रियलिटी शो बिग बॉस 20 के सफर से विदा लेने के तुरंत बाद अभिनेत्री ईशा रिखी चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। घर से बाहर निकलते ही उन्होंने शो के भीतर अपने साथ घटी घटनाओं, मानसिक दबाव, पुराने ट्रॉमा और वहां हुए गंभीर इमोशनल ब्रेकडाउन पर खुलकर अपने जज्बात रखे। घर के अंदर रहने के दौरान उनके आंसुओं और मानसिक स्थिति पर सह-प्रतियोगी माही विज ने कुछ तीखी टिप्पणियां की थीं। बाहर आने के बाद ईशा ने माही के उस पूरे व्यवहार को पूरी तरह असंवेदनशील करार देते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है। उनका कहना है कि दर्द में डूबा कोई भी शख्स ध्यान खींचने के लिए कई घंटों तक रोने का झूठा नाटक नहीं रच सकता।
पीठ पीछे की गई टिप्पणियों और आंसुओं के उपहास पर जताई आपत्ति
घर से बाहर होने के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए ईशा रिखी ने माही विज के रवैये पर गहरा अफसोस जताया। ईशा का कहना था कि माही उम्र और तजुर्बे में एक परिपक्व महिला हैं, ऐसे में उनसे यह उम्मीद बिल्कुल नहीं थी कि वह किसी की वास्तविक पीड़ा और पूरी पृष्ठभूमि को समझे बिना इतनी हल्की बात कहेंगी। ईशा के मुताबिक, किसी भी इंसान के रोने या उसके भीतरी दर्द का उपहास उड़ाना बेहद आपत्तिजनक है। उन्होंने इस पहलू को भी रेखांकित किया कि अगर माही को कोई समस्या या शंका थी, तो वे सीधे उनके सामने आकर बात कर सकती थीं। सामने कुछ न कहकर पीठ पीछे इस तरह के व्यंग्य कसना बहुत निराशाजनक और दुखद था।
डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य पर ईशा का दोटूक नजरिया
मानसिक स्वास्थ्य, अवसाद और अतीत के आघात से उबरने की प्रक्रिया पर विस्तार से बोलते हुए ईशा ने कई अहम बातें सामने रखीं। उनका स्पष्ट मानना है कि हर व्यक्ति की भावनात्मक बनावट अलग होती है और विपरीत मानसिक हालात या बुरे दौर से उबरने के लिए हर किसी को अलग समय चाहिए होता है। कोई व्यक्ति एक ही दिन में सामान्य महसूस करने लगता है, जबकि किसी दूसरे इंसान को उसी सदमे से बाहर आने में हफ्तों अथवा महीनों का समय लग सकता है। किसी के देर से उबरने का अर्थ यह कदापि नहीं निकाला जाना चाहिए कि उसका दर्द बनावटी है या उसकी तकलीफ गहरी नहीं थी।
ईशा ने उन तमाम लोगों को भी कड़ा संदेश दिया जो किसी दूसरे के मानसिक ब्रेकडाउन पर सवाल खड़े करते हैं और उसे पब्लिसिटी का जरिया बताते हैं। उन्होंने कहा कि दूसरों के ट्रॉमा अथवा डिप्रेशन को अपनी सुविधा से जज करना पूरी तरह गलत मानसिकता है। कुछ लोग बेहद आसानी से यह आरोप मढ़ देते हैं कि सामने वाला इंसान सिर्फ सबका ध्यान अपनी ओर खींचने या हमदर्दी बटोरने के लिए डिप्रेशन का दिखावा कर रहा है। ईशा ने सवाल उठाया कि क्या कोई भी व्यक्ति महज लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचने के लिए लगातार तीन घंटे तक फूट-फूटकर रोने का स्वांग रच सकता है, ऐसा सोचना भी अमानवीय है।
टास्क के दौरान हुआ विवाद और माही का भड़काऊ बयान
इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि शो के एक टास्क के दौरान तैयार हुई थी। घर में गेंद से जुड़ा एक टास्क चल रहा था, जिसमें यंग और काजी के बीच जोरदार बहस छिड़ गई। यंग का आरोप था कि उन्हें चोट लग गई है और वे काजी पर भड़क रहे थे। वहीं काजी का साफ कहना था कि उन्होंने जानबूझकर किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया और उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि यंग ने चोट लगने की बात बहुत देर से क्यों बताई। इसी खींचतान के बीच घर के बाकी सदस्य भी काजी पर दबाव बनाने लगे और उन्हें ही गलत ठहराने लगे, जिससे काजी काफी परेशान और उखड़ गए।
जब यंग और काजी के बीच तनातनी बढ़ रही थी, तब ईशा ने मामले को शांत कराने के लिए बीच-बचाव किया और काजी को समझाने की कोशिश करने लगीं। इस हस्तक्षेप के चलते काजी और ईशा के बीच भी तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। उसी आवेश में काजी ने ईशा से काफी ऊंची आवाज में कहा कि उन्होंने जानबूझकर कुछ भी नहीं किया है। काजी का यह तेज और आक्रामक व्यवहार देखते ही ईशा अचानक बेहद भावुक हो गईं और जोर-जोर से रोने लगीं। ऐसा माना गया कि काजी के इस लहजे ने ईशा के किसी पुराने ट्रॉमा को अचानक ट्रिगर कर दिया था।
इसी घटनाक्रम को देखकर माही विज ने विवादित टिप्पणी की थी। माही ने सवाल उठाया था कि ईशा को अचानक ऐसा क्या हो गया है और वह हर बात पर ऐसे क्यों रोने लगती हैं कि उनका ट्रॉमा हिट हो गया। माही ने यहां तक कह दिया था कि इस तरह का व्यवहार देखकर बाहर दर्शकों को लगेगा कि पता नहीं बादशाह ने उनके साथ क्या कर दिया होगा, जो कि पूरी तरह गलत बात है। इस टिप्पणी में बादशाह का नाम खींचे जाने और उनके पुराने अनुभवों को हल्का बताए जाने से ईशा बुरी तरह आहत थीं।
वॉशरूम में खुद को संभालने की कोशिश और अनियंत्रित आंसू
घर के भीतर हुए अपने उस ब्रेकडाउन के लम्हों को याद करते हुए ईशा ने बताया कि उन्होंने शो में कदम रखने से पहले खुद से वादा किया था कि वे किसी भी सूरत में कैमरे के सामने नहीं रोएंगी। जब यह विवाद हुआ और वे अंदर से हिल गईं, तो वे खुद को संभालने के लिए वॉशरूम एरिया की तरफ चली गई थीं। वहां अकेले में भी वे बार-बार खुद को यही समझा रही थीं कि उन्हें अपने आंसुओं पर काबू रखना है और कमजोर नहीं पड़ना है।
हालांकि, पुराने दर्दनाक अनुभव और बातें उनके जेहन में इतनी तीव्रता से कौंध गईं कि चाहकर भी वे अपने आंसुओं को रोक नहीं पाईं और खुद पर से उनका नियंत्रण छूट गया। ईशा ने इस बात पर गहरा दुख जाहिर किया कि पूरे घर में लोगों ने सिर्फ उनके अत्यधिक रोने के रिएक्शन को देखा और उस पर फब्तियां कसीं। किसी भी सदस्य ने एक पल के लिए भी यह जानने या समझने की संवेदना नहीं दिखाई कि वह भीतर ही भीतर किस भीषण मानसिक उथल-पुथल और पीड़ादायक दौर से गुजर रही थीं।



















