ऋषिकेश को भारत की रोमांचक गतिविधियों की राजधानी यानी एडवेंचर कैपिटल माना जाता है। हर साल देश और दुनिया से लाखों की संख्या में सैलानी यहाँ बंजी जंपिंग, रिवर राफ्टिंग, कयाकिंग, क्लिफ जंपिंग और पहाड़ों में ट्रेकिंग जैसी रोमांचक खेलों का लुत्फ उठाने आते हैं। गंगा नदी की तेज लहरों के साथ मुकाबला करना हो या फिर पहाड़ों की ऊंचाइयों से छलांग लगानी हो, ये एडवेंचर स्पोर्ट्स युवाओं और परिवारों को अपनी ओर खूब आकर्षित करते हैं। हालांकि, जैसे ही मानसून का आगमन होता है, इन सभी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक लगा दी जाती है। कई लोग अक्सर यह सोचते हैं कि आखिर बारिश के मौसम में इन खेलों को क्यों बंद कर दिया जाता है। इसका सबसे सीधा और मुख्य कारण पर्यटकों की सुरक्षा से जुड़ा है।
उफनती नदियों और तेज बहाव का संकट
TrendKia से बातचीत के दौरान स्प्लैश बंजी के मैनेजर आशीष ने बताया कि वर्षा ऋतु में पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाली मूसलाधार बारिश का सीधा प्रभाव गंगा और उसकी सहायक नदियों पर पड़ता है। बारिश शुरू होते ही नदियों का जलस्तर बेहद तेजी से ऊपर चढ़ने लगता है और पानी का बहाव आम दिनों के मुकाबले कई गुना ज्यादा तीव्र हो जाता है। ऐसी परिस्थितियों में गंगा की लहरों के बीच रिवर राफ्टिंग करना बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। पानी के तेज बहाव और अचानक पैदा होने वाली धाराओं के कारण किसी भी समय कोई बड़ा हादसा हो सकता है। इसी खतरे को भांपते हुए प्रशासन और साहसिक गतिविधियों का संचालन करने वाली एजेंसियां आपसी सहमति से राफ्टिंग को कुछ समय के लिए स्थगित कर देती हैं।
केवल राफ्टिंग ही नहीं, बल्कि कयाकिंग जैसे खेलों पर भी मानसून का गंभीर असर देखने को मिलता है। भारी बारिश के दौरान नदी का मिजाज पल-पल बदलता है, जिससे पानी की गहराई और उसकी रफ्तार का सटीक अंदाजा लगाना नामुमकिन हो जाता है। ऐसी स्थिति में अनुभवी और प्रशिक्षित खिलाड़ियों के लिए भी खुद को संभालना मुश्किल हो जाता है, तो नए पर्यटकों के लिए यह जानलेवा साबित हो सकता है।
हवाई और मैदानी रोमांच पर भी क्यों लगती है रोक
बंजी जंपिंग को वैसे तो तकनीकी रूप से पूरी तरह सुरक्षित माना जाता है, लेकिन खराब मौसम की मार इस खेल पर भी पड़ती है। मानसून के समय चलने वाली तेज हवाएं, लगातार होने वाली बारिश और प्लेटफॉर्म पर होने वाली फिसलन सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों को प्रभावित कर सकती हैं। इन जोखिमों से बचने के लिए संचालक खराब मौसम के दौरान कुछ वक्त के लिए बंजी जंपिंग को रोक देते हैं। इसके पीछे एकमात्र उद्देश्य पर्यटकों को सुरक्षित रखना होता है।
पहाड़ों में ट्रेकिंग करने के शौकीनों के लिए भी मानसून का समय अनुकूल नहीं होता। ऋषिकेश और उसके आसपास के पहाड़ी इलाकों में बने ट्रेकिंग रास्ते लगातार बारिश की वजह से काफी फिसलन भरे हो जाते हैं। बारिश के दिनों में पहाड़ों पर भूस्खलन का खतरा अत्यधिक बढ़ जाता है और चट्टानें खिसकने या पत्थर गिरने की घटनाएं भी आम हो जाती हैं। इसके अलावा, मौसम में अचानक आने वाले बदलावों के कारण कोहरा छा जाता है और दृश्यता कम हो जाती है, जिससे रास्ते भटकने और गंभीर चोट लगने की आशंका बढ़ जाती है। यही कारण है कि इस दौरान कई प्रमुख ट्रेकिंग रूट्स को या तो पूरी तरह बंद कर दिया जाता है या वहां पर्यटकों की आवाजाही सीमित कर दी जाती है।
रोमांच का असली आनंद तभी लिया जा सकता है जब वह पूरी तरह सुरक्षित हो। मानसून के दौरान प्रकृति की हरियाली और सुंदरता निश्चित तौर पर बढ़ जाती है, लेकिन इसके साथ ही कई अप्रत्याशित चुनौतियां भी सामने आती हैं। स्थानीय प्रशासन और एडवेंचर ऑपरेटर पर्यटकों की जान की सुरक्षा को सर्वोपरि मानते हैं, इसलिए सुरक्षा के कड़े मानकों के तहत इन गतिविधियों पर कुछ महीनों के लिए विराम लगा दिया जाता है।













