह के भोजन या पानी की सुविधा नहीं मिलेगी। इसलिए सेंचुरी की ओर बढ़ने वाले सैलानी यहां रुककर अपनी जरूरत का सामान साथ रख लेते हैं।

पूर्वजों के जमाने से चल रही पुश्तैनी दुकान और भट्टी का स्वाद

इस साधारण से दिखने वाले जलपान गृह की सबसे बड़ी विशेषता इसका ऐतिहासिक और पारिवारिक जुड़ाव है। ककराहा रेंज का ही एक स्थानीय परिवार अपने पूर्वजों के समय से पीढ़ी-दर-पीढ़ी इस दुकान को चलाता आ रहा है। कई दशकों से यह दुकान इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों की सेवा में लगी हुई है और आज भी अपनी पुरानी परंपराओं को संजोए हुए है।

यहां नाश्ता तैयार करने की प्रक्रिया बेहद अनोखी है। दुकान में खाद्य सामग्री पकाने के लिए आधुनिक एलपीजी गैस सिलेंडर का प्रयोग बिल्कुल नहीं किया जाता। इसके बजाय, पारंपरिक मिट्टी की भट्टी पर लकड़ी और कोयले की आंच में मिठाइयां और समोसे तैयार किए जाते हैं। भट्टी पर धीमी आंच में तले गए इन समोसों का स्वाद इतना बेजोड़ और सुस्वादु होता है कि इस मार्ग से गुजरने वाला लगभग हर पर्यटक और स्थानीय यात्री यहां रुककर स्वाद जरूर चखता है।

गेरुआ और कौड़ियाला नदियां तथा समृद्ध वन्यजीव

कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी कुदरत का एक अनमोल खजाना है, जहां हरे-भरे घने जंगलों के बीच कई दुर्लभ वन्यजीव स्वच्छंद रूप से विचरण करते हैं। इस अभ्यारण्य के बीच से होकर गेरुआ और कौड़ियाला नदियां बहती हैं, जो इसके प्राकृतिक सौंदर्य में चार चांद लगा देती हैं। ये नदियां न केवल विहंगम दृश्य प्रस्तुत करती हैं, बल्कि दुर्लभ प्रजाति के कछुओं, मगरमच्छों और घड़ियालों का स्वाभाविक प्राकृतिक आवास भी हैं।

हर साल देश और दुनिया के विभिन्न हिस्सों से हजारों की संख्या में प्रकृति प्रेमी और सैलानी कतर्नियाघाट की सैर करने पहुंचते हैं। नवंबर में सेंचुरी खुलने के बाद पर्यटक यहां की प्राकृतिक सुंदरता, नदियों के शांत वातावरण और वन्यजीवों की अठखेलियों को अपने कैमरों में कैद करते हैं। सफर की शुरुआत में ककराहा के इस पारंपरिक जलपान गृह का स्वाद यात्रियों की इस यादगार यात्रा को और भी सुहावना बना देता है।

सवाल-जवाब

कतर्नियाघाट वाइल्डलाइफ सेंचुरी मानसून के बाद कब खुलती है?
यह सेंचुरी हर साल मानसून का मौसम बीतने के बाद नवंबर महीने में पर्यटकों के लिए दोबारा खोली जाती है।
ककराहा रेलवे स्टेशन के पास स्थित जलपान गृह कतर्नियाघाट से कितनी दूरी पर है?
यह ऐतिहासिक जलपान गृह कतर्नियाघाट सेंचुरी के मुख्य क्षेत्र में प्रवेश करने से लगभग 34 किलोमीटर पहले स्थित है।
ककराहा के इस देसी होटल के समोसों की क्या खासियत है?
यहाँ नाश्ता पकाने के लिए एलपीजी गैस सिलेंडर की जगह पारंपरिक मिट्टी की भट्टी का उपयोग किया जाता है, जिससे समोसों का स्वाद अनोखा और बेहद लाजवाब होता है।
कतर्नियाघाट सेंचुरी में कौन सी नदियां बहती हैं और वहां कौन से जीव पाए जाते हैं?
सेंचरी से होकर गेरुआ और कौड़ियाला नदियां बहती हैं, जो दुर्लभ प्रजाति के कछुओं, मगरमच्छों और घड़ियालों का प्राकृतिक आवास हैं।
क्या कतर्नियाघाट के मुख्य जंगल के अंदर खाने-पीने का सामान मिलता है?
नहीं, मुख्य जंगल क्षेत्र के भीतर खाने-पीने की कोई दुकान या सुविधा नहीं है, इसलिए ककराहा के पास ही जलपान और जरूरी सामान लेना आवश्यक है।
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