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उत्तराखंड का यह खूबसूरत ताल: मानसून में दिखता है स्वर्ग सा नजारा, सर्दियों में पानी पर जम जाती है हरी चादरयात्रा
7 सित॰ 2026, 11:34 pm (47 दिन पहले)· 4

उत्तराखंड का यह खूबसूरत ताल: मानसून में दिखता है स्वर्ग सा नजारा, सर्दियों में पानी पर जम जाती है हरी चादर

नैनीताल के पास स्थित सरिताताल अपनी प्राकृतिक सुंदरता, मानसून के मनमोहक नजारों और सर्दियों में पानी पर जमने वाली हरी शैवाल की परत के लिए पर्यटकों के बीच काफी प्रसिद्ध है।

उत्तराखंड की हसीन वादियों में कई ऐसे पर्यटन केंद्र मौजूद हैं जो पर्यटकों को शहरी कोलाहल से दूर प्रकृति के करीब होने का अहसास कराते हैं। ऐसा ही एक अद्भुत और शांत डेस्टिनेशन सरिताताल है जो अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। नैनीताल और कालाढूंगी मार्ग पर कैमल्स बैक पहाड़ी के ठीक नीचे स्थित यह खूबसूरत ताल चारों तरफ से विशाल पहाड़ों और घने पेड़ों से घिरा हुआ है। मानसून के मौसम में यहां की वादियां इतनी मनमोहक हो जाती हैं कि दूर-दराज से आने वाले मुसाफिरों का मन मोह लेती हैं, जब बादलों की चादर पहाड़ों को ढक लेती है और हर तरफ हरियाली बिखर जाती है।

मानसून में निखर जाता है प्राकृतिक सौंदर्य

सरिताताल की असली छटा बरसात के दिनों में देखने को मिलती है जब आसपास के पहाड़ी इलाके पूरी तरह से हरे-भरे हो जाते हैं। बारिश होने के बाद यहां की वादियां और अधिक जीवंत हो जाती हैं और आसमान में छाए बादल इस जगह को किसी जन्नत जैसा रूप दे देते हैं। ताल का शांत और स्थिर पानी पर्यटकों को मानसिक शांति प्रदान करता है यही कारण है कि नैनीताल घूमने आने वाले लोग इस जगह की तरफ खींचे चले आते हैं।

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सर्दियों में पानी का अनोखा रंग और बदलाव

यह ताल सिर्फ अपनी सामान्य सुंदरता तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके पानी में होने वाले मौसमी बदलाव भी इसे बेहद खास बनाते हैं। सर्दियों के मौसम में इस पानी के भीतर गाद और एल्गी यानी शैवाल बहुत तेजी से पनपने लगते हैं। इसकी वजह से तालाब के पानी की सतह पर हरे रंग की एक मोटी परत सी दिखने लगती है और कई बार पानी से हल्की दुर्गंध भी आने लगती है। यही अनोखा प्राकृतिक चक्र इस ताल को अन्य झीलों से बिल्कुल अलग खड़ा करता है।

वनस्पति विज्ञान के जानकारों की राय

नैनीताल के डीएसबी कॉलेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. ललित तिवारी बताते हैं कि सरिताताल के अंदर ‘कारा’ नाम की एल्गी बहुत तेजी से फैलती है। इस विशेष वनस्पति को स्टोनवॉर्ट या मस्कग्रास के नाम से भी जाना जाता है। यह पानी के भीतर कैल्शियम कार्बोनेट की एक परत का निर्माण करती है जिसकी वजह से ताल के पानी की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ता है। जब इस शैवाल की मात्रा बहुत अधिक हो जाती है तो तालाब ऊपर से पूरी तरह हरा नजर आने लगता है।

पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ता है असर

तालाब के पानी में इस तरह एल्गी का अत्यधिक रूप से फैल जाना केवल बाहरी रूप को ही नहीं बदलता बल्कि इसका सीधा प्रभाव जलीय पारिस्थितिकी तंत्र पर भी पड़ता है। जब पानी में शैवाल की मात्रा बढ़ने लगती है तब घुलित ऑक्सीजन का स्तर कम होने का जोखिम पैदा हो जाता है। इससे पानी के भीतर रहने वाले जलीय जीवों के जीवन पर संकट मंडराने का खतरा बना रहता है। इसके अलावा जब यह एल्गी सूख जाती है तब कीचड़ का रूप ले लेती है जिससे तालाब का पूरा प्राकृतिक संतुलन प्रभावित होता है।

प्रशासनिक सफाई और गर्मियों का रूप

सरिताताल में नजर आने वाली यह हरी चादर या एल्गी की स्थिति हमेशा वैसी नहीं रहती है। समय-समय पर स्थानीय प्रशासन की देखरेख में इस ताल की विधिवत सफाई कराई जाती है। सफाई अभियान के दौरान पानी के भीतर जमा गाद और अतिरिक्त शैवाल को बाहर निकाला जाता है जिसके बाद इस ताल का पुराना स्वरूप फिर से लौट आता है। गर्मियों के मौसम में और मुख्य पर्यटन सीजन के दौरान यह ताल बेहद स्वच्छ और आकर्षक रूप में दिखाई देता है।

प्राकृतिक जलस्रोत और झरना

सरिताताल की विशेषता इसका प्राकृतिक जलस्रोत भी है जो इसे लगातार जीवंत बनाए रखता है। यह ताल मुख्य रूप से कैमल्स बैक पहाड़ी से निकलने वाले प्राकृतिक झरनों और जलस्रोतों के पानी से भरता है। पहाड़ों की ऊंचाइयों से आने वाला यह ठंडा और स्वच्छ पानी इस जगह के सौंदर्य में चार चांद लगा देता है। ताल के बिल्कुल करीब नीचे की तरफ एक छोटा सा झरना भी बहता है जहां गिरते पानी की आवाज और आसपास का हरा-भरा माहौल पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

प्रकृति प्रेमियों के लिए यह स्थान किसी अनमोल खजाने से कम नहीं है क्योंकि यहां उन्हें एकांत और प्राकृतिक शुद्धता का अहसास होता है।

रोमांचक गतिविधियां और एडवेंचर

यह ताल केवल शांत नजारों का आनंद लेने की जगह नहीं है बल्कि यहां आने वाले सैलानी कई तरह की एडवेंचर एक्टिविटीज का लुत्फ भी उठा सकते हैं। यहां आने वाले लोगों के बीच जिप लाइन, वाटर जॉर्बिंग और पैडल बोटिंग जैसी गतिविधियां बेहद लोकप्रिय हैं जो रोमांच प्रेमियों को आकर्षित करती हैं। अगर कोई सैलानी जिप लाइन का आनंद लेना चाहता है तो इसके लिए उसे करीब 600 रुपये प्रति व्यक्ति भुगतान करना होता है। इसके अलावा बच्चों के लिए वाटर जॉर्बिंग की फीस करीब 150 रुपये और बड़ों के लिए लगभग 200 रुपये तय की गई है।

पैडल बोटिंग और परिवार के साथ समय

सरिताताल के शांत पानी में पैडल बोटिंग करने का अपना एक अलग ही आनंद है जिसके लिए सैलानियों को करीब 300 रुपये चुकाने पड़ते हैं। पानी की खामोशी, पहाड़ों की हरियाली और बादलों से ढका हुआ आसमान मिलकर इस जगह को अद्भुत बना देते हैं। यही वजह है कि जो लोग भी नैनीताल और कालाढूंगी मार्ग से यात्रा करते हैं वे यहां कुछ पल ठहरना अपनी यात्रा का अहम हिस्सा मानते हैं। परिवार और दोस्तों के साथ यहां बिताए गए पल हर किसी के लिए हमेशा के लिए यादगार बन जाते हैं।

सवाल-जवाब

सरिताताल कहां स्थित है?
सरिताताल नैनीताल-कालाढूंगी हाईवे पर कैमल्स बैक पहाड़ी की तलहटी में स्थित है।
सर्दियों में सरिताताल के पानी पर क्या बदलाव आता है?
सर्दियों में गाद और एल्गी यानी शैवाल तेजी से बढ़ने के कारण पानी की सतह पर हरे रंग की परत दिखाई देती है।
सरिताताल में कौन सी एल्गी फैलती है?
डॉ. ललित तिवारी के अनुसार सरिताताल में ‘कारा’ नाम की एल्गी तेजी से फैलती है जिसे स्टोनवॉर्ट भी कहते हैं।
सरिताताल में जिप लाइन का किराया कितना है?
सरिताताल में जिप लाइन का किराया करीब 600 रुपये प्रति व्यक्ति है।
सरिताताल में वाटर जॉर्बिंग की फीस कितनी है?
वाटर जॉर्बिंग बच्चों के लिए करीब 150 रुपये और बड़ों के लिए 200 रुपये में उपलब्ध है।
सरिताताल में पैडल बोटिंग की फीस क्या है?
सरिताताल में पैडल बोटिंग का आनंद लेने के लिए करीब 300 रुपये फीस है।
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