हिमाचल प्रदेश में अब मॉनसून की दस्तक के साथ ही गर्मियों के मौसम का समापन हो गया है। बीते तीन महीनों के दौरान, पहाड़ों की रानी कहे जाने वाले शिमला में पर्यटकों की भारी भीड़ देखने को मिली। सैलानियों के इस बड़े जमावड़े के बीच शिमला पुलिस ने दावा किया है कि रिकॉर्ड संख्या में पर्यटकों के आगमन के बावजूद शहर की यातायात व्यवस्था को सुचारू बनाए रखा गया। मई महीने से लेकर अब तक शिमला के विभिन्न प्रवेश द्वारों से कुल 22 लाख वाहनों का आवागमन हुआ, जिसे पुलिस ने अपनी प्रभावी ट्रैफिक नीति की बड़ी उपलब्धि बताया है।
भारी ट्रैफिक का सांख्यिकीय ब्यौरा
आंकड़ों पर गौर करें तो मई में शिमला की सीमाओं में करीब 8.5 लाख वाहन दाखिल हुए, जबकि जून के व्यस्त महीने में यह संख्या बढ़कर 10.5 लाख तक पहुंच गई। जुलाई के शुरुआती दिनों में भी 3 लाख वाहनों का प्रवेश दर्ज किया गया। इतनी भारी तादाद में वाहनों के आने से सड़कों पर दबाव काफी बढ़ गया था। इस चुनौती का सामना करने के लिए शिमला पुलिस ने अपने संसाधनों में व्यापक वृद्धि की। पूर्व में तैनात 136 पुलिस और होमगार्ड कर्मियों की संख्या को बढ़ाकर 265 कर दिया गया। इसके अलावा, फील्ड में 50 स्वयंसेवकों और 32 ट्रैफिक बाइक राइडर्स की तैनाती सुनिश्चित की गई, ताकि किसी भी तरह का जाम लगने पर त्वरित कार्रवाई की जा सके।
विकेंद्रीकृत ट्रैफिक प्रबंधन की रणनीति
शिमला पुलिस ने पूरे शहर को पांच अलग-अलग सेक्टरों में विभाजित करके एक विकेंद्रीकृत ट्रैफिक मॉडल अपनाया। इस नई व्यवस्था में हर सेक्टर की कमान डीएसपी ट्रैफिक की सीधी निगरानी में एक एनजीओ ग्रेड-वन अधिकारी के हाथों में दी गई। पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी खुद भी पीक आवर्स के दौरान सड़कों पर तैनात रहे और पूरी स्थिति पर पैनी नजर बनाए रखी। शहर के भीतर वाहनों का दबाव घटाने के लिए शोघी-मेहली बाईपास का कुशलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया। कुफरी, मशोबरा, नालदेहरा, अपर शिमला और किन्नौर की ओर जाने वाले वाहनों को शहर के मुख्य रास्तों के बजाय बाईपास से डायवर्ट कर दिया गया। वाहनों की पहचान के लिए उन पर विशेष स्टिकर भी लगाए गए, जिससे हर दिन करीब 600 से 800 वाहन वैकल्पिक रास्तों से गुजरे और शहर के कोर इलाकों में जाम का खतरा कम हो गया।
यातायात प्रवाह और भविष्य की अपील
पुलिस की रणनीति का मुख्य उद्देश्य ट्रैफिक को रोकने के बजाय उसे लगातार गतिशील रखना था। केवल अत्यधिक भीड़ वाले स्थानों पर ही पुलिस ने चरणबद्ध तरीके से वाहनों का नियमन किया। इसके अलावा, ट्रैवलर, अर्बेनिया और स्कैनिया जैसे बड़े यात्री वाहनों को भी प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंचने की छूट दी गई। शिमला पुलिस ने सोशल मीडिया का इस्तेमाल रीयल-टाइम ट्रैफिक अपडेट देने और सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने में भी किया। अंत में, पुलिस विभाग ने इस प्रबंधन में सहयोग के लिए स्थानीय नागरिकों, एनसीसी, एनएसएस के छात्रों और अन्य विभागों का धन्यवाद दिया और भविष्य में भी यातायात नियमों का पालन करने का आग्रह किया है।











