सर्दियों का मौसम दस्तक देते ही पशुपालकों को अपने मवेशियों, विशेषकर बकरियों की सेहत को लेकर अधिक सतर्क रहने की आवश्यकता होती है। मौसम के मिजाज में अचानक बदलाव और उनकी देखभाल में थोड़ी सी भी चूक सीधे तौर पर उनकी सेहत पर असर डाल सकती है। इस मौसम में नर बकरों में एन्यूरिया यानी पेशाब रुकने की दिक्कत बहुत आम हो जाती है, जिससे पशु తీవ్ర बेचैनी और पेट दर्द से जूझने लगता है। इस गंभीर विषय पर बोकारो स्थित चास मॉडल पशु चिकित्सालय के वरीय पशु चिकित्सक डॉ. अजीत शरण ने एन्यूरिया के प्रमुख लक्षणों, इसके पीछे के कारणों और बचाव के तरीकों पर विस्तार से रोशनी डाली है।
एन्यूरिया के मुख्य लक्षण और पहचान
डॉ. अजीत शरण का कहना है कि जब किसी बकरे को पेशाब रुकने की तकलीफ होती है, तो उसका व्यवहार काफी बेचैन हो जाता है। वह लगातार उठता और बैठता रहता है तथा पेशाब करने के लिए अत्यधिक जोर लगाता हुआ दिखाई देता है। इसके अलावा, पेट में मरोड़ या दर्द होना, अपने पिछले पैरों को बार-बार फैलाना, खड़े होने के दौरान अजीब या असहज मुद्रा अपनाना और दाना-चारा कम कर देना इसके अन्य बड़े संकेत हैं। यदि स्थिति अधिक बिगड़ जाए, तो बकरे का पेशाब आना बिल्कुल बंद हो सकता है। इस परेशानी की मुख्य वजह अक्सर पेशाब की नली में पथरी का फंसना होता है, हालांकि इसके कुछ अन्य कारण भी हो सकते हैं जिनकी सही और सटीक पुष्टि केवल किसी योग्य पशु चिकित्सक की शारीरिक जांच के बाद ही संभव है।
सर्दियों के मौसम में क्यों बढ़ जाता है खतरा
डॉ. अजीत शरण के मुताबिक, सर्दियों के दिनों में पशुओं के बाड़े और उनके रहने के स्थान पर विशेष गौर करना बेहद जरूरी हो जाता है। अत्यधिक ठंडी और नमी से भरी जमीन पर लंबे समय तक लेटे रहने से बकरों को भारी असहजता का सामना करना पड़ता है। जब बकरे का यूरिनल हिस्सा ठंडी और सीलन भरी जमीन के सीधे संपर्क में आता है, तो तापमान के प्रभाव यानी टेंपरेचर इफेक्ट के कारण उनका यूरेथ्रा संक्रमित हो जाता है। इसी संक्रमण के चलते उन्हें पेशाब करने में भारी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।
लक्षण नजर आते ही तुरंत लें चिकित्सीय सहायता
यदि किसी पशुपालक को अपने बकरे में पेशाब करने में रुकावट या तकलीफ दिखाई दे, या फिर वह लगातार कोशिश करने के बावजूद पेशाब करने में असमर्थ हो, तो बिना किसी देरी के नजदीकी पशु चिकित्सक के पास जाना चाहिए। पेशाब का पूरी तरह से बंद हो जाना एक आपातकालीन और गंभीर स्थिति का रूप ले सकता है, जिसमें फौरन इलाज की दरकार होती है। पशुपालकों को अपनी तरफ से बिना किसी पेशेवर सलाह के घरेलू नुस्खे या बाजारू दवाइयां आजमाने से बचना चाहिए। हालांकि, राहत के तौर पर पशुपालक चाहे तो बकरे के पेट के निचले हिस्से पर गर्म पानी से सिकाई कर सकते हैं, लेकिन इस प्रक्रिया को अपनाने से पहले भी विशेषज्ञ की सलाह लेना अनिवार्य है ताकि इलाज में किसी प्रकार की कोताही या देरी न हो।
सर्दियों के दौरान इस तरह रखें बकरों का ध्यान
ठंड के इस मौसम में बकरों के रहने के स्थान का फर्श हमेशा सूखा, साफ और आरामदायक होना चाहिए। फर्श की ठंडक से बचाने के लिए आवश्यकता के अनुसार जूट के पुराने बोरों या अन्य सुरक्षित व गर्म बिछावन का उपयोग किया जा सकता है। बाड़े की बनावट ऐसी होनी चाहिए कि बकरों को सीधी और तीखी ठंडी हवाओं से बचाया जा सके, साथ ही इस बात का भी पूरा ख्याल रखना चाहिए कि बाड़े के भीतर हवा का पर्याप्त आवागमन यानी वेंटिलेशन बना रहे।
इसके अतिरिक्त, पशुओं को तापमान में होने वाले अचानक उतार-चढ़ाव से महफूज रखना चाहिए और उन्हें हमेशा पीने के लिए साफ-सुथरा तथा ताजा पानी मुहैया कराना चाहिए। बकरों के खानपान के तौर-तरीकों और उनकी साफ-सफाई पर पैनी नजर रखना आवश्यक है। यदि किसी भी बकरे में पेशाब करने में बाधा, अत्यधिक बेचैनी या पेट दर्द जैसे शुरुआती लक्षण भी दिखाई दें, तो तुरंत पशु चिकित्सक से संपर्क साधना चाहिए ताकि समय रहते उसका सही उपचार किया जा सके।
























