गर्मी में पशुओं की सही देखभाल से बढ़ेगा दूध उत्पादन, जानें पशु चिकित्सक की सलाहउत्तर प्रदेश
2 घंटे पहले· 1

गर्मी में पशुओं की सही देखभाल से बढ़ेगा दूध उत्पादन, जानें पशु चिकित्सक की सलाह

गोरखपुर के पशु चिकित्सक डॉ. शिवकुमार वर्मा के मुताबिक गर्मी में हीट स्ट्रेस से बचाव, सही चारा-पानी और पशुशाला प्रबंधन अपनाकर किसान दूध उत्पादन और अपनी कमाई दोनों बढ़ा सकते हैं।

गोरखपुर और आसपास के पूर्वांचल इलाके में गाय भैंस पालना अब सिर्फ घर की जरूरत भर नहीं रहा, बल्कि कई परिवारों के लिए यह कमाई का बड़ा जरिया बन चुका है। लेकिन सिर्फ अच्छी नस्ल का पशु खरीद लेने भर से दूध ज्यादा नहीं मिलता, असली फर्क तब पड़ता है जब मौसम के हिसाब से पशुओं की देखभाल की जाए। पशु चिकित्सक डॉ. शिवकुमार वर्मा का कहना है कि अगर किसान सही तरीके अपनाएं तो बाल्टी में दूध की धार तेज हो सकती है और आमदनी में भी अच्छी बढ़ोतरी हो सकती है।

गर्मी का सीधा असर सेहत और दूध पर

डॉ. शिवकुमार वर्मा के मुताबिक भीषण गर्मी के मौसम में पशुओं पर सबसे ज्यादा असर हीट स्ट्रेस यानी गर्मी के तनाव का पड़ता है। इसका सीधा नुकसान पशु की सेहत और उसके दूध उत्पादन दोनों पर दिखाई देता है। ऐसे में किसानों को सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि इस समय कौन सा मौसम चल रहा है और उसी हिसाब से पशु की देखभाल की योजना बनानी चाहिए। मौसम को नजरअंदाज करके अगर पुराने तरीके से ही पशुओं को पाला जाता रहे, तो दूध उत्पादन में गिरावट आना तय माना जाता है।

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चारे और पानी का रखें खास ध्यान

मौसम के अनुसार ही चारे का चुनाव भी होना चाहिए। हरा चारा, सूखा चारा और संतुलित पशु आहार सही मात्रा में देना जरूरी बताया गया है, ताकि पशु को पर्याप्त ऊर्जा और पोषण मिलता रहे। इसके अलावा गर्मियों में पानी की गुणवत्ता पर खास ध्यान देने की सलाह दी गई है। पशुओं को हमेशा साफ, ताजा और ठंडा पानी उपलब्ध कराना चाहिए। जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की सलाह लेकर पानी में इलेक्ट्रोलाइट, मिनरल मिक्सचर या अन्य जरूरी सप्लीमेंट भी मिलाए जा सकते हैं। इससे शरीर में पानी और खनिजों का संतुलन बना रहता है और गर्मी का असर काफी हद तक कम हो जाता है।

हर नस्ल की जरूरत अलग अलग

यह भी ध्यान रखने वाली बात है कि सभी नस्लों की गाय और भैंस की देखभाल एक जैसे तरीके से नहीं की जा सकती। कुछ विदेशी या ज्यादा दूध देने वाली हाई-यील्ड नस्लें गर्मी को कम बर्दाश्त कर पाती हैं, जबकि देसी नस्लें इस मौसम में अपेक्षाकृत ज्यादा अनुकूल रहती हैं। इसलिए हर पशु की नस्ल, उम्र और दूध देने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए ही उसके खानपान और देखभाल की अलग योजना बनानी चाहिए, एक ही तरीका सभी पशुओं पर लागू नहीं किया जा सकता।

पशुशाला में करें ये जरूरी इंतजाम

गर्मी से बचाव के लिए पशुशाला में हवा के सही आवागमन का इंतजाम होना चाहिए। इसके साथ ही छायादार जगह, कूलिंग सिस्टम, फॉगर्स या समय समय पर पानी का छिड़काव भी काफी फायदेमंद माना जाता है। दोपहर के समय जब धूप सबसे तेज होती है, उस दौरान पशुओं को खुले में बांधने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे हीट स्ट्रेस और बढ़ सकता है और पशु की भूख तथा दूध देने की क्षमता दोनों पर बुरा असर पड़ सकता है।

वैज्ञानिक प्रबंधन से बढ़ेगी आमदनी

डॉ. शिवकुमार वर्मा के अनुसार अगर किसान मौसम के अनुसार वैज्ञानिक तरीके से पशुओं का प्रबंधन करें और समय पर टीकाकरण के साथ नियमित स्वास्थ्य जांच भी कराते रहें, तो इसका सीधा फायदा दिखेगा। न सिर्फ पशु स्वस्थ रहेंगे, बल्कि दूध उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी और डेयरी फार्मिंग से होने वाली कमाई में भी अच्छा इजाफा होगा। उनका कहना है कि यही छोटी छोटी सावधानियां गर्मी के मौसम में डेयरी व्यवसाय को पहले से कहीं ज्यादा मुनाफे वाला बना सकती हैं और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने में मदद कर सकती हैं।

सवाल-जवाब

गर्मी में पशुओं को सबसे ज्यादा नुकसान किससे होता है?
हीट स्ट्रेस यानी गर्मी के तनाव से, इसका सीधा असर पशु की सेहत और दूध उत्पादन दोनों पर पड़ता है।
गर्मियों में गाय भैंस को किस तरह का पानी देना चाहिए?
हमेशा साफ, ताजा और ठंडा पानी, जरूरत पड़ने पर पशु चिकित्सक की सलाह से इलेक्ट्रोलाइट या मिनरल मिक्सचर मिलाकर।
क्या सभी नस्लों की गाय भैंस को एक जैसी देखभाल की जरूरत होती है?
नहीं, विदेशी और हाई-यील्ड नस्लें गर्मी कम सहन कर पाती हैं जबकि देसी नस्लें अपेक्षाकृत ज्यादा अनुकूल होती हैं।
पशुशाला में गर्मी से बचाव के लिए क्या इंतजाम करने चाहिए?
हवा के सही आवागमन के साथ छायादार जगह, कूलिंग सिस्टम, फॉगर्स और समय समय पर पानी का छिड़काव करना चाहिए।
दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को और क्या करना चाहिए?
मौसम के अनुसार वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ समय पर टीकाकरण और नियमित स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए।

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