उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले में एक तेंदुए ने रात के घुप्प अंधेरे का फायदा उठाकर एक नौ साल के बच्चे पर जानलेवा हमला बोल दिया। हमले में मासूम राजवीर के गले और गर्दन पर इतने गहरे घाव आए कि इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई, जबकि उसकी मां ने अपनी जान जोखिम में डालकर तेंदुए से सीधी भिड़ंत की थी।
बिजली गुल होते ही अंधेरे में छिपा बैठा था तेंदुआ
यह घटना रात करीब 9:30 बजे की बताई जा रही है। उसी वक्त अचानक बिजली चली गई और पूरा इलाका अंधेरे में डूब गया। राजवीर की मां कंसीला उस समय अपने पांच छोटे बच्चों के साथ घर के भीतर मौजूद थीं। बिजली न होने से घर के बाहर आंगन में गहरा अंधेरा पसरा हुआ था। इसी बीच नौ साल के राजवीर को प्यास लगी और वह आंगन में लगे हैंडपंप पर पानी पीने चला गया। तेंदुआ पहले से ही वहां घात लगाकर बैठा था और अंधेरे की आड़ में मासूम पर टूट पड़ा।
मां ने दो मिनट तक जान जोखिम में डालकर तेंदुए से की लड़ाई
बेटे की चीख सुनते ही कंसीला अपनी जान की परवाह किए बिना तेंदुए से भिड़ गईं। करीब दो मिनट तक चले इस संघर्ष में मां ने हार नहीं मानी और आखिरकार बेटे को तेंदुए के चंगुल से छुड़ा लिया। लेकिन तब तक तेंदुआ राजवीर के गले और गर्दन पर गहरे जख्म कर चुका था। जख्मों से इतना ज्यादा खून बह गया कि बच्चे की हालत बेहद गंभीर हो गई।
एम्बुलेंस नहीं मिली, निजी गाड़ी से अस्पताल पहुंचाया, फिर भी नहीं बची जान
बच्चे की चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर इकट्ठा हो गए। पड़ोसी और समाजसेवी महिपाल यादव भी वहां पहुंच गए। कई बार कोशिश करने पर भी एम्बुलेंस से संपर्क नहीं हो पाया, जिसके बाद महिपाल यादव अपनी निजी गाड़ी में गंभीर रूप से घायल राजवीर को लेकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र यानी पीएचसी सुजौली पहुंचे। लेकिन गहरे घावों और अत्यधिक खून बह जाने के चलते इलाज के दौरान ही मासूम ने दम तोड़ दिया। बेटे की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंची, शव का पंचनामा किया और आगे की कार्रवाई के लिए पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
वन विभाग ने दी आर्थिक मदद, गांव में तैनात किए वनकर्मी
घटना के अगली सुबह वन विभाग के रेंजर आशीष गौड़ मौके पर पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को फौरी राहत के तौर पर 10 हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी। साथ ही तेंदुए की मौजूदगी को देखते हुए एहतियातन गांव में वनकर्मियों की एक टीम भी तैनात कर दी गई है, ताकि आगे किसी अनहोनी को रोका जा सके।
ग्रामीणों में गुस्सा, बिजली कटौती बंद करने और सोलर लाइट की मांग
इस दर्दनाक हादसे के बाद गांव के लोगों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर उस रात बिजली न गई होती और आंगन में रोशनी रहती, तो शायद राजवीर की जान बचाई जा सकती थी। गुस्साए ग्रामीणों ने प्रदर्शन करते हुए प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं। पहली, रात के समय होने वाली बिजली कटौती तुरंत बंद की जाए। दूसरी, इलाके में घूम रहे तेंदुए को पकड़ने के लिए पिंजरा लगाया जाए। तीसरी, आगे ऐसी घटनाएं रोकने के लिए गांव में सोलर लाइट लगवाई जाए, ताकि रात में अंधेरा न रहे।



















