टेलीविजन के चर्चित रियलिटी मंच ‘बिग बॉस 20’ से संक्षिप्त सफर के बाद विदा हुईं गायिका रीति तिवारी ने प्रतियोगिता से बाहर आने पर अपने पूरे सफर का विश्लेषण किया है। घर के भीतर लगातार होने वाले विवादों और नोकझोंक के बीच उनका यह सफर भले ही जल्दी सिमट गया, लेकिन विदाई के पलों ने घर के सदस्यों को भावुक कर दिया। विशेषकर आम्रपाली दुबे उनकी विदाई पर अपने आंसू नहीं रोक सकीं और उन्हें इस बात का मलाल रहा कि वे रीति को बेदखली से सुरक्षित नहीं रख पाईं। घर के भीतर आक्रामक रुख और कई तीखे झगड़ों में शामिल रहने के बाद बाहर आईं रीति अब इस पूरे अनुभव को आत्ममंथन के एक बड़े मौके के तौर पर देख रही हैं।
घर के भीतर की तकरार और आम्रपाली दुबे का भावुक पल
प्रतियोगिता के दौरान रीति का व्यवहार काफी चर्चा का विषय बना रहा, जहां वे कई अन्य प्रतिभागियों के साथ तीखी बहस करती नजर आती थीं। उनके तेवरों की वजह से घर का माहौल कई बार गरमाया, लेकिन जब निष्कासन का फैसला आया तो समीकरण पूरी तरह बदल गए। आम्रपाली दुबे उनके बाहर जाने के फैसले से बुरी तरह टूट गईं और फूट-फूटकर रोने लगीं। आम्रपाली का मानना था कि उनके पास साथी कलाकार को सुरक्षित करने का मौका था, जिसे वे भुना नहीं पाईं। इस भावुक विदाई ने यह दिखा दिया कि लड़ाइयों से परे भी घर में आपसी जुड़ाव बन चुका था।
पिता मनोज तिवारी से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया
प्रतियोगिता से बाहर कदम रखते ही रीति को अपने परिवार, खासकर पिता मनोज तिवारी से जो सहारा मिला, उसने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया। पिता की प्रतिक्रिया का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि उनके पिता ने एक सच्चे अभिभावक की तरह उनका मार्गदर्शन किया और उनके भीतर आए सकारात्मक सुधारों की खुलकर तारीफ की। पिता ने अपनी बेटी की कोशिशों की सराहना करते हुए स्पष्ट किया कि उन्हें अपनी बेटी पर पूरा नाज है।
रीति के अनुसार उनके पिता मनोज तिवारी ने उनसे कहा, ‘मुझे तुम पर गर्व है।’
पिता के इन शब्दों ने रीति के पूरे नजरिए को बदल दिया। उनका कहना है कि इस बातचीत से उन्हें यह भरोसा मिला कि घर के अंदर हुए तनाव और गलतियों के बावजूद वे एक अधिक परिपक्व इंसान बनकर उभरी हैं। अपने व्यक्तित्व में आए इस निखार को वे इस पूरे सफर की सबसे बड़ी उपलब्धि मानती हैं।
कमियों की पहचान और आत्ममंथन की सीख
प्रतियोगिता के दौरान मिले अनुभवों पर चर्चा करते हुए युवा गायिका ने माना कि हर व्यक्ति में कुछ खामियां होती हैं, जिन्हें वक्त के साथ सुधारना जरूरी होता है। खेल के तीव्र दबाव में उन्हें अपनी कई कमजोरियों को बारीकी से देखने और समझने का मौका मिला। उन्होंने यह समझा कि विभिन्न मुश्किल परिस्थितियों में उन्हें किस तरह शांत रहकर प्रतिक्रिया देनी चाहिए थी और किन मोड़ों पर उनका रवैया गलत साबित हुआ।
अपनी परवरिश और पारिवारिक सीख को याद करते हुए रीति ने अपनी मां की एक अहम सलाह का जिक्र किया। उनकी मां हमेशा यह सीख देती थीं कि भावनाओं को कभी भी अपने विवेक पर हावी नहीं होने देना चाहिए। घर के आक्रामक माहौल में वे कई बार भावनाओं के बहाव में बह गईं, लेकिन अब वे इन कमजोरियों को पूरी तरह दूर कर खुद को एक सुलझे हुए व्यक्तित्व के रूप में ढालना चाहती हैं।
काजी तौकीर के साथ हुए घटनाक्रम का सबक
शो के दौरान काजी तौकीर के साथ उपजे तनाव और उससे जुड़े विवाद पर भी रीति ने बिना किसी झिझक के अपनी बात रखी। उन्होंने साफ स्वीकार किया कि उस विशेष घटना ने उन्हें अपने आचरण का दोबारा मूल्यांकन करने पर विवश कर दिया। मंच के होस्ट सलमान खान की समझाइश, साथी प्रतिभागियों की राय और बाहर दर्शकों की प्रतिक्रियाओं ने उन्हें यह स्पष्ट आईना दिखाया कि वे गलत दिशा में कदम बढ़ा रही थीं। रीति का मानना है कि इस पूरे सफर ने उन्हें अपनी गलतियों को स्वीकार करने और उनसे सीख लेकर आगे बढ़ने का सबसे बड़ा सबक दिया है।



















