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अयोध्या में रामलला के चढ़ावे का गबन, 8 आरोपियों पर लगीं BNS की सबसे सख्त धाराएं, 10 साल तक की सजा मुमकिनउत्तर प्रदेश
25 जून 2026, 9:06 pm (124 दिन पहले)· 1

अयोध्या में रामलला के चढ़ावे का गबन, 8 आरोपियों पर लगीं BNS की सबसे सख्त धाराएं, 10 साल तक की सजा मुमकिन

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गबन के मामले में अयोध्या पुलिस ने टिन्नू यादव समेत 8 लोगों पर नामजद FIR दर्ज की है। पुलिस ने BNS की पांच सबसे सख्त धाराएं लगाई हैं, जिनमें 10 साल तक की कैद का प्रावधान है।

अयोध्या के राम मंदिर में आए चढ़ावे और चंदे में कथित गबन को लेकर अब कानूनी घेरा पूरी तरह कस गया है। उत्तर प्रदेश सरकार के सख्त रुख के बाद इस मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य श्री कृष्ण मोहन की तहरीर और SIT की संस्तुति के आधार पर अयोध्या पुलिस ने टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ल और मनीष यादव समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज कर ली है। इनमें से 6 लोग कैशियर बताए जा रहे हैं।

मुकदमे को मजबूत और पुख्ता बनाने के लिए पुलिस ने नए कानून भारतीय न्याय संहिता (BNS) की पांच सबसे सख्त और घातक धाराओं का इस्तेमाल किया है। आसान भाषा में समझिए कि ये धाराएं क्या कहती हैं और आरोप साबित होने पर किसे कितने साल तक की सजा हो सकती है।

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धारा 316(5): पेशेवर विश्वासघात

यह पूरे मामले की सबसे गंभीर धाराओं में से एक है। नए कानून के मुताबिक जब कोई बैंकर, व्यापारी, एजेंट, दलाल या वकील अपने पेशेवर पद का गलत इस्तेमाल कर किसी संपत्ति या अधिकार में विश्वासघात करता है, तो यह धारा लागू होती है। ट्रस्ट और दान के पैसों का प्रबंधन पेशेवर जिम्मेदारी के दायरे में आता है, इसी वजह से यह धारा लगाई गई है।

इस धारा के तहत दोष साबित होने पर आरोपी को 10 साल तक की कठोर कैद और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है।

धारा 306: मालिक की संपत्ति में सेंधमारी

यह धारा खास तौर पर उन मामलों में लगती है जहां कोई कर्मचारी, सेवादार या घरेलू नौकर अपने पद और भरोसे का फायदा उठाकर अपने ही मालिक की संपत्ति चुरा लेता है। रामलला के मंदिर के प्रबंधन और चढ़ावे की देखरेख से जुड़े कर्मचारियों पर लगे कथित गबन के आरोप को देखते हुए इसे जोड़ा गया है।

इसमें भी कर्मचारी को विश्वासघात और चोरी के आरोप में कड़ी जेल और जुर्माने का सामना करना पड़ता है।

धारा 317(5): चोरी की संपत्ति छिपाना

यह धारा सीधे तौर पर चोरी किए गए माल या पैसे को ठिकाने लगाने से जुड़ी है। इसके मुताबिक अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर चोरी की संपत्ति या गबन किए गए पैसे को छिपाने, नष्ट करने, ठिकाने लगाने या एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने में किसी भी तरह की मदद करता है, तो वह कानूनन सीधे तौर पर अपराधी माना जाएगा।

इस धारा में दोषी को 3 साल तक की जेल, जुर्माना या फिर जेल और जुर्माना दोनों एक साथ की सजा हो सकती है।

धारा 317(4): आदतन चोरी का माल खरीदना

यह धारा चोरी के सामान या पैसों की आदतन खरीद-फरोख्त से जुड़ी है। अगर कोई व्यक्ति जानबूझकर और बार-बार चोरी का माल खरीदता है, उसे अपने पास रखता है या उसका अवैध कारोबार करता है, तो उस पर इस धारा के तहत मुकदमा दर्ज होता है। यह बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।

आरोपियों के लिए बचना अब मुश्किल

SIT की जांच और इस FIR में टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ल और मनीष यादव समेत आठ से ज्यादा लोगों पर केस दर्ज हुआ है। इतनी सख्त धाराओं के घेरे से कानूनी तौर पर बच निकलना अब इन आरोपियों के लिए लगभग नामुमकिन नजर आ रहा है।

सवाल-जवाब

इस मामले में किसकी शिकायत पर FIR दर्ज हुई?
राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सदस्य श्री कृष्ण मोहन की तहरीर और SIT की संस्तुति पर अयोध्या पुलिस ने FIR दर्ज की है।
FIR में कितने लोगों के नाम हैं?
टिन्नू यादव, लवकुश मिश्रा, अनुकल्प मिश्र, अविनाश शुक्ल और मनीष यादव समेत कुल 8 लोगों के खिलाफ नामजद FIR दर्ज हुई है, जिनमें 6 कैशियर बताए जा रहे हैं।
सबसे सख्त सजा वाली धारा कौन सी है?
धारा 316(5) यानी पेशेवर विश्वासघात सबसे गंभीर है, जिसमें दोष साबित होने पर 10 साल तक की कठोर कैद और भारी जुर्माने का प्रावधान है।
धारा 317(5) में कितनी सजा हो सकती है?
चोरी की संपत्ति छिपाने से जुड़ी इस धारा में दोषी को 3 साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों एक साथ की सजा हो सकती है।
क्या इनमें कोई गैर-जमानती अपराध भी है?
हां, धारा 317(4) यानी आदतन चोरी का माल खरीदना बेहद गंभीर और गैर-जमानती अपराध की श्रेणी में आता है।
पुलिस ने कुल कितनी धाराएं लगाई हैं?
पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की पांच सबसे सख्त धाराओं का इस्तेमाल किया है।
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