बिहार की राजधानी पटना में पशु चिकित्सा के क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव आने वाला है। बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के भीतर एक ऐसे अत्याधुनिक वेटरनरी क्लिनिकल कॉम्प्लेक्स का निर्माण तेजी से जारी है, जो न केवल भारत बल्कि पूरे एशिया महाद्वीप में अपनी तरह का सबसे बड़ा संस्थान साबित होगा। यह परियोजना पशुओं के इलाज के दृष्टिकोण से एक क्रांतिकारी कदम मानी जा रही है, जो अगले साल विश्वविद्यालय के 100वें स्थापना दिवस के उपलक्ष्य में जनता के लिए खोल दी जाएगी।
एशिया का सबसे बड़ा चिकित्सा केंद्र
बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. ज्ञान देव सिंह के अनुसार, यह क्लिनिकल कॉम्प्लेक्स एशिया में किसी भी वेटरनरी कॉलेज के पास मौजूद सुविधाओं में सबसे विशाल और उन्नत होगा। पटना हवाई अड्डे के समीप और बिहार पशु विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर के ठीक बगल में स्थित इस भवन का निर्माण राज्य के कृषि रोड मैप के अंतर्गत किया जा रहा है। यह न केवल छात्रों को व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान करने का केंद्र होगा, बल्कि आम पशुपालकों के लिए भी वरदान साबित होगा जो अपने मवेशियों के लिए बेहतरीन चिकित्सा की तलाश में रहते हैं।
आधुनिक सुविधाओं से लैस होगा कॉम्प्लेक्स
इस आगामी क्लिनिकल कॉम्प्लेक्स में चिकित्सा से संबंधित विभिन्न विभागों के लिए समर्पित ओपीडी, विश्वस्तरीय ऑपरेशन थिएटर और बड़े जानवरों के इलाज हेतु विशेष इकाइयां शामिल होंगी। सर्जरी के लिए विशेष व्यवस्था की गई है ताकि पशुओं को गंभीर बीमारियों में भी तुरंत राहत मिल सके। हर विभाग में अत्याधुनिक उपकरणों और मशीनों को स्थापित करने की योजना है, जिससे न केवल जानवरों का इलाज बेहतर होगा बल्कि छात्रों को भी उच्च स्तर की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग प्राप्त हो सकेगी।
वर्तमान सेवाओं का विस्तार
मौजूदा समय में वेटरनरी कॉलेज की क्लिनिकल सेवाएं एक सीमित दायरे में चल रही हैं, लेकिन इसके बावजूद यह अस्पताल बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे पड़ोसी राज्यों के लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र बना हुआ है। यहाँ छोटे पालतू जानवरों से लेकर बड़े मवेशियों तक का इलाज बहुत कम शुल्क पर किया जाता है। ओपीडी का शुल्क मात्र 10 रुपये से शुरू होता है।
इसके अतिरिक्त, गायनेकोलॉजिकल सेवाएं 40 रुपये, सर्जिकल सेवाएं 20 रुपये और पैथोलॉजिकल जांच के लिए 20 रुपये का मामूली शुल्क लिया जाता है। नए कॉम्प्लेक्स के चालू होने के बाद इन सेवाओं को और अधिक विस्तार मिलेगा। यहां पहले से ही ब्लड ट्रांसफ्यूजन, डायग्नोस्टिक सेवाएं, बायोकेमिकल टेस्ट और पशुओं की ग्रूमिंग जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो नए भवन में और भी अधिक तकनीकी सटीकता के साथ संचालित की जाएंगी। यह कदम बिहार में पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवाओं को एक नया आयाम प्रदान करेगा।











