दिल्ली-एनसीआर के निवासियों और वाहन चालकों को आगामी विंटर सीजन के दौरान वायु प्रदूषण की रोकथाम के लिए कड़े नियमों का सामना करना पड़ेगा। वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग यानी सीएक्यूएम ने विंटर सीजन 2026 के लिए संशोधित ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान को मंजूरी दे दी है। इस नए ढांचे के तहत कुल 48 एक्शन तय किए गए हैं, जिन्हें प्रदूषण की गंभीरता के आधार पर चार अलग-अलग चरणों में बांटा गया है। इस बार की कार्ययोजना में सबसे अहम बदलाव यह है कि कई पाबंदियों को पहले के मुकाबले काफी शुरुआती चरणों में ही सक्रिय कर दिया जाएगा ताकि हवा की गुणवत्ता को ज्यादा बिगड़ने से रोका जा सके।
प्रशासन की इस नई रणनीति में सबसे सख्त प्रावधान वाहनों से निकलने वाले धुएं पर नियंत्रण से जुड़ा है। नई रूपरेखा के तहत फ्यूल स्टेशनों पर निगरानी बेहद कड़ी कर दी जाएगी, ताकि मानकों की अनदेखी करने वाली गाड़ियां सड़कों पर न दौड़ सकें।
पेट्रोल पंपों पर लागू होगी बिना पीयूसी, बिना ईंधन की नीति
नए एक्शन प्लान का सबसे प्रमुख नियम बिना पीयूसी, बिना ईंधन की व्यवस्था है। 1 अक्टूबर 2026 से दिल्ली और पूरे एनसीआर क्षेत्र में वाहनों के लिए वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल यानी पीयूसी सर्टिफिकेट रखना अनिवार्य बना दिया गया है। यदि किसी गाड़ी के पास तय मानकों वाला वैध पीयूसी दस्तावेज नहीं होगा, तो पेट्रोल पंप संचालक उसे पेट्रोल या डीजल देने से सीधा इनकार कर सकते हैं। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वाले या बिना वैध पीयूसी के वाहन चलाने वाले वाहन मालिकों पर 10,000 रुपये का भारी भरकम जुर्माना लगाने का भी कड़ा प्रावधान रखा गया है।
इस कड़े फैसले का मुख्य उद्देश्य वाहन स्वामियों को अपने वाहनों के उत्सर्जन स्तर की नियमित जांच कराने और तय सरकारी मानकों का पालन सुनिश्चित करने के लिए प्रेरित करना है। सर्दियों में गाड़ियों का धुआं हवा को अत्यधिक जहरीला बना देता है, जिसे रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है।
इंटर-स्टेट और इंटर-सिटी बसों के प्रवेश पर शुरुआती चरण से रोक
संशोधित ग्रैप फ्रेमवर्क में कुछ ऐसी पाबंदियां, जो पहले प्रदूषण के अत्यधिक उच्च स्तर पर पहुंचने के बाद प्रभावी होती थीं, अब काफी पहले से लागू की जाएंगी। उदाहरण के तौर पर, कुछ विशेष अंतरराज्यीय और अंतर-शहर बसों पर लगने वाली पाबंदियों को अब स्टेज II से हटाकर सीधे स्टेज I में शामिल कर दिया गया है। इसका मतलब यह है कि वायु प्रदूषण का शुरुआती स्तर दर्ज होते ही इन बसों के परिचालन पर शर्तें लागू हो जाएंगी।
इसके अंतर्गत हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और अन्य पड़ोसी राज्यों जैसे पंजाब, हिमाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर से दिल्ली-एनसीआर में प्रवेश करने वाली यात्री बसों को निर्धारित कड़े मानकों पर खरा उतरना होगा। मौजूदा प्रावधानों के अनुसार केवल इलेक्ट्रिक, सीएनजी और बीएस-VI डीजल तकनीक से चलने वाली बसों को ही एनसीआर सीमा के भीतर परिचालन की अनुमति दी जाएगी।
बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल कारों पर बढ़ेगी सख्ती
जब वायु प्रदूषण का स्तर और अधिक बिगड़ेगा और स्थिति ग्रैप स्टेज III तक पहुंचेगी, तब सड़कों पर चलने वाले चुनिंदा पुराने वाहनों पर पाबंदी लगा दी जाएगी। स्टेज III लागू होते ही दिल्ली के अलावा सघन वाहन घनत्व वाले प्रमुख जिलों में बीएस-III पेट्रोल और बीएस-IV डीजल चार पहिया वाहनों के चलने पर पूर्ण प्रतिबंध रहेगा। इन प्रमुख जिलों में गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, गौतम बुद्ध नगर और सोनीपत शामिल हैं। इन क्षेत्रों में प्रदूषण का प्रभाव तेजी से फैलता है, इसलिए निजी और वाणिज्यिक चार पहिया गाड़ियों की आवाजाही को सीमित किया जाएगा।
मालवाहक वाहनों और डीजल जनरेटर सेट पर कड़े दिशा-निर्देश
संशोधित नियमों में मालवाहक वाहनों की आवाजाही पर भी शिकंजा कसा गया है। स्टेज III की स्थिति में निर्धारित बीएस-IV और उससे पुराने हल्के तथा मध्यम मालवाहक वाहनों पर कड़ी पाबंदियां लगाई जाएंगी। वहीं जब प्रदूषण का स्तर चरम पर पहुंचेगा और स्टेज IV लागू होगा, तब भारी ट्रकों और भारी मालवाहक वाहनों के प्रवेश व संचालन पर और भी सख्त रोक प्रभावी हो जाएगी।
इसके अतिरिक्त, डीजल जनरेटर यानी डीजी सेट पर लगने वाले प्रतिबंधों को भी पहले के मुकाबले शुरुआती स्टेज में स्थानांतरित कर दिया गया है। नए दिशा-निर्देशों के तहत केवल वही डीजी सेट संचालित किए जा सकेंगे जो अधिसूचित उत्सर्जन मानकों को पूरा करते हों या जिनमें अनुमोदित उत्सर्जन नियंत्रण प्रणालियां लगी हों। हालांकि, जनहित और आपातकालीन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अस्पतालों और लिफ्ट जैसी अत्यंत आवश्यक सुविधाओं को इन प्रतिबंधों से छूट दी जाएगी।



















