मौसम के बदलते ही बुखार, खांसी, गले में खराश, सिरदर्द और बदन दर्द जैसी समस्याएं आम तौर पर देखने को मिलती हैं। अधिकांश लोग इन शुरुआती लक्षणों को साधारण मौसम का बदलाव या आम वायरल संक्रमण मानकर अनदेखा कर देते हैं। हालांकि, जब ये परेशानियां लगातार बनी रहें या धीरे-धीरे गंभीर होने लगें, तो सतर्क होना बेहद आवश्यक हो जाता है। इस तरह के लक्षण स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के संकेत हो सकते हैं। मानसून के इस मौसम में दिल्ली में स्वाइन फ्लू के मामलों में बड़ी बढ़ोतरी देखी गई है, जहाँ कुल आंकड़े 3200 के पार पहुँच चुके हैं। ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सही सावधानियाँ बरतना और समय पर डॉक्टर की सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
स्वाइन फ्लू और सामान्य सर्दी के बीच अंतर कैसे समझें?
सामान्य सर्दी-जुकाम और स्वाइन फ्लू के कई लक्षण एक-दूसरे से काफी मिलते-जुलते हैं, जिसके कारण शुरुआती चरण में पहचान करना मुश्किल होता है। इसके बावजूद दोनों के बीच कुछ स्पष्ट अंतर मौजूद हैं। फ्लू के लक्षण अक्सर अचानक शुरू होते हैं और बहुत तेजी से तीव्र रूप धारण कर लेते हैं। इसमें मरीज को अचानक तेज बुखार आना, पूरे शरीर में तेज दर्द, बहुत ज्यादा थकान महसूस होना और लगातार सूखी या बलगम वाली खांसी होना मुख्य रूप से शामिल है। इसके विपरीत सामान्य सर्दी धीरे-धीरे पनपती है और उसमें बुखार या बदन दर्द इतना गंभीर नहीं होता। फिर भी, केवल शारीरिक लक्षणों के आधार पर H1N1 या अन्य श्वसन संक्रमण की पुष्टि करना संभव नहीं होता। इसके लिए डॉक्टरों द्वारा सुझाई गई लैब जांच ही सटीक रिपोर्ट देती है।
प्रारंभिक देखभाल और हाइड्रेशन के जरूरी उपाय
यदि किसी व्यक्ति में बुखार, खांसी या शरीर में खिंचाव जैसे शुरुआती लक्षण दिखाई देते हैं, तो सबसे पहले पर्याप्त आराम करना चाहिए। बीमारी के दौरान शरीर को ठीक होने के लिए पूर्ण विश्राम की आवश्यकता होती है। कमजोरी महसूस होने पर तुरंत काम पर लौटने या बाहर निकलने की जल्दबाजी बिल्कुल न करें। इसके साथ ही दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी, सूप और अन्य तरल पदार्थों का सेवन जारी रखें। शरीर में पानी की कमी न होने देना रिकवरी प्रक्रिया को तेज करता है और शरीर को डिहाइड्रेशन से सुरक्षित रखता है।
संक्रमण रोकने के लिए स्वच्छता और आइसोलेशन के नियम
फ्लू जैसे लक्षण नजर आने पर स्वयं को दूसरों से अलग रखना संक्रमण के फैलाव को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है। यदि किसी अनिवार्य काम से बाहर जाना पड़े या घर में दूसरों के पास रहना हो, तो मास्क का उपयोग जरूर करें। खांसी या छींक आते समय अपने मुंह और नाक को टिश्यू पेपर से ढकें और इस्तेमाल किए गए टिश्यू को तुरंत ढके हुए कूड़ेदान में फेंक दें। अपने हाथों को दिन में कई बार साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। पानी उपलब्ध न होने पर सैनिटाइजर का प्रयोग करें। यदि घर में बुजुर्ग, छोटे बच्चे या पहले से किसी गंभीर बीमारी से पीड़ित सदस्य मौजूद हैं, तो उनके संपर्क में आने से विशेष परहेज करें।
खुद से दवा लेने और एंटीबायोटिक के इस्तेमाल से बचें
अक्सर देखा जाता है कि लोग बुखार या खांसी होते ही बिना डॉक्टर की सलाह के मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदकर खाने लगते हैं। स्वाइन फ्लू या किसी भी वायरल संक्रमण में बिना डॉक्टरी परामर्श के एंटीबायोटिक या एंटीवायरल दवाएं शुरू करना खतरनाक साबित हो सकता है। हर बुखार फ्लू नहीं होता और हर मरीज के शरीर की जरूरत अलग होती है। डॉक्टर मरीज के लक्षणों और स्वास्थ्य स्थिति का आकलन करके ही सही जांच और सटीक दवाओं का चयन करते हैं। इसलिए अपनी मर्जी से दवाएं लेने के बजाय योग्य चिकित्सक से परामर्श लें।
किन लोगों को स्वाइन फ्लू से ज्यादा खतरा है?
स्वाइन फ्लू का संक्रमण किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, लेकिन कुछ विशेष वर्गों में इसके गंभीर रूप लेने का जोखिम कहीं अधिक होता है। इनमें मुख्य रूप से छोटे बच्चे, बुजुर्ग व्यक्ति, गर्भवती महिलाएं और पहले से किसी पुरानी बीमारी जैसे डायबिटीज, सांस की बीमारी या हृदय रोग से पीड़ित लोग शामिल हैं। कमजोर इम्युनिटी वाले इन हाई-रिस्क ग्रुप के लोगों में फ्लू के लक्षण दिखने पर बिना किसी देरी के तुरंत चिकित्सा सहायता ली जानी चाहिए।
इन आपातकालीन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज
कुछ चेतावनी भरे लक्षण ऐसे होते हैं जिनमें बिना कोई समय गंवाए मरीज को नजदीकी अस्पताल पहुँचाना अनिवार्य हो जाता है। वयस्कों में सांस लेने में तकलीफ होना, सांस फूलना, छाती में लगातार दर्द या दबाव महसूस होना, अत्यधिक कमजोरी, चक्कर आना, भ्रम या असामान्य व्यवहार, बेहोशी और शरीर में पानी की बहुत गंभीर कमी होना बेहद चिंताजनक संकेत हैं। बच्चों के मामले में स्थिति और भी संवेदनशील होती है। यदि बच्चा सांस लेने में परेशानी का सामना कर रहा हो, उसके होंठ या चेहरे का रंग नीला पड़ने लगे, बच्चा बहुत ज्यादा सुस्त हो, पानी या दूध पीने में असमर्थ हो या पेशाब का प्रमाण बहुत कम हो जाए, तो घर पर इंतजार करने के बजाय तुरंत इमरजेंसी मेडिकल हेल्प लेनी चाहिए।



















