स्थानीय दवा की दुकानों से बिना जांच-पड़ताल किए दवाएं खरीदना आपकी सेहत के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। उत्तर प्रदेश पुलिस और प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए गोंडा जिले में एक विशाल अवैध नेटवर्क को ध्वस्त किया है। यह सिंडिकेट बड़े पैमाने पर नकली और बैन हो चुकी नशीली दवाओं की सप्लाई कर रहा था। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (FSDA) मुख्यालय द्वारा जारी किए गए सख्त आदेशों पर अमल करते हुए, अधिकारियों की एक जॉइंट टीम ने यह मेगा ऑपरेशन चलाया। इस सफल अभियान के दौरान टीम ने लगभग 1 करोड़ 13 लाख रुपये कीमत का अवैध मेडिकल स्टॉक बरामद किया है।
अवैध गोदामों पर विशेष टीम की छापेमारी
यह पूरा काला धंधा नगर कोतवाली क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले कई प्रमुख मोहल्लों में बेखौफ तरीके से पनप रहा था। तस्करों ने अपना मुख्य बेस रानीबाजार, बड़गांव और बरियारपुरवा जैसे इलाकों में बना रखा था। इस सिंडिकेट के व्यापक फैलाव और खतरे को भांपते हुए, राज्य स्तर पर एक विशेष रणनीति तैयार की गई। कार्रवाई को अंजाम देने के लिए उत्तर प्रदेश के 9 अलग-अलग जिलों से अनुभवी ड्रग इंस्पेक्टरों को बुलाकर एक स्पेशल टास्क फोर्स का गठन किया गया। प्रशासन, स्थानीय पुलिस और औषधि विभाग के अधिकारियों से सजी इस संयुक्त टीम ने सबूतों को नष्ट होने से बचाने के लिए एक ही समय पर 3 अलग-अलग अवैध गोदामों पर अचानक धावा बोल दिया।
बिना कागजात चल रहा था अमन फार्मास्युटिकल्स
अधिकारियों ने अपनी जांच की शुरुआत मुख्य संदिग्ध शिवम कसौधन के आवास से की। घर पर शुरुआती पूछताछ पूरी करने के बाद, इन्वेस्टिगेशन टीम तुरंत उसकी दुकान और उससे जुड़े गुप्त गोदामों की तलाशी लेने पहुंच गई। जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि यह पूरी गैरकानूनी गतिविधियां 'अमन फार्मास्युटिकल्स' के बैनर तले संचालित की जा रही थीं। जब विभागीय अधिकारियों ने जरूरी दस्तावेज मांगे, तो वहां मौजूद संचालक पूरी तरह से बगलें झांकने लगे। उनके पास ना तो दवाओं की खरीददारी का कोई पक्का बिल था, ना बिक्री की रसीदें, ना ही कोई स्टॉक रजिस्टर। यहां तक कि उनके पास मेडिकल का बिजनेस करने के लिए कोई वैध लाइसेंस भी मौजूद नहीं था, जिसके बाद इस पूरे कारोबार को सौ फीसदी अवैध घोषित कर दिया गया।
प्रतिबंधित नशीली गोलियों का विशाल जखीरा बरामद
जब पुलिस और प्रशासन की टीम ने अवैध स्टोरेज फैसिलिटी के ताले तोड़े, तो अंदर रखे नशे के भारी भरकम जखीरे को देखकर सभी दंग रह गए। बरामद किए गए स्टॉक में सबसे ज्यादा तादाद उन पेनकिलर्स और साइकोट्रोपिक दवाओं की थी, जिनका इस्तेमाल नशे के लिए किया जाता है और जिन पर सख्त पाबंदियां लागू हैं। फॉरेंसिक जांच के मकसद से अधिकारियों ने मौके से 19 अलग-अलग तरह की दवाओं के सैंपल सील किए हैं। प्रशासन द्वारा लगाए गए अनुमान के मुताबिक, जब्त की गई इन सभी एलोपैथिक दवाओं की मार्केट वैल्यू 1 करोड़ 13 लाख रुपये से भी ज्यादा आंकी गई है।
कब्जे में लिए गए अवैध सामान की लिस्ट बेहद चौंकाने वाली है। इस भारी भरकम खेप में कुल 2,82,960 सेम्प्लेक्स प्लस कैप्सूल बरामद हुए। इसके साथ ही 60,000 अल्जोमैक 0.5 टैबलेट भी जब्त की गईं, जिनके अंदर अल्प्राजोलम सॉल्ट मौजूद होता है। जिला औषधि निरीक्षक सुमित वर्मा ने स्पष्ट किया कि इन बैन हो चुकी गोलियों का मुख्य टारगेट युवा वर्ग था, जिन्हें नशे का आदी बनाने के लिए यह सप्लाई चेन चलाई जा रही थी।
एनडीपीएस एक्ट के तहत सख्त कानूनी एक्शन
इस ताबड़तोड़ पुलिस रेड के नतीजे में गैंग के एक अहम सदस्य शिवम कसौधन को मौके से ही गिरफ्तार कर लिया गया। हालांकि, इस पूरे काले कारोबार को रचने वाला मुख्य मास्टरमाइंड यानी उसका सगा भाई अमन कसौधन पुलिस की आंखों में धूल झोंककर वहां से भाग निकलने में कामयाब रहा। फरार आरोपी को जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए पुलिस ने कई अलग-अलग टीमें गठित कर दी हैं, जो उसके छिपने के तमाम संभावित ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही हैं।
मामले में नशीले पदार्थों की मौजूदगी और समाज पर इसके घातक असर को देखते हुए पुलिस महकमे ने सबसे सख्त कानूनी रास्ता अपनाया है। नगर कोतवाली में सभी नामजद आरोपियों के खिलाफ एक विस्तृत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। इन पकड़े गए अपराधियों के खिलाफ नगर कोतवाली पुलिस स्टेशन में एनडीपीएस (NDPS) एक्ट, 1985 (स्वापक औषधि एवं मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम) के सेक्शन 8/21 का इस्तेमाल करते हुए आपराधिक मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस ने स्पष्ट कर दिया है कि इस मामले में आगे की सभी कानूनी और अदालती कार्रवाइयां पूरी सख्ती के साथ अमल में लाई जा रही हैं।



















