सर्जरी की योजना बनाते वक्त बेहोश हुए बहराइच के डॉक्टर विनोद कुमार, अस्पताल में ही मौतउत्तर प्रदेश
2 घंटे पहले· 2

सर्जरी की योजना बनाते वक्त बेहोश हुए बहराइच के डॉक्टर विनोद कुमार, अस्पताल में ही मौत

बहराइच के महाराजा सुहेलदेव ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज में ड्यूटी के दौरान 33 साल के ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉक्टर विनोद कुमार की तबीयत अचानक बिगड़ गई और सर्जरी की तैयारी के बीच बेहोश होने के बाद उनकी मौत हो गई।

यूपी के बहराइच में मंगलवार को ड्यूटी के दौरान एक 33 साल के ऑर्थोपेडिक सर्जन की तबीयत अचानक बिगड़ गई और कुछ ही घंटों में उनकी मौत हो गई। डॉक्टर को पहले पेट दर्द, गैस और उल्टी जैसी शिकायत महसूस हुई थी, जिसके बाद उन्हें इंजेक्शन देकर राहत दी गई थी, लेकिन कुछ देर बाद ही वह अचानक बेहोश हो गए और डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।

अस्पताल प्रशासन ने घटना की जानकारी दी

यह पूरा मामला बहराइच के महाराजा सुहेलदेव ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज का है। कॉलेज के चीफ मेडिकल सुपरिटेंडेंट डॉक्टर एस.के. वर्मा ने इस घटना पर विस्तार से जानकारी दी। उनके मुताबिक मृतक डॉक्टर का नाम विनोद कुमार था और वह उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के रहने वाले थे। डॉक्टर विनोद कुमार पिछले चार साल से इसी मेडिकल कॉलेज में ऑर्थोपेडिक सर्जन के पद पर तैनात थे और मरीजों का इलाज कर रहे थे।

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रोज़ की तरह शुरू हुआ था दिन, दोपहर तक सब सामान्य था

डॉक्टर एस.के. वर्मा के मुताबिक, मंगलवार को भी डॉक्टर विनोद कुमार हमेशा की तरह सुबह अस्पताल पहुंचे थे। उन्होंने सबसे पहले ओपीडी में आए मरीजों को देखा, इसके बाद अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों की जांच की और फिर दिनभर होने वाली सर्जरी के शेड्यूल पर नजर डाली। यानी सुबह से लेकर दोपहर तक उनका दिन बिल्कुल सामान्य तरीके से गुजर रहा था और अस्पताल में किसी को अंदाजा नहीं था कि कुछ ही घंटों में हालात इतनी तेजी से बिगड़ जाएंगे।

पेट दर्द और उल्टी जैसा महसूस होने पर दिया गया इंजेक्शन

डॉक्टर वर्मा ने बताया कि ड्यूटी के दौरान ही डॉक्टर विनोद कुमार को पेट में दर्द, गैस और उल्टी जैसा महसूस होने लगा था। इसके बाद उन्हें पैंटोप (Pantop) इंजेक्शन दिया गया, जिससे कुछ ही देर में उनकी हालत में सुधार भी नजर आया। पैंटोप जैसे इंजेक्शन आमतौर पर एसिडिटी और पेट की जलन से जुड़ी शिकायतों में तुरंत राहत देने के लिए इस्तेमाल होते हैं, इसलिए शुरुआत में इसे मामूली दिक्कत ही समझा गया। डॉक्टर वर्मा के अनुसार हो सकता है कि उस वक्त डॉक्टर विनोद कुमार के शरीर के अंदर कोई और गंभीर तकलीफ पनप रही हो, लेकिन शायद उन्होंने खुद भी इसे उतनी गंभीरता से नहीं लिया और अपनी ड्यूटी पर काम करते रहे।

सर्जरी की योजना बनाते समय अचानक बेहोश हुए डॉक्टर

डॉक्टर वर्मा के मुताबिक, मरीजों को देखने के बाद डॉक्टर विनोद कुमार अपने चैंबर में लौट आए थे और वहां एक मरीज की सर्जरी को लेकर योजना बना रहे थे। ठीक इसी दौरान वह अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। मौके पर मौजूद डॉक्टरों ने तुरंत उन्हें कृत्रिम सांस देने की कोशिश की और कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन यानी सीपीआर (CPR) भी दिया गया, लेकिन लंबी कोशिशों के बावजूद उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शाम 4:40 बजे डॉक्टर विनोद कुमार को मृत घोषित कर दिया गया।

परिवार बहराइच रवाना, देर रात होगा पोस्टमार्टम

मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर संजय खत्री ने भी इस पूरे मामले पर बयान दिया। उन्होंने बताया कि डॉक्टर विनोद कुमार के परिवार के सदस्य बहराइच के लिए रवाना हो चुके हैं और देर रात उनका पोस्टमार्टम कराया जाएगा। देर रात जारी एक प्रेस बयान में मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने डॉक्टर विनोद कुमार को एक समर्पित, मेहनती और कुशल डॉक्टर बताया, जिन्होंने अपने चार साल के कार्यकाल में मरीजों की देखभाल में अहम योगदान दिया। कॉलेज प्रशासन का कहना है कि उनके अचानक निधन से पूरे स्टाफ और मरीजों को गहरा सदमा लगा है।

सवाल-जवाब

डॉक्टर विनोद कुमार की मौत कब और कहां हुई?
बहराइच के महाराजा सुहेलदेव ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज में मंगलवार को ड्यूटी के दौरान उनकी मौत हो गई।
डॉक्टर विनोद कुमार की उम्र क्या थी और वह कहां के रहने वाले थे?
वह 33 साल के थे और उत्तर प्रदेश के संत कबीर नगर जिले के रहने वाले थे।
डॉक्टर को कौन से लक्षण महसूस हुए थे?
उन्हें पेट दर्द, गैस और उल्टी जैसा महसूस हुआ था।
बीमार महसूस होने पर डॉक्टर को क्या दिया गया था?
उन्हें पैंटोप (Pantop) इंजेक्शन दिया गया था, जिससे उनकी हालत में कुछ सुधार भी दिखा था।
डॉक्टर विनोद कुमार बेहोश कब हुए?
मरीजों को देखने के बाद जब वह अपने चैंबर में एक मरीज की सर्जरी की योजना बना रहे थे, तभी वह अचानक बेहोश हो गए।
उन्हें मृत कब घोषित किया गया?
डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका और शाम 4:40 बजे मृत घोषित कर दिया गया।
डॉक्टर विनोद कुमार कितने समय से इस मेडिकल कॉलेज में काम कर रहे थे?
वह पिछले चार साल से महाराजा सुहेलदेव ऑटोनॉमस स्टेट मेडिकल कॉलेज में ऑर्थोपेडिक सर्जन के तौर पर सेवाएं दे रहे थे।

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