राजस्थान के भरतपुर जिले में बसा केवलादेव नेशनल पार्क मानसून की दस्तक के साथ ही पूरी तरह बदल जाता है. यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह वेटलैंड बारिश के मौसम में हरियाली और जैव विविधता से भर उठता है, और देखने वालों को लगता है जैसे प्रकृति ने खुद इस जगह को नए सिरे से संवार दिया हो. वाइल्डलाइफ को करीब से देखने के शौकीनों के लिए यह मौसम पार्क को किसी जन्नत जैसा बना देता है.
इस दौरान पार्क में 21 फीट तक लंबे अजगर जैसे दुर्लभ जीव देखने को मिलते हैं, वहीं पक्षियों की 300 से ज्यादा प्रजातियां यहां मौजूद रहती हैं. मानसून में स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ प्रवासी पक्षियों की आवाजाही भी काफी बढ़ जाती है, जिससे पूरा पार्क उनकी चहचहाहट से गूंजने लगता है. बारिश की वजह से यहां फैली हरियाली, पानी से भरे इलाके और प्राकृतिक आवास वन्यजीवों के रहने के लिए बेहद मुफीद माहौल बना देते हैं. यही वजह है कि इन दिनों पक्षियों और बाकी जीवों की गतिविधियां सामान्य से कहीं ज्यादा नजर आती हैं.
वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के शौकीनों की पहली पसंद
झीलों और तालाबों के किनारे जमा होने वाले पक्षियों का झुंड यहां आने वाले हर पर्यटक के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बनता है. यही वजह है कि केवलादेव नेशनल पार्क वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों के बीच भी बेहद लोकप्रिय जगह बन चुका है. यहां की प्राकृतिक रोशनी, चारों ओर फैली हरियाली और जीवों की अलग-अलग किस्में ऐसे नजारे पेश करती हैं, जिन्हें कैमरे में कैद करना अपने आप में एक खास अनुभव बन जाता है. प्रकृति से जुड़ाव रखने वालों के लिए यह वक्त सुकून के साथ-साथ रोमांच का भी अहसास कराता है.
देश-विदेश से पहुंच रहे बर्ड वॉचर्स
हर साल मानसून के दौरान देश और विदेश से बड़ी तादाद में पर्यटक और बर्ड वॉचर्स इस पार्क का रुख करते हैं. पार्क का शांत माहौल, जीव-जंतुओं की विविधता और प्राकृतिक खूबसूरती इसे एक अलग ही तरह का पर्यटन स्थल बनाती है. मानसून के मौसम में केवलादेव नेशनल पार्क सिर्फ अपनी सुंदरता से लोगों को नहीं खींचता, बल्कि यह वन्यजीवों की दुनिया को नजदीक से देखने का शानदार मौका भी देता है. इस साल भी मानसून की शुरुआत के साथ ही पार्क एक बार फिर पूरी तरह गुलजार हो उठा है.













