भारतीय क्रिकेट गलियारों में इन दिनों केवल एक ही नाम की सबसे अधिक गूंज सुनाई दे रही है और वह युवा खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी का है। बेहद कम उम्र यानी महज 15 वर्ष की आयु में इस खिलाड़ी ने भारत की तरफ से खेलते हुए इंटरनेशनल स्तर पर कदम रखकर एक नया इतिहास लिख डाला है। हालांकि, मौजूदा समय में वैभव ने केवल टी20 प्रारूप में ही पदार्पण किया है, मगर उनके मौजूदा प्रदर्शन को देखते हुए यह उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में उन्हें खेल के तीनों ही प्रारूपों में देश का प्रतिनिधित्व करने का बहुमूल्य अवसर मिल सकता है।
पार्थिव पटेल का अनोखा और हैरान करने वाला डेब्यू
भले ही आज के समय में वैभव सूर्यवंशी अपनी असाधारण उपलब्धि के कारण हर तरफ सुर्खियां बटोर रहे हों, लेकिन भारतीय क्रिकेट के इतिहास में उनसे भी काफी पहले एक ऐसा अनूठा वाकया हो चुका है। एक ऐसा भी विकेटकीपर बल्लेबाज भारतीय टीम में आया था, जिसे राष्ट्रीय टीम के लिए खेलने से पहले अपने घरेलू करियर में एक भी फर्स्ट क्लास मैच खेलने का मौका तक नहीं मिला था। यह खिलाड़ी कोई और नहीं बल्कि पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज पार्थिव पटेल थे, जिन्होंने अपने चयन से हर किसी को हैरान कर दिया था.
सौरव गांगुली के फैसले से खुला था किस्मत का दरवाजा
पार्थिव पटेल ने वर्ष 2002 में इंग्लैंड के दौरे पर अपनी टेस्ट करियर की धमाकेदार शुरुआत की थी। इस अंतरराष्ट्रीय पदार्पण से ठीक पहले उन्होंने अपने क्रिकेट करियर में एक भी फर्स्ट क्लास मुकाबले में शिरकत नहीं की थी। हालांकि, वर्ष 2002 के दौरान ही उन्होंने इंडिया-ए की तरफ से खेलते हुए अपने लाजवाब खेल से चयनकर्ताओं और दिग्गजों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। उस दौर में भारतीय टेस्ट टीम की कमान संभाल रहे सौरव गांगुली इस युवा खिलाड़ी की प्रतिभा से बेहद प्रभावित हुए। बस फिर क्या था, कप्तान गांगुली की विशेष पसंद और भरोसे के चलते पार्थिव को बिना एक भी रणजी ट्रॉफी मैच खेले सीधे भारतीय टेस्ट टीम का बुलावा भेज दिया गया।
सबसे कम उम्र के विकेटकीपर का ऐतिहासिक रिकॉर्ड
भारतीय क्रिकेट के इतिहास के पन्नों में पार्थिव पटेल के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड आज भी दर्ज है जिसे तोड़ना आसान नहीं है। वह आज भी भारत के लिए सबसे कम उम्र में टेस्ट क्रिकेट खेलने वाले विकेटकीपर के रूप में जाने जाते हैं। जब उन्होंने देश के लिए अपना पहला टेस्ट मैच खेला था, तब उनकी उम्र महज 17 वर्ष और 152 दिन थी। हालांकि, इस ऐतिहासिक पदार्पण मैच की पहली पारी में उनका बल्ला नहीं चल सका और वह आठ गेंदों का सामना करने के बाद शून्य के स्कोर पर ही पवेलियन लौट गए। इसके बाद दूसरी पारी में उन्होंने संभलकर खेलते हुए कुल 19 रनों का योगदान दिया था।
कैसा रहा पार्थिव पटेल का कुल अंतरराष्ट्रीय सफर
भारतीय अंतरराष्ट्रीय सेटअप में पार्थिव पटेल के पूरे करियर पर नजर डाली जाए तो उनकी शुरुआत बेहद कम उम्र में जरूर हो गई थी, लेकिन वह इस सफर को लंबे समय तक बरकरार रखने में कामयाब नहीं हो सके। उन्होंने भारत के लिए अपने लंबे करियर के दौरान कुल 25 टेस्ट मैचों के अलावा 38 एकदिवसीय यानी वनडे मुकाबले और सिर्फ 2 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। टेस्ट क्रिकेट के लंबे प्रारूप में खेलते हुए उन्होंने छह शानदार अर्धशतकों की बदौलत कुल 934 रन बनाए। इसके अलावा एकदिवसीय मुकाबलों में उनके बल्ले से कुल 736 रन निकले, जबकि सीमित ओवरों के अपने छोटे से टी20 करियर के दो मैचों में उन्होंने कुल 36 रन बनाए।


















