नाक या कान में नई पियर्सिंग करवाने के बाद शुरुआती दिनों में विशेष सतर्कता बरतना बेहद जरूरी होता है। दिखने में यह भले ही एक छोटा सा छेद लगता हो, लेकिन त्वचा और अंदरूनी ऊतकों के नजरिए से यह एक नया और खुला घाव होता है। छिदवाने के फौरन बाद हल्का दर्द महसूस होना, त्वचा में खिंचाव या संवेदनशीलता दिखना और हल्की सूजन आना सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है। अक्सर लोग जानकारी के अभाव में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे राहत मिलने के बजाय समस्या और ज्यादा बढ़ जाती है। कई लोग बार-बार आभूषण को घुमाने लगते हैं, बिना सोचे-समझे नुस्खे आजमाने लगते हैं या फिर दिन में कई बार जरूरत से ज्यादा धोने लगते हैं। ऐसी गलतियों से त्वचा में जलन, तेज खुजली और संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है।
इसके अलावा रोजमर्रा की गतिविधियों के दौरान बालों के उलझने, कपड़े बदलते वक्त खिंचाव आने या सोते समय तकिए से लगातार रगड़ लगने के कारण भी नया घाव छिल सकता है। इसलिए नई पियर्सिंग को केवल अपनी मनपसंद ज्वेलरी फ्लॉन्ट करने तक सीमित नहीं समझना चाहिए, बल्कि उसकी बुनियादी हीलिंग का पूरा ख्याल रखना चाहिए। अगर कुछ जरूरी और व्यावहारिक सावधानियों को अपनी दिनचर्या में शामिल कर लिया जाए, तो पियर्सिंग की जगह बिना किसी जटिलता के सुरक्षित तरीके से ठीक हो सकती है।
सफाई का सही तरीका और अत्यधिक धुलाई से परहेज
घाव को किसी भी तरह के बैक्टीरिया से बचाने के लिए सफाई सबसे पहला कदम है, लेकिन यहां यह समझना जरूरी है कि जरूरत से ज्यादा सफाई करना भी नुकसानदेह साबित हो सकता है। बार-बार धोने से त्वचा की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है और घाव सूखकर फटने लगता है। नई पियर्सिंग को साफ करने के लिए आमतौर पर स्टेराइल सलाइन अथवा संतुलित मात्रा वाले नमक के घोल का ही उपयोग किया जाना चाहिए। जब भी सफाई करने जाएं, तो सबसे पहले अपने हाथों को अच्छी तरह साबुन और पानी से धो लें, ताकि उंगलियों के जरिए कोई नया बैक्टीरिया वहां न पहुंचे। सफाई के दौरान उस हिस्से को जोर से बिल्कुल न रगड़ें। इसके अलावा परफ्यूम, मेकअप, बॉडी क्रीम या किसी भी तरह के तेज खुशबू वाले कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स को पियर्सिंग के सीधे संपर्क में न आने दें। यदि किसी भी उत्पाद के संपर्क में आने के बाद त्वचा पर लाली, खुजली या जलन बढ़ती दिखे, तो उसका इस्तेमाल फौरन बंद कर देना चाहिए।
आभूषण को बार-बार छूने और घुमाने की आदत छोड़ें
पुराने समय में यह धारणा काफी प्रचलित थी कि कान या नाक छिदवाने के बाद बाली या पिन को दिन में कई बार घुमाते रहना चाहिए ताकि वह त्वचा से चिपके नहीं। हालांकि आधुनिक त्वचा विज्ञान के अनुसार यह तरीका पूरी तरह गलत है। नई पियर्सिंग को बार-बार हाथ लगाने या घुमाने से ठीक हो रहे नए ऊतक टूट जाते हैं, जिससे अनावश्यक रगड़ पैदा होती है और हीलिंग की गति धीमी पड़ जाती है। इसलिए बिना किसी ठोस कारण के बाली या नोज पिन को छूने से पूरी तरह बचें। कई बार घाव के आसपास सूखी पपड़ी या परत जम जाती है, जिसे कुछ लोग नाखूनों से खुरचने की कोशिश करते हैं। ऐसा करना सीधे तौर पर संक्रमण को न्योता देना है। सफाई के समय भी आभूषण को जबरदस्ती हिलाने या खींचने से बचना चाहिए।
घरेलू नुस्खों और बिना डॉक्टरी सलाह के तेल लगाने से बचें
कई लोग घाव सुखाने के चक्कर में पियर्सिंग पर हल्दी, नींबू का रस, कच्चा लहसुन, एप्पल साइडर विनेगर, एसेंशियल ऑयल या तरह-तरह के हर्बल लेप लगाने लगते हैं। इस नाजुक दौर में त्वचा बेहद संवेदनशील होती है और ऐसे घरेलू अम्लीय या तीखे पदार्थ उस हिस्से पर गंभीर जलन और छाले पैदा कर सकते हैं। यहां तक कि नारियल तेल जैसी आम चीजों को भी बिना किसी जरूरत के नई पियर्सिंग पर सीधे लगाने से बचना चाहिए, क्योंकि तेल रोमछिद्रों को बंद कर सकता है और गंदगी को चिपका सकता है। यदि पियर्सिंग वाली जगह पर किसी खास मरहम या उत्पाद की जरूरत महसूस हो रही हो, तो मनमाने फैसले लेने के बजाय किसी त्वचा रोग विशेषज्ञ या अनुभवी पियर्सिंग प्रोफेशनल से परामर्श लेना ही सबसे सुरक्षित कदम है।
दबाव और रगड़ से बचाने के आसान उपाय
नई पियर्सिंग वाली त्वचा पर किसी भी बाहरी वस्तु का लगातार घर्षण या दबाव पड़ना परेशानी को कई गुना बढ़ा देता है। कान छिदवाने के बाद शुरुआती दिनों में उस करवट सोने से परहेज करना चाहिए जिस तरफ कान छिदवाया गया हो, ताकि रातभर उस पर सिर का भार न पड़े। अपने तकिए के कवर को हमेशा साफ और धुला हुआ रखें ताकि धूल-मिट्टी या पसीने से बैक्टीरिया न पनपें। जिन लोगों के बाल लंबे हैं, वे बालों को बांधकर रखें ताकि बाल इयररिंग के पेंच या छल्ले में न उलझें। इसके साथ ही बड़े हेडफोन लगाने, टाइट हेलमेट पहनने या कान पर दबाव डालने वाले किसी भी गैजेट का इस्तेमाल करते समय बेहद सतर्क रहें। कपड़े पहनते या उतारते समय सबसे ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि कॉलर या धागे अक्सर नोज पिन और बाली में फंसकर त्वचा को जोर से खींच देते हैं, जिससे ताजा घाव फिर से छिल सकता है।
ज्वेलरी की धातु और एलर्जी की पहचान
पियर्सिंग के तुरंत बाद किस धातु का आभूषण पहना जा रहा है, यह बात त्वचा की सेहत तय करने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है। हर व्यक्ति की त्वचा सभी धातुओं को स्वीकार नहीं कर पाती। कई लोगों को निकेल जैसी आम मिश्रित धातुओं से गंभीर एलर्जी होती है, जिससे त्वचा पर लाल चकत्ते, तेज खुजली और दाने उभर आते हैं। इसलिए शुरुआत में हमेशा ऐसी धातु की ज्वेलरी चुननी चाहिए जो शरीर के अनुकूल हो, शुद्ध हो और जिसकी गुणवत्ता प्रमाणित हो। यह मान लेना भी पूरी तरह गलत है कि सोना या चांदी पहनने से किसी को कोई परेशानी नहीं हो सकती, क्योंकि कुछ संवेदनशील लोगों को इनमें मिली अशुद्धियों से भी रिएक्शन हो सकता है। यदि नया आभूषण पहनने के बाद लगातार असहनीय खुजली, जलन या लालिमा बनी रहे, तो देर किए बिना डॉक्टर या त्वचा विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
गंभीर संक्रमण के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
शुरुआती दौर में हल्की संवेदनशीलता और थोड़ा सा खिंचाव होना स्वाभाविक है, लेकिन यदि दर्द कम होने के बजाय दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा हो, सूजन का दायरा फैल रहा हो, त्वचा छूने पर अत्यधिक गर्म महसूस हो रही हो या छेद से गाढ़ा पीला या हरा स्राव निकलने लगे, तो इसे मामूली मानकर अनदेखा नहीं करना चाहिए। इसके साथ ही अगर शरीर में कंपकंपी या बुखार जैसे लक्षण दिखाई देने लगें, तो यह संक्रमण के फैलने का स्पष्ट संकेत हो सकता है। ऐसी स्थिति में घरेलू उपचारों के भरोसे बैठने के बजाय तुरंत चिकित्सक से मिलकर उचित एंटीबायोटिक या उपचार शुरू करवाना आवश्यक होता है।



















