पहाड़ों की रानी नैनीताल की खूबसूरती केवल नैनी झील और यहां की ऊंची चोटियों तक सीमित नहीं है, बल्कि इस सरोवर नगरी की ऐतिहासिक इमारतों में राजभवन का एक बेहद महत्वपूर्ण स्थान है। चीड़ और देवदार के घने जंगलों से घिरा यह परिसर पर्यटकों को इतिहास, वास्तुकला और प्राकृतिक सुंदरता का एक साथ अहसास कराता है। वर्तमान में यह उत्तराखंड के राज्यपाल का आधिकारिक निवास है। शहर की आपाधापी से दूर बना यह राजभवन शांत वातावरण में सुकून के पल बिताने और फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए एक बेहतरीन ठिकाना माना जाता है।
गौथिक शैली और विक्टोरियन स्थापत्य कला की अनोखी मिसाल
नैनीताल के राजभवन की सबसे बड़ी खासियत इसकी भव्य विक्टोरियन गौथिक स्थापत्य शैली है। पत्थरों से तराशी गई मजबूत दीवारें, ऊंची छतें, नुकीली मीनारें और पारंपरिक झरोखे इस इमारत की ऐतिहासिक पहचान हैं। इस भवन को अंग्रेजी के 'E' आकार में डिजाइन किया गया है, जिसके दो प्रमुख ब्लॉक इसके पूरे ढांचे को विशिष्टता प्रदान करते हैं। राजभवन की नींव 27 अप्रैल 1897 को रखी गई थी और लगभग तीन वर्षों के निर्माण कार्य के बाद मार्च 1900 में यह बनकर तैयार हुआ था। इस भव्य भवन का डिजाइन प्रसिद्ध ब्रिटिश आर्किटेक्ट फ्रेडरिक विलियम स्टीवन ने तैयार किया था। फ्रेडरिक विलियम स्टीवन वही वास्तुकार हैं जिन्हें मुंबई के विख्यात विक्टोरिया टर्मिनल, जिसे अब छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस के नाम से जाना जाता है, के निर्माण का श्रेय भी दिया जाता है। विशाल राजभवन परिसर के भवनों में कुल 113 कमरे मौजूद हैं, जो ब्रिटिश कालीन निर्माण शैली को दर्शाते हैं।
220 एकड़ का विशाल हरित परिसर और 18 होल का ऐतिहासिक गोल्फ कोर्स
राजभवन का पूरा परिसर लगभग 220 एकड़ के बड़े भूभाग में फैला हुआ है। चारों तरफ मौजूद देवदार और चीड़ के हरे-भरे पेड़ इस जगह के प्राकृतिक वातावरण को और भी ज्यादा मनमोहक बना देते हैं। यहां आने वाले पर्यटकों को हरी-भरी वादियों के बीच सुकून का अनुभव होता है। इस परिसर की एक और बड़ी विशेषता यहां मौजूद 18 होल वाला गोल्फ कोर्स है। लगभग 45 एकड़ क्षेत्र में विस्तृत यह गोल्फ मैदान देश के सबसे पुराने और खूबसूरत गोल्फ कोर्स में गिना जाता है। यहां प्रतिवर्ष गवर्नर्स गोल्फ कप प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इसके अलावा वर्ष 2015 से विद्यार्थियों के लिए भी विशेष गोल्फ टूर्नामेंट की शुरुआत की गई थी, जिससे यह स्थान खेल प्रेमियों के बीच भी अपनी खास पहचान रखता है।
1880 के भूस्खलन से लेकर शेरवुड कॉलेज की जमीन तक का सफर
राजभवन के निर्माण का इतिहास काफी दिलचस्प और उथल-पुथल भरा रहा है। इतिहासकार प्रोफेसर अजय रावत के अध्ययनों के अनुसार, नैनीताल में गवर्नरों के लिए सबसे पहले वर्ष 1864 में स्टोनले परिसर में किराए पर आवास की व्यवस्था की गई थी। इसके बाद वर्ष 1865 में सर जॉर्ज कूपर ने सेंट लू क्षेत्र के निकट मालडन हाउस में राजभवन का निर्माण कराया। हालांकि वर्ष 1880 में आए एक भीषण भूस्खलन के कारण मालडन हाउस बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, जिसके बाद ब्रिटिश प्रशासन ने सुरक्षित स्थान की तलाश शुरू की।
नई जगह की खोज के दौरान वर्तमान स्थान का चयन किया गया, जहां उस समय शेरवुड कॉलेज स्थित था। राजभवन बनाने के लिए शेरवुड कॉलेज को शहर में दूसरी जगह स्थानांतरित कर दिया गया। इस परिसर के ठीक पीछे का क्षेत्र ग्वालीखेत कहलाता था, जहां स्थानीय चरवाहे अपने मवेशी चराने आया करते थे। वर्तमान राजभवन के निर्माण के लिए आसपास के कुछ संस्थानों और भूमि का अधिग्रहण भी किया गया था। ब्रिटिश दौर में गवर्नरों के ग्रीष्मकालीन निवास के रूप में इस्तेमाल होने वाली यह इमारत आज नैनीताल के बदलते ऐतिहासिक स्वरूप की गवाही देती है।
पर्यटकों के लिए प्रवेश प्रक्रिया, गाइड सुविधा और टिकट दर
ऐतिहासिक और प्रशासनिक महत्व रखने के बावजूद यह राजभवन पर्यटकों के भ्रमण के लिए भी खुला रहता है। परिसर में प्रवेश के लिए प्रति व्यक्ति मात्र 50 रुपये का टिकट निर्धारित किया गया है। यहां आने वाले पर्यटकों को गाइड के साथ पूरे परिसर का भ्रमण कराया जाता है। प्रशिक्षित गाइड पर्यटकों को राजभवन के इतिहास, इसकी अनोखी स्थापत्य कला और इससे जुड़ी महत्वपूर्ण घटनाओं की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं। 19वीं सदी की इस ऐतिहासिक संरचना को देखने जाने से पहले पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे प्रवेश के समय, टिकट व्यवस्था और भ्रमण से जुड़े ताजा नियमों की पुष्टि अवश्य कर लें।



















