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पश्चिम बंगाल के बैंकुड़ा में शेख अब्दुल हफीज के पिता की हत्या, जंतर-मंतर आंदोलन के बाद स्कूल सुधार की उठाई थी आवाजभारत
17 अग॰ 2026, 9:25 am (1 घंटे पहले)· 2

पश्चिम बंगाल के बैंकुड़ा में शेख अब्दुल हफीज के पिता की हत्या, जंतर-मंतर आंदोलन के बाद स्कूल सुधार की उठाई थी आवाज

पश्चिम बंगाल के बैंकुड़ा जिले में कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता शेख अब्दुल हफीज के पिता की निर्मम हत्या कर दी गई है। हफीज हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP के प्रदर्शन में शामिल होकर अपने गांव लौटे थे और सरकारी स्कूल की बदहाली के खिलाफ मुहिम चला रहे थे।

पश्चिम बंगाल के बैंकुड़ा जिले के इंदास थाना क्षेत्र में हुई एक हिंसक घटना ने सियासी और सामाजिक गलियारों में हलचल मचा दी है। यहां कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ता शेख अब्दुल हफीज के परिवार को निशाना बनाया गया, जिसमें उनके पिता की जान चली गई। यह पूरा घटनाक्रम दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक आंदोलन से शुरू होकर गांव के एक प्राथमिक विद्यालय की बदहाली और फिर एक खौफनाक हमले तक पहुंच गया है। इस मामले में पुलिस ने तेजी दिखाते हुए कई लोगों को गिरफ्तार किया है, जबकि जांच जारी है।

दिल्ली के जंतर-मंतर से शुरू हुआ सफर

शेख अब्दुल हफीज कुछ समय पहले राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली पहुंचे थे। वह 19 जुलाई को जंतर-मंतर पर आयोजित कॉकरोच जनता पार्टी के एक आंदोलन में शामिल हुए थे। इसके अगले दिन यानी 20 जुलाई को जब प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर मुखर थे, तब पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प देखने को मिली। हफीज के अनुसार, इस अफरा-तफरी के माहौल में उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

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अस्पताल में एक दिन बिताने और स्वास्थ्य लाभ मिलने के बाद उन्होंने फिर से आंदोलन से जुड़े कार्यों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया। आखिरकार, 27 जुलाई को वह अपनी यात्रा पूरी कर बैंकुड़ा अपने पैतृक गांव वापस लौट आए। दिल्ली में प्रवास के दौरान हफीज लगातार सोशल मीडिया पर आंदोलन से जुड़ी तस्वीरें और अपडेट साझा कर रहे थे। उनका ऐसा मानना है कि जब वह गांव लौटे, तो स्थानीय भारतीय जनता पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उनके CJP आंदोलन में सक्रिय रूप से भाग लेने पर गहरी नाराजगी जताई थी।

सोशल मीडिया पोस्ट और स्कूल सुधार की मुहिम

गांव लौटने के बाद हफीज को लगातार धमकियां मिलने लगीं, जिसके कारण उन्होंने दिल्ली के प्रदर्शन से जुड़ी पोस्ट साझा करना बंद कर दिया। हालांकि, उनका सामाजिक सरोकार और अभियान थमा नहीं। उन्होंने अपने इलाके के एक पुराने सरकारी स्कूल की जर्जर हालत को सुधारने के लिए आवाज उठाना जारी रखा। इसी कड़ी में 13 अगस्त को हफीज CJP के ‘Fix the School’ अभियान के तहत करिशुंडा पश्चिमपाड़ा प्राथमिक स्कूल पहुंचे। दिलचस्प बात यह है कि वह खुद इसी विद्यालय के पूर्व छात्र रह चुके हैं। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य स्कूल में पढ़ाई के स्तर और बुनियादी सुविधाओं की बदतर सच्चाई को जनता के सामने लाना था।

हफीज ने इस स्कूल की दयनीय स्थिति से जुड़ी जानकारियां और तस्वीरें सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर दीं। यहीं से इस पूरे प्रकरण में एक नया और खतरनाक मोड़ आ गया। आरोप है कि इसी सोशल मीडिया पोस्ट और स्कूल की आवाज उठाने के कारण कुछ लोग उसी रात उनके घर पर आ धमके और उनके साथ मारपीट शुरू कर दी।

घर पर हमला और पिता की मौत

हफीज के बयानों के मुताबिक, हमलावर पूरी तैयारी के साथ आए थे और उनके हाथों में लाठियां, लोहे की रॉड और कुल्हाड़ी जैसे घातक हथियार मौजूद थे। उन्होंने अचानक घर पर धावा बोल दिया। किसी तरह हफीज ने अपनी जान बचाई और घर के भीतरी हिस्से में चले गए। इसी दौरान उनके पिता मोहम्मद माफिक अपने बेटे की रक्षा के लिए बीच-बचाव करने आगे आए।

आरोप है कि उग्र हमलावरों ने मोहम्मद माफिक को भी बुरी तरह पीटा, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गए। स्थानीय लोगों और पुलिस की सहायता से उन्हें तुरंत इंदास ब्लॉक प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जब उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ और हालत ज्यादा बिगड़ गई, तो 15 अगस्त को उन्हें बेहतर इलाज के लिए बर्दवान मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया गया।

दुर्भाग्यवश, अस्पताल में इलाज के दौरान मोहम्मद माफिक ने दम तोड़ दिया। अपने पिता को खोने के बाद शेख अब्दुल हफीज ने हमलावरों के खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई है। उनका कहना है कि जिस स्कूल की बदहाली को सुधारने के लिए उन्होंने आवाज उठाई थी, उसी मुद्दे की वजह से उनके पिता को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।

पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं

इस सनसनीखेज घटना के बाद बैंकुड़ा के इंदास इलाके में तनाव का माहौल बन गया है। मृतक की पत्नी हसीना बेगम ने थाने पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई और 10 से 15 अज्ञात लोगों के खिलाफ लिखित शिकायत दर्ज कराई। इस शिकायत में पांच आरोपियों के नाम भी स्पष्ट रूप से बताए गए हैं। त्वरित कार्रवाई करते हुए पुलिस ने इस मामले में कुल आठ लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार किए गए संदिग्धों में स्थानीय बीजेपी बूथ अध्यक्ष अष्टम माझी और एक पूर्व बीजेपी बूथ अध्यक्ष भी शामिल बताए जा रहे हैं। पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ हत्या, हत्या की कोशिश, गंभीर मारपीट, बलवा और संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गंभीर धाराओं के तहत मुकदमे दर्ज किए हैं।

हालांकि, जिला पुलिस अधीक्षक ने इस पूरी घटना को किसी भी राजनीतिक रंग दिए जाने से साफ इनकार कर दिया है। पुलिस अधिकारियों का तर्क है कि मामले की जांच अभी शुरुआती चरण में है और हमले के पीछे की असली वजह जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो पाएगी। दूसरी ओर, मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए सख्त कार्रवाई का ठोस भरोसा दिलाया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पुलिस परिवार की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर ही कानूनी कदम उठा रही है और किसी भी दोषी को बख्शने का कोई सवाल ही पैदा नहीं होता।

इसी तरह, कॉकरोच जनता पार्टी ने भी इस हिंसक घटना की कड़ी भर्त्सना की है। पार्टी प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि जब आम लोग अपने बच्चों के भविष्य और स्कूलों की दशा सुधारने के लिए आगे आ रहे हैं, ऐसे समय में सहयोग करने के बजाय हिंसा का रास्ता अपनाना बेहद गंभीर और निंदनीय है। पार्टी ने हफीज से संपर्क साध लिया है और CJP का एक प्रतिनिधिमंडल जल्द ही बैंकुड़ा का दौरा करने वाला है।

पिता की याद में स्कूल बनाने की अनोखी मांग

अपने पिता के निधन के बाद शोक में डूबे अब्दुल हफीज ने प्रशासन और सरकार के सामने एक विशेष मांग रखी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनके पिता की हत्या के दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने मांग की है कि जिस सरकारी स्कूल की दशा सुधारने के लिए वह अभियान चला रहे थे, उस विद्यालय को उनके दिवंगत पिता की स्मृति में आधुनिक और बेहतर सुविधाओं से लैस स्कूल के रूप में विकसित किया जाए।

यह अनूठी मांग इस पूरे प्रकरण को एक नए आयाम पर ले जाती है। एक तरफ जहां पिता की हत्या का गंभीर आरोप है, तो दूसरी तरफ सरकारी स्कूलों की बदहाली का बड़ा सामाजिक सवाल खड़ा है। इन सबके केंद्र में एक युवा CJP कार्यकर्ता है, जो दिल्ली के जंतर-मंतर से लेकर अपने गांव की गलियों तक एक संघर्ष का हिस्सा बना हुआ है। अब यह देखना अहम होगा कि पुलिस की गहन जांच इस खूनी संघर्ष और हमले की असली और सटीक वजह क्या सामने लाती है।

सवाल-जवाब

शेख अब्दुल हफीज किस राजनीतिक दल से जुड़े हैं?
शेख अब्दुल हफीज कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता हैं।
यह पूरा विवाद किस बात से शुरू हुआ था?
यह विवाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के आंदोलन में हिस्सा लेने और गांव के सरकारी स्कूल की बदहाली के खिलाफ आवाज उठाने से शुरू हुआ था।
इस मामले में मुख्य घटना क्या घटी?
अभियान के बाद हफीज के घर पर हमला हुआ, जिसमें उनके पिता मोहम्मद माफिक को गंभीर चोटें आईं और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।
पुलिस ने इस मामले में अब तक क्या कार्रवाई की है?
पुलिस ने हत्या और अन्य गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज कर स्थानीय बीजेपी बूथ अध्यक्ष समेत आठ लोगों को गिरफ्तार किया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·11 मिनट पहले

पश्चिम बंगाल के बैंकुड़ा में एक सामाजिक कार्यकर्ता के परिवार को इस तरह निशाना बनाना और पिता की हत्या होना कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। जंतर-मंतर के आंदोलन से लेकर स्कूल सुधार की स्थानीय मुहिम तक के घटनाक्रम यह दर्शाते हैं कि असहमति और जमीनी मुद्दों को उठाने पर किस हद तक हिंसा का सहारा लिया जा रहा है। पुलिस द्वारा की गई गिरफ्तारियों के बाद अब यह देखना अहम होगा कि इस मामले में कानूनी प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है और क्या सभी दोषियों को सजा मिल पाती है।

Rohan Verma@rohan-verma·11 मिनट पहले

पश्चिम बंगाल के बैंकुड़ा में जमीनी स्तर के मुद्दों और स्कूल सुधार की मुहिम से जुड़े इस मामले में जिस तरह हिंसक प्रतिक्रिया सामने आई है, वह क्षेत्रीय राजनीति और असहिष्णुता के खतरनाक स्तर को उजागर करती है। खासकर जब एक स्थानीय कार्यकर्ता की आवाज को दबाने के लिए उसके परिवार को निशाना बनाया जाता है, तो यह ग्रामीण इलाकों में लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन और प्रशासनिक तंत्र की ढिलाई को साफ दर्शाता है। पुलिस की शुरुआती गिरफ्तारियों के बाद अब यह अत्यंत आवश्यक है कि इस पूरे मामले में बिना किसी राजनीतिक दबाव के निष्पक्ष और पारदर्शी जांच हो, ताकि पीड़ित परिवार को न्याय मिल सके और भविष्य में इस तरह की घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।

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