अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट कस्बे में प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट के विरोध के दौरान भड़की हिंसा के बाद राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों से संवाद की दिशा में कदम बढ़ाया है। मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने इस बड़ी जलविद्युत परियोजना का विरोध कर रहे विभिन्न संगठनों और स्थानीय जन प्रतिनिधियों से अपील की है कि वे टकराव का रास्ता छोड़कर बातचीत की मेज पर आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह के विवाद या आशंकाओं का स्थायी समाधान केवल आपसी चर्चा के जरिए ही संभव है।
बंद के दौरान भड़की अशांति और संपत्तियों का नुकसान
प्रस्तावित 11,200 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के खिलाफ आहूत 12 घंटे के बंद के दौरान शुक्रवार को पासीघाट में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा बलों ने जब लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले छोड़े, तो आक्रोशित भीड़ ने एनएचपीसी के कार्यालय में आग लगा दी। इस पुलिस कार्रवाई के दौरान महिलाओं और विद्यार्थियों सहित कई आंदोलनकारी घायल भी हुए।
उपद्रव के दौरान सरकारी दफ्तरों के साथ-साथ निजी संपत्तियों को भी भारी क्षति पहुंचाई गई। प्रदर्शनकारियों ने पासीघाट पुलिस थाने, आदि बाने केबांग परिसर और एनएचपीसी दफ्तर को निशाना बनाया। इसके अलावा स्थानीय विधायक ओनी पान्यांग, विधायक निनॉन्ग एरिंग और राज्य भाजपा अध्यक्ष कालिंग मोयोंग के आवासों में भी तोड़फोड़ की गई, जहां से लूटपाट और चोरी की घटनाएं भी सामने आईं। तनाव बढ़ने पर पुलिस के दो वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने की लोकतांत्रिक मर्यादा बनाए रखने की अपील
मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दिनभर सियांग और अपर सियांग जिलों के साथ पासीघाट में बंद सामान्य रूप से शांतिपूर्ण रहा था, लेकिन बंद समाप्त होने के बाद सामने आई हिंसा बेहद दुखद है। उन्होंने कहा कि नागरिकों को शांतिपूर्ण तरीके से विरोध करने का पूरा संवैधानिक अधिकार है, लेकिन यह विरोध कानून के दायरे में ही होना चाहिए। विरोध प्रदर्शनों के दौरान संपत्तियों को नष्ट करना और सार्वजनिक कानून व्यवस्था को संकट में डालना कतई स्वीकार्य नहीं है।
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार परियोजना के संभावित फायदों, उसके संभावित प्रतिकूल प्रभावों और स्थानीय निवासियों की शंकाओं पर खुलकर चर्चा करने के लिए पूरी तरह तैयार है। सरकार का उद्देश्य सभी पक्षों को विश्वास में लेकर आगे बढ़ना है, ताकि विकास और जनहित के बीच सही संतुलन बनाया जा सके।
बातचीत के लिए किसी भी स्थान पर जाने की पेशकश
मुख्यमंत्री ने सियांग क्षेत्र के सभी हितधारकों को खुला निमंत्रण दिया कि वे अपनी सुविधानुसार ईटानगर, पासीघाट या अपनी पसंद के किसी भी अन्य स्थान पर बैठक तय कर सकते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वे संबंधित सरकारी विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आंदोलनकारियों द्वारा चुने गए स्थान पर पहुंचने के लिए भी तैयार हैं, ताकि परियोजना से जुड़े हर तकनीकी और सामाजिक पहलू पर विस्तार से सफाई दी जा सके।
उन्होंने कहा कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए आम जनता की सहमति अत्यंत आवश्यक है। इसलिए सभी संबंधित संगठनों को गोलमेज बैठकों में शामिल होना चाहिए, जिससे भ्रम और आशंकाएं दूर हो सकें। मतभेदों को लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के तहत सुलझाना ही समाज के हित में है, न कि ऐसे कदम उठाना जिससे सार्वजनिक सुरक्षा और कानून व्यवस्था पर आंच आए।
























