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कोटा का रहस्यमयी कुंड: चंबल के तट पर स्थित है एक अनोखा जल स्रोत, जहां सर्दी में गर्म और गर्मी में ठंडा रहता है पानीयात्रा
10 जुल॰ 2026, 4:48 pm (109 दिन पहले)· 6

कोटा का रहस्यमयी कुंड: चंबल के तट पर स्थित है एक अनोखा जल स्रोत, जहां सर्दी में गर्म और गर्मी में ठंडा रहता है पानी

राजस्थान के कोटा में चंबल नदी के किनारे एक प्राचीन कुंड मौजूद है, जिसका जल तापमान मौसम के अनुसार बदल जाता है और इसे चर्म रोगों के उपचार के लिए प्रभावी माना जाता है।

राजस्थान के कोटा में चंबल नदी के तट के पास एक प्राचीन और चमत्कारिक कुंड स्थित है, जो स्थानीय लोगों की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। इस कुंड की सबसे बड़ी विशेषता इसका बदलता हुआ तापमान है, जो सामान्य विज्ञान की समझ से परे प्रतीत होता है। कड़ाके की सर्दी में, जब आसपास का वातावरण बेहद ठंडा होता है, तब इस कुंड का पानी गर्म महसूस होता है। वहीं, भीषण गर्मियों के दौरान जब लू चलती है, तब यही जल बेहद शीतल हो जाता है। यह विसंगति इसे एक रहस्यमय स्थान के रूप में स्थापित करती है।

सैकड़ों साल पुरानी ऐतिहासिक धरोहर

पवन पंचोली, जो लंबे समय से इस स्थान की देखभाल कर रहे हैं, के अनुसार यह कुंड करीब 200 से 300 वर्ष पुराना माना जाता है। विशाल चट्टानों को तराश कर बनाए गए इस निर्माण की सबसे बड़ी पहेली इसका जल स्रोत है। आज तक कोई भी वैज्ञानिक रूप से यह पता नहीं लगा पाया है कि जमीन के भीतर से आने वाला यह जल आखिर कहां से आ रहा है। पवन पंचोली का परिवार बीते तीन दशकों से अधिक समय से इस स्थल की सेवा में लगा है। उनके नानाजी से शुरू हुई यह परंपरा अब उनकी तीसरी पीढ़ी तक पहुंच चुकी है, और स्वयं पवन पिछले 25 वर्षों से यहां के प्रबंधन और साफ-सफाई में सक्रिय हैं।

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धार्मिक और सामाजिक महत्व

प्राचीन काल में, जब इस क्षेत्र में आधुनिक पानी की आपूर्ति प्रणालियां नहीं थीं, तब यह कुंड ही स्थानीय लोगों की जीवन रेखा हुआ करता था। सामुदायिक आयोजनों, धार्मिक अनुष्ठानों और भोज के दौरान भोजन पकाने के लिए इसी कुंड के निर्मल जल का उपयोग किया जाता था। लोगों के लिए यह सिर्फ एक जल स्रोत नहीं, बल्कि श्रद्धा का एक पवित्र स्थान रहा है।

स्वास्थ्य और चर्म रोगों में चमत्कारी लाभ

इस कुंड के जल को लेकर एक बड़ी लोक मान्यता यह है कि इसमें विशेष औषधीय गुण विद्यमान हैं। स्थानीय निवासी और श्रद्धालु मानते हैं कि दाद, खाज, खुजली और अन्य जटिल चर्म रोगों से पीड़ित यदि इस पानी से स्नान करें, तो उन्हें काफी राहत मिलती है। यही कारण है कि दूर-दराज के क्षेत्रों से भी लोग यहां खिंचे चले आते हैं और आस्था के साथ स्नान करते हैं। कई भक्त तो इस जल को अपने साथ बोतलों में भरकर ले जाना भी पसंद करते हैं ताकि वे घर पर भी इसका उपयोग कर सकें।

मंदिर की पवित्र परंपराएं

कुंड का जल मंदिर के देवी-देवताओं की सेवा में भी विशेष रूप से प्रयोग किया जाता है। भगवान के विग्रहों का पंचस्नान और उनका दैनिक अभिषेक इसी पवित्र जल से संपन्न होता है। कुंड की बनावट कुछ इस प्रकार है कि पानी लगातार प्रवाह में रहता है, जिससे यह कभी स्थिर नहीं होता। यह जल एक गोमुखी के माध्यम से निरंतर प्रवाहित होकर सीधे चंबल नदी में विलीन हो जाता है। श्रद्धालु अक्सर गोमुखी से गिरती पानी की धारा के नीचे बैठकर श्रद्धापूर्वक स्नान करते हैं।

साफ-सफाई और संरक्षण

इस कुंड की स्वच्छता बनाए रखने के लिए श्रद्धालुओं का एक समर्पित समूह काम करता है। स्थानीय भक्त हर सुबह और शाम यहां आकर नियमित सफाई करते हैं। कुंड के पानी के निरंतर बहाव के कारण किसी भी प्रकार की गंदगी जमा नहीं हो पाती और वह स्वतः बहकर नदी की ओर चली जाती है। जल की इस निरंतर गतिशीलता के कारण, इस कुंड का पानी हमेशा पारदर्शी और स्वच्छ बना रहता है, जो आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए एक आकर्षण का केंद्र बना हुआ है।

सवाल-जवाब

कोटा के इस कुंड की सबसे बड़ी विशेषता क्या है?
इस कुंड की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसका पानी मौसम के विपरीत काम करता है, यानी सर्दियों में गर्म और गर्मियों में ठंडा रहता है।
क्या इस कुंड का पानी वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित है?
कुंड के पानी के स्रोत या तापमान बदलने के पीछे कोई स्पष्ट वैज्ञानिक प्रमाण अब तक सामने नहीं आया है।
लोग इस कुंड पर क्यों आते हैं?
लोग इस पानी को पवित्र मानते हैं और इसे चर्म रोगों के उपचार के लिए लाभकारी मानकर स्नान करने आते हैं।
पानी की सफाई कैसे सुनिश्चित की जाती है?
पानी के निरंतर बहाव के कारण गंदगी जमा नहीं होती और स्थानीय श्रद्धालु नियमित रूप से इसकी सफाई करते हैं।
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