भारतीय रेलवे ने उन यात्रियों के लिए एक महत्वपूर्ण परामर्श जारी किया है जो अनारक्षित डिजिटल टिकटों का उपयोग करते हैं। रेलवे प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि टिकट सत्यापन के दौरान केवल वही टिकट मान्य होगा जो यात्री के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर RailOne ऐप में मूल रूप से दिखाई देता है। रेलवे ने साफ कर दिया है कि किसी भी प्रकार के स्क्रीनशॉट, फोटो, पीडीएफ फाइल या व्हाट्सएप पर साझा किए गए टिकट को यात्रा का वैध प्रमाण नहीं माना जाएगा।
घटना और जुर्माना
यह स्पष्टीकरण हाल ही में हुई एक घटना के बाद आया है, जिसमें ट्रेन नंबर 18517 कोरबा-विशाखापत्तनम लिंक एक्सप्रेस में यात्रा कर रही एक महिला यात्री को जुर्माना भरना पड़ा। महिला ने अपने भाई द्वारा व्हाट्सएप पर भेजे गए अनारक्षित टिकट को दिखाया था। जांच के दौरान, ट्रैवलिंग टिकट परीक्षक (TTE) ने पाया कि वह टिकट शाम 4:45 बजे जारी किया गया था, जबकि ट्रेन बोर्डिंग स्टेशन से दोपहर 4:10 बजे ही निकल चुकी थी। इस अनियमितता और टिकट के अवैध प्रारूप के कारण यात्री पर जुर्माना लगाया गया।
यात्रियों के लिए अनिवार्य निर्देश
अनारक्षित डिजिटल टिकट बुक करने वाले यात्रियों को रेलवे ने निम्नलिखित बिंदुओं का पालन करने की सलाह दी है
- यात्री को टिकट उसी मोबाइल फोन पर दिखाना होगा जिस पर RailOne ऐप इंस्टॉल है।
- यात्रा के दौरान अपना मोबाइल और पंजीकृत सिम कार्ड अपने साथ रखना अनिवार्य है।
- डिजिटल अनारक्षित टिकट को ट्रेन के बोर्डिंग स्टेशन से निकलने से पहले बुक किया जाना चाहिए।
- सुनिश्चित करें कि आपके मोबाइल की बैटरी पर्याप्त हो ताकि यात्रा के दौरान टिकट दिखाने में कोई समस्या न हो।
- यदि ट्रेन प्रस्थान कर जाने के बाद टिकट बुक किया जाता है, तो उसे अवैध माना जाएगा।
- सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म या अन्य माध्यमों से प्राप्त स्क्रीनशॉट, पीडीएफ और तस्वीरों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
क्यों स्क्रीनशॉट हैं अमान्य?
रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया कि ये नियम विशेष रूप से अनारक्षित डिजिटल टिकटों के लिए हैं और RailOne ऐप के माध्यम से बुक किए गए आरक्षित टिकटों पर लागू नहीं होते हैं। स्क्रीनशॉट या फोटो को अमान्य मानने के पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं
- स्क्रीनशॉट में लाइव सत्यापन की सुविधा का अभाव होता है।
- फोटो या पीडीएफ में नवीनतम बुकिंग जानकारी अपडेट नहीं होती है।
- अक्सर फोटो धुंधली हो सकती है या उसमें आवश्यक जानकारी गायब हो सकती है, जिससे सत्यापन में कठिनाई आती है।
- ऐसी प्रतियों को आधिकारिक रेलवे सिस्टम के माध्यम से प्रमाणित करना संभव नहीं है।
- सीधे ऐप से सत्यापन करने पर ही अधिकारी यह पुष्टि कर सकते हैं कि टिकट असली है और सही यात्री के नाम पर है।
डिजिटल यात्रा का भविष्य
भारतीय रेलवे, जो दुनिया के सबसे बड़े रेल नेटवर्क में से एक है, लगातार डिजिटल मॉडल अपनाने की दिशा में काम कर रहा है। स्मार्टफोन और ऑनलाइन ऐप का उपयोग टिकट सत्यापन की गति बढ़ाने, कागज की खपत कम करने, बुकिंग में पारदर्शिता लाने, धोखाधड़ी रोकने और समग्र यात्री प्रबंधन को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।











