उत्तर प्रदेश के बरेली से उत्तराखंड के आध्यात्मिक स्थलों की ओर जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए कुमाऊं की पहाड़ियों का सफर बेहद खास अनुभव लेकर आता है। नीम करोली बाबा के पावन आश्रम कैंची धाम और भगवान शिव के प्राचीन जागेश्वर धाम की संयुक्त यात्रा की तैयारी कर रहे लोगों के लिए सही रास्ते का चुनाव बेहद जरूरी है। पहाड़ों के घुमावदार रास्तों, प्राकृतिक छटा और धार्मिक वातावरण के बीच इस यात्रा को सुगम बनाने के लिए दूरी, संभावित यात्रा समय, रहने-खाने के खर्च और स्थानीय दिशा-निर्देशों की सही जानकारी होना आवश्यक है।
बरेली से हल्द्वानी का शुरुआती सफर
इस आध्यात्मिक यात्रा की शुरुआत बरेली शहर से होती है, जहां से श्रद्धालु बहेड़ी, किच्छा और लालकुआं के रास्ते होते हुए हल्द्वानी पहुंचते हैं। मैदानी क्षेत्र से गुजरने वाले इस सड़क मार्ग की कुल दूरी लगभग 100 किलोमीटर पड़ती है। सामान्य यातायात परिस्थितियों में इस चरण को पूरा करने में करीब 2 से 3 घंटे का समय लगता है। हालांकि, यात्रा की योजना बनाते समय बहेड़ी रेलवे क्रॉसिंग और किच्छा कस्बे के आसपास संभावित ट्रैफिक दबाव का ध्यान रखना चाहिए। सुबह के समय जल्दी प्रस्थान करने से शहर की भीड़भाड़ से बचने में काफी सहायता मिलती है, यद्यपि इस मार्ग पर पूरी तरह जाम-मुक्त आवागमन तय नहीं माना जा सकता।
हल्द्वानी से कैंची धाम का पहाड़ी रास्ता
हल्द्वानी पहुंचने के बाद यात्रा का पहाड़ी हिस्सा शुरू होता है। यहां से यात्री काठगोदाम और भवाली होते हुए सीधे कैंची धाम तक पहुंच सकते हैं। हल्द्वानी से नीम करोली बाबा के इस आश्रम की दूरी लगभग 40 से 45 किलोमीटर है। भौगोलिक दृष्टि से कैंची धाम नैनीताल-अल्मोड़ा मुख्य मार्ग पर स्थित है, जो भवाली से करीब 9 किलोमीटर आगे पड़ता है। सप्ताहांत (वीकेंड) तथा सार्वजनिक छुट्टियों के दिनों में यहां दर्शनार्थियों की खासी तादाद जुटती है। अधिक भीड़ की स्थिति में स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी किए जाने वाले पार्किंग और यातायात निर्देशों का पालन करना अनिवार्य हो जाता है। अत्यधिक भीड़ होने पर वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्थलों पर खड़ा करके आगे जाने के लिए शटल सेवा का सहारा लेना पड़ सकता है।
कैंची धाम से जागेश्वर धाम की आगे की यात्रा
नीम करोली बाबा के दर्शन करने के बाद यात्री भगवान शिव के प्रसिद्ध जागेश्वर धाम के लिए प्रस्थान कर सकते हैं। कैंची धाम से आगे बढ़ते हुए यह मार्ग भवाली, खैरना और अल्मोड़ा नगर के क्षेत्रों से होकर गुजरता है। चुने गए विशिष्ट रास्ते के आधार पर कैंची धाम से जागेश्वर धाम की सड़क दूरी करीब 90 से 110 किलोमीटर के बीच बैठती है। घुमावदार पहाड़ी रास्तों के कारण इस दूरी को तय करने में सामान्यतः 3 से 4 घंटे का समय लग जाता है। जागेश्वर धाम देवदार के घने और ऊंचे वनों से घिरा हुआ एक अत्यंत प्राचीन मंदिर समूह है, जहां भगवान शिव की आराधना के लिए वर्ष भर बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।
रहने और भोजन के खर्च का अनुमान
इस पूरे यात्रा मार्ग पर ठहरने के लिए हल्द्वानी, भवाली तथा जागेश्वर के नजदीकी इलाकों में होटल, होमस्टे और गेस्ट हाउस आसानी से उपलब्ध हो जाते हैं। सामान्य बजट श्रेणी के कमरे का किराया लगभग 800 से 2,500 रुपये प्रति रात या उससे अधिक के दायरे में रहता है। खान-पान की बात करें तो साधारण ढाबों पर प्रति व्यक्ति भोजन का खर्च करीब 120 से 200 रुपये आता है, जबकि अपेक्षाकृत बड़े रेस्टोरेंट में यह खर्च 200 से 300 रुपये प्रति व्यक्ति तक पहुंच सकता है। ध्यान रहे कि ये सभी खर्च अनुमानित हैं, जिनमें यात्रा के सीजन, कमरों की उपलब्धता और होटल की सुविधाओं के स्तर के अनुसार बदलाव आ सकता है।
सड़क सुरक्षा और यात्रा की पूर्व तैयारी
पूरी यात्रा के पैमानों को देखें तो बरेली से कैंची धाम तक का फासला लगभग 135 से 150 किलोमीटर रहता है, जबकि जागेश्वर धाम तक की संपूर्ण यात्रा करीब 220 से 250 किलोमीटर के दायरे में आती है। अलग-अलग वैकल्पिक मार्गों के चयन से वास्तविक दूरी में कुछ अंतर हो सकता है। यात्रा शुरू करने से पहले मार्ग पर पड़ने वाले संभावित टोल टैक्स और वाहनों के पार्किंग शुल्क की जानकारी जांच लेना फायदेमंद रहता है। पर्वतीय क्षेत्रों में रात के वक्त वाहन चलाने से बचना चाहिए। इसके साथ ही सुरक्षित यात्रा के लिए अपनी गाड़ी के ब्रेक, टायरों की स्थिति और ईंधन के स्तर की अग्रिम जांच अवश्य कर लेनी चाहिए।



















