राजस्थान के खैरथल-तिजारा जिले में मानसून की दस्तक के साथ ही प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक आस्था का एक अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। मुंडावर नगर पालिका क्षेत्र में स्थित प्राचीन भैरव खोला पहाड़ी पर बहने वाला प्राकृतिक 'चादर' झरना इन दिनों पर्यटकों और श्रद्धालुओं के आकर्षण का मुख्य केंद्र बना हुआ है। मुंडावर के मीणा मोहल्ला से लगभग 1 किलोमीटर आगे स्थित इस मनमोहक स्थल पर बरसात के मौसम में हर दिन बड़ी संख्या में लोग हरियाली और कल-कल बहते पानी के नजारों का आनंद लेने पहुंच रहे हैं।
प्राचीन भैरव खोला पर्वत और धार्मिक आस्था का केंद्र
भैरव खोला पहाड़ पर विराजमान भैरव बाबा और मनसा माता मंदिर क्षेत्रवासियों की गहरी आस्था का प्रतीक हैं। यहां वर्ष भर दूर-दूर से श्रद्धालु दर्शन और पूजन के लिए आते हैं। मंदिर परिसर में माथा टेककर भक्त अपनी सुख-समृद्धि की प्रार्थना करते हैं और मन की मुरादें मांगते हैं। स्थानीय निवासियों की मान्यता है कि जो भी भक्त यहां सच्चे दिल से प्रार्थना करता है, उसकी मनोकामना जरूर पूरी होती है। चारों तरफ से प्राकृतिक वादियों से घिरा यह पावन स्थल श्रद्धालुओं को न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है बल्कि उन्हें एक अलौकिक अनुभूति भी कराता है।
दो पहाड़ों के बीच बहने वाला चादर झरना बना मुख्य आकर्षण
मनसा माता मंदिर के समीप दो विशाल पहाड़ों की घाटियों के बीच स्थित यह प्राकृतिक झरना स्थानीय लोगों में 'चादर' नाम से जाना जाता है। मानसून के समय जब तेज बारिश होती है, तो पहाड़ों से गिरता पानी और चारों ओर फैली घनी हरियाली इस जगह को स्वर्ग जैसा रूप दे देती है। मुंडावर और आसपास के इलाकों से लोग अपने दोस्तों तथा परिवारजनों के साथ यहां की मनमोहक छटा देखने पहुंचते हैं। प्रकृति प्रेमियों और पर्यटन के शौकीनों के लिए यह स्थल मानसून के मौसम में एक पसंदीदा पिकनिक स्पॉट बन चुका है।
फिसलन भरी चट्टानों के कारण सुरक्षा व्यवस्था की मांग
झरने की लोकप्रियता बढ़ने के साथ ही यहां आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी सामने आ रही हैं। बरसात के दिनों में झरने के आसपास की चट्टानें अत्यधिक फिसलन भरी हो जाती हैं, जिससे किसी दुर्घटना या हादसे की संभावना बनी रहती है। वर्तमान में झरने के किनारों पर किसी भी प्रकार की सुरक्षा व्यवस्था या रेलिंग का अभाव है। स्थानीय नागरिकों और आसपास के ग्रामीणों ने प्रशासन से पुरजोर मांग की है कि झरने के किनारों पर अविलंब मजबूत सुरक्षा रेलिंग लगाई जाए। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि प्रशासन यहां आवश्यक बुनियादी कदम उठाए और सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करे, तो यह धार्मिक और प्राकृतिक स्थल एक सुरक्षित पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित हो सकता है।



















