जन्माष्टमी के पावन पर्व पर भगवान श्री कृष्ण को झूला झुलाने की परंपरा हर घर में एक अलग ही उल्लास और रौनक लेकर आती है। हालांकि कई बार व्यस्तता के कारण समय बेहद कम होता है और बाजार जाकर सजावट का नया सामान खरीद पाना मुमकिन नहीं हो पाता है। ऐसे में यह सवाल मन में जरूर आता है कि कम समय में कान्हा का झूला कैसे सजाया जाए। अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी भारी खर्च या लंबी मेहनत की बिल्कुल आवश्यकता नहीं होती है। घर में पहले से मौजूद छोटी-छोटी और सामान्य चीजों का इस्तेमाल करके ही लड्डू गोपाल के लिए बेहद सुंदर और मनमोहक झूला तैयार किया जा सकता है। इसके लिए केवल थोड़ी सी रचनात्मकता और लगभग दस मिनट के समय की जरूरत होती है। सबसे खास बात यह है कि इस तरह की गई सजावट देखने में इतनी आकर्षक लगती है कि घर आने वाले मेहमान भी हैरान रह जाएंगे और पूछेंगे कि इसे इतनी जल्दी कैसे तैयार किया गया।
झूले का बेस तैयार करने के आसान उपाय
सजावट की शुरुआत करने के लिए सबसे पहले एक मजबूत छोटी टोकरी, कोई छोटा लकड़ी का बॉक्स या फिर घर में रखा सजावटी डिब्बा लिया जा सकता है। यदि घर में पहले से ही कोई छोटा झूला मौजूद है, तो उसका भी उपयोग किया जा सकता है। झूले के बेस यानी आधार पर सबसे पहले एक साफ कपड़ा बिछाया जाना चाहिए। लाल, पीला, गुलाबी या हरा रंग का कपड़ा कान्हा की सजावट में विशेष रूप से बहुत सुंदर और जीवंत दिखाई देता है। इसके बाद झूले के चारों तरफ गोटा, लेस या फिर घर में पड़ी कोई पुरानी सजावटी रिबन लगानी चाहिए। इसे मजबूती से चिपकाने के लिए डबल साइड टेप का आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। इस छोटी सी तकनीक से झूला कुछ ही मिनटों में बिल्कुल नया, चमकीला और बेहद आकर्षक नजर आने लगता है।
फूलों और मोरपंख से सजाएं झूले का कोना
बेस तैयार होने के बाद अब फूलों से सजावट करने की बारी आती है। यदि घर में ताजे और असली फूल उपलब्ध हों, तो गुलाब, गेंदे या चमेली के फूलों की एक छोटी सी माला झूले के किनारों पर आसानी से लपेटी जा सकती है। अगर ताजे फूल पास में न हों, तो कृत्रिम यानी आर्टिफिशियल फूलों का उपयोग भी किया जा सकता है। बहुत ज्यादा मात्रा में फूल लगाने की कोई आवश्यकता नहीं होती है। झूले के दोनों किनारों पर हल्की और करीने से की गई सजावट ही इसे बेहद खूबसूरत बना देती है। इसके अलावा झूले के पीछे की तरफ एक छोटा सा मोरपंख जरूर लगाना चाहिए। कान्हा की मूर्ति के ठीक पास मोरपंख रखते ही पूरा सेटअप और भी अधिक खास और पारंपरिक दिखने लगता है।
मुकुट, बांसुरी और रोशनी से बढ़ाएं चमक
यदि भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति छोटी है, तो उनके साथ एक नन्हा सा मुकुट, छोटी सी बांसुरी और मोरपंख को व्यवस्थित किया जा सकता है। झूले के ठीक नीचे चारों तरफ कुछ ताजे फूलों की पंखुड़ियों को बिखेर देना चाहिए। यदि संभव हो, तो झूले के आसपास छोटी एलईडी लाइट की लड़ियां भी लगाई जा सकती हैं। हल्की और जगमगाती रोशनी में सजा हुआ यह झूला काफी मनमोहक लगता है। हालांकि सुरक्षा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है, इसलिए यह सुनिश्चित करें कि लाइट या बिजली के तार झूले के बहुत ज्यादा नजदीक न हों, विशेषकर तब जब पास में पारंपरिक दीपक या अगरबत्ती जलाई जा रही हो। सजावट हमेशा सुंदर होने के साथ-साथ सुरक्षित भी होनी चाहिए ताकि किसी प्रकार की अनहोनी न हो।
पूजा की संपूर्णता और अंतिम तैयारी
सारी सजावट पूरी होने के बाद अंत में बाल गोपाल को सजे हुए झूले पर प्रेम के साथ विराजमान किया जाना चाहिए। उनके ठीक पीछे फूलों या सुंदर कपड़े की सहायता से एक छोटी सी बैकड्रॉप तैयार की जा सकती है। झूले के नीचे एक छोटी सी थाली में ताजे फूल, चंदन और पवित्र तुलसी के पत्ते रखकर पूजा की इस पूरी जगह को एक पूर्ण और दिव्य रूप दिया जा सकता है। इस तरह केवल दस मिनट की तैयारी से तैयार किया गया यह झूला आपकी जन्माष्टमी की पूजा में चार चांद लगा देगा और घर का कोना-कोना भक्तिमय हो उठेगा।



















