कांग्रेस नेता सोनिया गांधी की आने वाली संस्मरण पुस्तक को लेकर बने असमंजस की स्थिति अब साफ हो गई है। पहले इस किताब को पेंगुइन रैंडम हाउस द्वारा प्रकाशित किया जाना तय किया गया था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी हार्परकॉलिन्स इंडिया को सौंप दी गई है। सोनिया गांधी के इस संस्मरण का आधिकारिक शीर्षक ‘बिलॉन्गिंग: ए जर्नी ऑफ लव’ रखा गया है। हार्परकॉलिन्स ने शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को इस संबंध में औपचारिक घोषणा कर दी है। सबसे खास बात यह है कि पब्लिशर बदलने के बाद भी पुस्तक के बाजार में आने की समय-सीमा पर कोई असर नहीं पड़ा है। यह किताब पहले से तय कार्यक्रम के मुताबिक ही 10 नवंबर 2026 को पाठकों के हाथों में पहुंचेगी। यानी प्रकाशक भले ही बदल गया हो, लेकिन प्रकाशन की तारीख पूरी तरह से वही पुरानी है। पिछले कुछ दिनों से पब्लिशिंग इंडस्ट्री में इस किताब को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और कयास लगाए जा रहे थे।
विवाद और पेंगुइन का पीछे हटना
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब न्यूयॉर्क स्थित अल्फ्रेड ए. नॉफ, जो कि पेंगुइन रैंडम हाउस का ही एक हिस्सा है, ने 18 अगस्त को सोनिया गांधी की इस पुस्तक के प्रकाशन का एलान किया था। उस शुरुआती घोषणा के दौरान ही 10 नवंबर की तारीख तय कर दी गई थी और यह भी बताया गया था कि इस किताब की पहली प्रिंटिंग में करीब एक लाख कॉपियां छापी जाएंगी। हालांकि, कुछ ही समय बाद पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया ने इस किताब को छापने से अपने कदम पीछे खींच लिए। उस दौरान अंदरखाने से संपादकीय प्राथमिकताओं में बदलाव और सामग्री को लेकर मतभेद जैसी बातें सामने आईं। पेंगुइन रैंडम हाउस इंडिया का अपना पक्ष था कि लेखक द्वारा संपादकीय बदलावों को स्वीकार न किए जाने को ही एकमात्र कारण बताना उचित नहीं होगा। उनका कहना था कि किसी भी किताब के हित में तथ्यात्मक जांच करना और जरूरी सुझाव देना उनकी पेशेवर जिम्मेदारी का हिस्सा है। इसके विपरीत, पब्लिशिंग इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों ने यह दावा किया था कि कुछ संवेदनशील राजनीतिक मुद्दों की सामग्री को लेकर दोनों पक्षों के बीच असहमति पैदा हो गई थी। अब हार्परकॉलिन्स की इस पूरे मामले में एंट्री होने से यह विवाद और इसकी चर्चाएं फिर से सुर्खियों में आ गई हैं।
किताब में क्या होगा खास
हार्परकॉलिन्स इंडिया ने इस किताब को एक बेहद मोहक और दिलचस्प संस्मरण करार दिया है। नए प्रकाशक के मुताबिक इस पुस्तक के पन्नों पर सोनिया गांधी की निजी जिंदगी के साथ-साथ उनके राजनीतिक जीवन के सफर को भी प्रमुखता से जगह मिलेगी। किताब की शुरुआत उनके युद्ध के बाद के इटली के वेनेटो क्षेत्र में बीते बचपन से लेकर भारत की तरफ उनके रुख करने तक की कहानी से होगी। इसके अलावा उस ऐतिहासिक प्रेम कहानी का भी विशेष जिक्र किया जाएगा, जिसने उन्हें खींचकर भारत तक पहुंचाया। इस सफर के बाद उनकी निजी जिंदगी में आए बड़े बदलावों और झेले गए निजी दुखों को भी इस किताब का अहम हिस्सा बनाया गया है।
राजनीतिक हलकों में बढ़ती उत्सुकता
हार्परकॉलिन्स का ऐसा मानना है कि सोनिया गांधी, जिन्हें देश की राजनीति में लंबे समय तक सार्वजनिक मंचों पर बेहद नपा-तुला और कम बोलने वाली नेता के रूप में देखा जाता रहा है, इस संस्मरण के जरिए अपने जीवन के पन्नों को पूरी खुलासे के साथ सामने रखेंगी। इसमें उनके निजी अनुभवों को सीधे तौर पर राजनीतिक घटनाओं और उतार-चढ़ाव के साथ जोड़कर पाठकों के सामने पेश किया जाएगा। यही मुख्य वजह है कि इस पुस्तक को लेकर राजनीतिक गलियारों के साथ-साथ प्रकाशन जगत में भी भारी उत्सुकता और कौतूहल बना हुआ है। अब देखना यह दिलचस्प होगा कि जब सोनिया गांधी की यह कृति पाठकों के सामने आती है, तो वे अपने व्यक्तिगत जीवन और राजनीतिक यात्रा के अध्यायों को किस अनोखे अंदाज में बयां करती हैं।


















