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मानसून में जान से भर उठा भरतपुर स्थित केवलादेव नेशनल पार्क, दिखे 21 फीट लंबे अजगर और सैकड़ों पक्षीयात्रा
3 घंटे पहले· 1

मानसून में जान से भर उठा भरतपुर स्थित केवलादेव नेशनल पार्क, दिखे 21 फीट लंबे अजगर और सैकड़ों पक्षी

राजस्थान के भरतपुर स्थित केवलादेव नेशनल पार्क में मानसून की बारिश के साथ ही हरियाली और पक्षियों की चहल-पहल लौट आई है, यहां 21 फीट तक लंबे अजगर और 300 से ज्यादा पक्षी प्रजातियां देखी जा रही हैं.

काव्या नायरकाव्या नायरट्रैवल एडिटर 2 मिनट पढ़ें AI के लिए
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राजस्थान के भरतपुर जिले में बसा केवलादेव नेशनल पार्क मानसून की दस्तक के साथ ही पूरी तरह बदल जाता है. यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल यह वेटलैंड बारिश के मौसम में हरियाली और जैव विविधता से भर उठता है, और देखने वालों को लगता है जैसे प्रकृति ने खुद इस जगह को नए सिरे से संवार दिया हो. वाइल्डलाइफ को करीब से देखने के शौकीनों के लिए यह मौसम पार्क को किसी जन्नत जैसा बना देता है.

इस दौरान पार्क में 21 फीट तक लंबे अजगर जैसे दुर्लभ जीव देखने को मिलते हैं, वहीं पक्षियों की 300 से ज्यादा प्रजातियां यहां मौजूद रहती हैं. मानसून में स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ प्रवासी पक्षियों की आवाजाही भी काफी बढ़ जाती है, जिससे पूरा पार्क उनकी चहचहाहट से गूंजने लगता है. बारिश की वजह से यहां फैली हरियाली, पानी से भरे इलाके और प्राकृतिक आवास वन्यजीवों के रहने के लिए बेहद मुफीद माहौल बना देते हैं. यही वजह है कि इन दिनों पक्षियों और बाकी जीवों की गतिविधियां सामान्य से कहीं ज्यादा नजर आती हैं.

वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी के शौकीनों की पहली पसंद

झीलों और तालाबों के किनारे जमा होने वाले पक्षियों का झुंड यहां आने वाले हर पर्यटक के लिए सबसे बड़ा आकर्षण बनता है. यही वजह है कि केवलादेव नेशनल पार्क वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों के बीच भी बेहद लोकप्रिय जगह बन चुका है. यहां की प्राकृतिक रोशनी, चारों ओर फैली हरियाली और जीवों की अलग-अलग किस्में ऐसे नजारे पेश करती हैं, जिन्हें कैमरे में कैद करना अपने आप में एक खास अनुभव बन जाता है. प्रकृति से जुड़ाव रखने वालों के लिए यह वक्त सुकून के साथ-साथ रोमांच का भी अहसास कराता है.

देश-विदेश से पहुंच रहे बर्ड वॉचर्स

हर साल मानसून के दौरान देश और विदेश से बड़ी तादाद में पर्यटक और बर्ड वॉचर्स इस पार्क का रुख करते हैं. पार्क का शांत माहौल, जीव-जंतुओं की विविधता और प्राकृतिक खूबसूरती इसे एक अलग ही तरह का पर्यटन स्थल बनाती है. मानसून के मौसम में केवलादेव नेशनल पार्क सिर्फ अपनी सुंदरता से लोगों को नहीं खींचता, बल्कि यह वन्यजीवों की दुनिया को नजदीक से देखने का शानदार मौका भी देता है. इस साल भी मानसून की शुरुआत के साथ ही पार्क एक बार फिर पूरी तरह गुलजार हो उठा है.

इसका आप पर असर

यह खबर खासकर घूमने-फिरने और वन्यजीव प्रेमी पाठकों के लिए मायने रखती है.

  • भारत में: देश भर के वाइल्डलाइफ और बर्ड वॉचिंग के शौकीन मानसून के दौरान इस पार्क को घूमने के लिए प्लान कर सकते हैं.
  • भरतपुर, राजस्थान में: पर्यटकों की बढ़ती आमद से स्थानीय होटल, गाइड और छोटे कारोबारियों को सीधा फायदा मिलता है.

सवाल-जवाब

केवलादेव नेशनल पार्क कहां स्थित है?
यह पार्क राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित है.
केवलादेव नेशनल पार्क को कौन सा खास दर्जा मिला है?
यह यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल एक प्रसिद्ध वेटलैंड है.
मानसून में पार्क में कौन से दुर्लभ जीव देखे जाते हैं?
यहां 21 फीट तक लंबे अजगर जैसे दुर्लभ जीव देखने को मिलते हैं.
पार्क में कितनी पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं?
यहां 300 से अधिक पक्षियों की प्रजातियां देखी जा सकती हैं.
मानसून में पक्षियों की गतिविधि क्यों बढ़ जाती है?
बारिश से बनी हरियाली, जलभराव वाले इलाके और अनुकूल प्राकृतिक आवास के चलते स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की चहल-पहल बढ़ जाती है.
पार्क वाइल्डलाइफ फोटोग्राफरों के लिए क्यों खास है?
यहां की प्राकृतिक रोशनी, हरियाली और जीवों की विविधता ऐसे नजारे देती है जिन्हें कैमरे में कैद करना खास अनुभव बन जाता है.
पार्क में कौन-कौन घूमने आते हैं?
हर साल मानसून में देश-विदेश से बड़ी संख्या में पर्यटक और बर्ड वॉचर्स यहां पहुंचते हैं.
काव्या नायर
लेखक के बारे मेंकाव्या नायरट्रैवल एडिटर देहरादून
विशेषज्ञताट्रैवल लेखन, पर्यटन, डेस्टिनेशन गाइड, संस्कृति, लाइफस्टाइल ट्रैवल, होटल, एडवेंचर ट्रैवल, फूड एवं ट्रैवल, वैश्विक पर्यटन रुझान

काव्या नायर एक ट्रैवल लेखिका हैं जो पर्यटन स्थलों, ट्रैवल गाइड, पर्यटन रुझानों, संस्कृति और लाइफस्टाइल अनुभवों को कवर करती हैं। वे दुनियाभर के यात्रियों के लिए दिलचस्प कहानियाँ और व्यावहारिक जानकारी साझा करती हैं।

काव्या नायर एक ट्रैवल लेखिका हैं जो पर्यटन स्थलों की कवरेज, ट्रैवल फ़ीचर, सांस्कृतिक खोज और ट्रैवल लाइफस्टाइल पत्रकारिता में विशेषज्ञता रखती हैं। वे लोकप्रिय व उभरते पर्यटन स्थलों, ट्रैवल गाइड, होटल व आतिथ्य अनुभवों, स्थानीय संस्कृतियों, खानपान परंपराओं और एडवेंचर टूरिज़्म के बारे में लिखती हैं। प्रेरक और जानकारीपूर्ण कहानी कहने पर ज़ोर देते हुए काव्या पाठकों को नई जगहें खोजने और सार्थक यात्रा अनुभव योजना बनाने में मदद करती हैं। उनका काम वैश्विक पर्यटन रुझानों, बजट व लक्ज़री ट्रैवल की अंतर्दृष्टि और पाठकों को दुनियाभर की जगहों से जोड़ने वाली सांस्कृतिक कहानियों को उजागर करता है।

पूरा प्रोफ़ाइल देखें ↗
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