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प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम है सापूतारा, भगवान राम के वनवास और सर्प पूजा से जुड़ा है डांग का यह पर्वतीय इलाकायात्रा
19 सित॰ 2026, 1:05 pm (39 दिन पहले)· 3

प्रकृति और आस्था का अनूठा संगम है सापूतारा, भगवान राम के वनवास और सर्प पूजा से जुड़ा है डांग का यह पर्वतीय इलाका

गुजरात के डांग जिले में स्थित सापूतारा राज्य का इकलौता पर्वतीय पर्यटन स्थल है, जो अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ रामायण कालीन मान्यताओं और आदिवासी संस्कृति के लिए पहचाना जाता है.

पश्चिमी भारत का राज्य गुजरात आमतौर पर अपने ऐतिहासिक मंदिरों, विशाल रेगिस्तान और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर के लिए दुनिया भर में पहचाना जाता है. हालांकि बहुत कम पर्यटकों को इस बात की जानकारी है कि इस राज्य में एक बेहद शांत और रमणीय पर्वतीय इलाका भी मौजूद है. डांग जिले की हरी भरी वादियों में समुद्र तल से तकरीबन 1,000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित सापूतारा गुजरात का अकेला हिल स्टेशन है. पश्चिमी घाट की सह्याद्रि पर्वत श्रृंखला की गोद में बसा यह क्षेत्र चारों तरफ घने जंगलों, प्राकृतिक झरनों, बादलों से घिरी पहाड़ियों और अपनी अनोखी लोक परंपराओं के लिए जाना जाता है.

दंडकारण्य और भगवान राम के 11 वर्षों का वनवास

भौगोलिक दृष्टि से यह पर्वतीय स्थल महाराष्ट्र की सीमा के बिल्कुल नजदीक स्थित है. ऊंचाई पर बसे होने के कारण यहां का तापमान साल भर सुखद और ठंडा बना रहता है, जिसके चलते भीषण गर्मियों के दौरान यह मैदानी इलाकों के निवासियों के लिए एक पसंदीदा विश्राम स्थल बन जाता है. प्राकृतिक सुंदरता के अलावा इस जगह का एक गहरा पौराणिक और ऐतिहासिक संदर्भ भी है. स्थानीय जनश्रुतियों के मुताबिक डांग के ये विशाल अरण्य प्राचीन काल के ऐतिहासिक दंडकारण्य वन का अभिन्न हिस्सा रहे हैं. लोक मान्यताओं के अनुसार अपने 14 वर्षों के वनवास काल में से लगभग 11 वर्ष भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने इसी घने वन क्षेत्र में व्यतीत किए थे. इस क्षेत्र के आसपास स्थित शबरीधाम और उससे जुड़े कई अन्य पावन स्थल आज भी इस रामायण कालीन गाथा के जीवंत प्रमाण के रूप में पूजे जाते हैं, जिस कारण श्रद्धालुओं के बीच इस पूरे भूभाग की बड़ी धार्मिक प्रतिष्ठा है.

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सर्पों का निवास और आदिवासी समाज की प्राचीन परंपरा

इस पर्वतीय स्थल के नामकरण के पीछे भी एक बेहद दिलचस्प सांस्कृतिक पृष्ठभूमि मौजूद है. स्थानीय भाषा और परंपरा में सापूतारा शब्द का शाब्दिक अर्थ ही सर्पों का निवास या सांपों का घर माना जाता है. यहां बहने वाली सर्पगंगा नदी के तट पर एक विशेष सर्प प्रतिमा स्थापित है, जिसे डांग का मूल आदिवासी समुदाय अत्यंत पूज्य मानता है. इस आदिवासी समाज में सांपों को किसी डर का कारण नहीं बल्कि प्रकृति, संरक्षण और देवत्व के साक्षात प्रतीक के रूप में देखा जाता है. विशेष रूप से नाग पंचमी और होली के त्योहारों पर स्थानीय लोग यहां पारंपरिक विधि विधान से विशेष पूजा अर्चना करते हैं. सदियों पुरानी यह अनूठी सांस्कृतिक रीत आज भी आधुनिक दौर में उसी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है.

पर्यटकों के लिए प्रमुख दर्शनीय स्थल

सैलानियों के भ्रमण और मनोरंजन के लिए यहां कई मनमोहक स्थान उपलब्ध हैं. यहां आने वाले लोग सापूतारा झील में नौकायन का आनंद लेते हैं, जबकि सनसेट प्वाइंट और गांधी शिखर से ढलते सूरज और घाटियों के विहंगम दृश्य दिखाई देते हैं. इसके अलावा रोमांच के शौकीनों के लिए रोपवे की सुविधा मौजूद है. साथ ही कलात्मक ढंग से तैयार किया गया स्टेप गार्डन और स्थानीय जनजीवन की झांकी प्रस्तुत करने वाला डांगी जनजातीय संग्रहालय भी प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं. बरसात के मौसम में यह क्षेत्र और भी आकर्षक हो जाता है, जब पास ही स्थित गीरा और गिरमल जैसे विशाल झरने पूरे वेग के साथ बहते हुए पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं.

सवाल-जवाब

सापूतारा किस राज्य में स्थित है और यह क्यों प्रसिद्ध है?
सापूतारा गुजरात के डांग जिले में स्थित है और यह इस राज्य का एकमात्र हिल स्टेशन है, जो अपनी ठंडी जलवायु, झरनों और प्राकृतिक वादियों के लिए प्रसिद्ध है.
समुद्र तल से सापूतारा की ऊंचाई कितनी है?
सापूतारा समुद्र तल से लगभग 1,000 मीटर की ऊंचाई पर पश्चिमी घाट की सह्याद्रि पर्वतमाला में बसा हुआ है.
सापूतारा नाम का अर्थ क्या होता है?
सापूतारा का शाब्दिक अर्थ 'सर्पों का निवास' होता है, जहां स्थानीय आदिवासी समुदाय सर्पगंगा नदी के किनारे सांप की पूजा करता है.
भगवान राम के वनवास से इस जगह का क्या संबंध माना जाता है?
मान्यता के अनुसार डांग का जंगल प्राचीन दंडकारण्य का हिस्सा था, जहां भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने अपने वनवास के करीब 11 वर्ष बिताए थे.
सापूतारा के प्रमुख पर्यटक आकर्षण कौन से हैं?
यहां सापूतारा झील, सनसेट प्वाइंट, गांधी शिखर, रोपवे, स्टेप गार्डन, डांगी जनजातीय संग्रहालय तथा गीरा और गिरमल झरने मुख्य आकर्षण हैं.
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