राजस्थान के भरतपुर जिले में मौजूद केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान को भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सबसे प्रमुख पक्षी अभयारण्यों में गिना जाता है। कई वर्ग किलोमीटर के विस्तृत भूभाग में फैले इस राष्ट्रीय पार्क में पारिस्थितिकी की अद्भुत विविधता देखने को मिलती है, जिसमें जलमग्न वेटलैंड्स, विशाल घास के मैदान, घनी झाड़ियां और प्राकृतिक जंगल शामिल हैं। मौसम के बदलाव के साथ यहां बड़ी संख्या में देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ सुदूर देशों से आने वाले प्रवासी पक्षी भी डेरा डालते हैं। वन्यजीव प्रेमियों और पर्यटकों की सुविधा के लिए उद्यान परिसर में पैदल भ्रमण के रास्तों के अलावा साइकिल चलाने और स्थानीय साइकिल रिक्शा से घूमने की बेहतरीन व्यवस्था उपलब्ध कराई गई है। यदि आप इस खूबसूरत पार्क की यात्रा की योजना बना रहे हैं, तो मुख्य प्रवेश द्वार से आगे बढ़ते ही सबसे पहले सलीम अली विजिटर सेंटर तक पहुंच सकते हैं। यह सूचना केंद्र पर्यटकों को उद्यान के समृद्ध इतिहास, यहां की अनूठी वनस्पति और विविध पक्षी प्रजातियों के संबंध में विस्तृत और ज्ञानवर्धक जानकारी प्रदान करता है।
सपन मोरी और ऐतिहासिक केवलादेव मंदिर का मार्ग
विजिटर सेंटर से आगे बढ़ने पर पार्क के अलग-अलग कोनों और हिस्सों की तरफ जाने वाले कई मुख्य रास्ते निकलते हैं। इन्हीं रास्तों में सपन मोरी एक बेहद प्रमुख और लोकप्रिय पड़ाव माना जाता है। चूंकि यह क्षेत्र मुख्य रूप से जलाशयों और दलदली इलाकों के निकट स्थित है, इसलिए यह स्थान पक्षी प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बना रहता है। यहां पानी में तैरने वाले जलपक्षियों के साथ-साथ अन्य दुर्लभ प्रजातियों के पक्षियों को भी आसानी से निहारा जा सकता है। सपन मोरी के रास्ते पर आगे बढ़ने के बाद एक मार्ग प्रसिद्ध केवलादेव मंदिर की दिशा में जाता है। पार्क के बिल्कुल मध्य भाग में स्थापित यह प्राचीन शिव मंदिर पूरे राष्ट्रीय उद्यान की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का मुख्य आधार है।
पाइथन प्वाइंट और प्रमुख जलाशयों की प्राकृतिक विविधता
केवलादेव मंदिर के आसपास का पूरा इलाका ऊंचे-हरे पेड़ों और घनी वनस्पति से आच्छादित है, जहां पक्षियों की चहचहाहट पर्यटकों को एक शांत और सुरम्य वातावरण का अहसास कराती है। इस परिसर के आसपास कई छोटे-बड़े जलाशय और ऐसे पेड़ मौजूद हैं जहां पक्षी अपना बसेरा बनाते हैं। वन्यजीवों और विशेषकर सरीसृप प्राणियों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए पाइथन प्वाइंट सबसे पसंदीदा जगह है। सपन मोरी से आगे जाने वाले प्रमुख ट्रेल्स पर स्थित इस प्वाइंट पर भारतीय अजगरों को धूप सेकते हुए देखा जा सकता है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से पर्यटकों को इन जीवों से उचित दूरी बनाए रखने का निर्देश दिया जाता है। इसके अलावा पार्क के मानसरोवर और हंसरोवर नामक वेटलैंड क्षेत्रों में भी जलपक्षियों का सुंदर नजारा दिखाई देता है। पानी की उपलब्धता के आधार पर यहां बगुले, सारस, पेंटेड स्टॉर्क, स्पूनबिल और कई अन्य जलीय पक्षी विचरण करते हुए नजर आते हैं।
घास के मैदान और गाइड के साथ जंगल सफारी का अनुभव
वेटलैंड इलाकों के अतिरिक्त पार्क के कुछ हिस्से सूखे जंगलों और खुले घास के मैदानों के रूप में फैले हुए हैं। इन इलाकों में भ्रमण के दौरान पर्यटकों को नीलगाय, सियार और अन्य जंगली जानवर भी घूमते हुए दिखाई दे सकते हैं। केवलादेव उद्यान के विशाल दायरे और विभिन्न ट्रेल्स को सही तरीके से समझने के लिए स्थानीय प्रशिक्षित रिक्शा चालकों या आधिकारिक गाइडों की सेवाएं लेना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होता है। इन स्थानीय गाइडों को दैनिक आधार पर पक्षियों की मौजूदगी वाले स्थानों और विशिष्ट रास्तों की सटीक जानकारी होती है। सपन मोरी, केवलादेव मंदिर, पाइथन प्वाइंट और मुख्य वेटलैंड्स को कवर करके पर्यटक उद्यान की असीम प्राकृतिक सुंदरता का पूरा आनंद उठा सकते हैं।


















