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मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक ने बताया पालक की आधुनिक खेती का तरीका, प्रति एकड़ 1 लाख रुपये तक कमाई का मौकाउत्तर प्रदेश
10 अग॰ 2026, 5:14 pm (18 घंटे पहले)· 0

मुरादाबाद के कृषि वैज्ञानिक ने बताया पालक की आधुनिक खेती का तरीका, प्रति एकड़ 1 लाख रुपये तक कमाई का मौका

सही बीज चयन, आधुनिक बुआई तकनीक और समय पर निराई-गुड़ाई करके किसान प्रति एकड़ 50 हजार से 1 लाख रुपये तक का शुद्ध लाभ कमा सकते हैं। कृषि विशेषज्ञ डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता ने रबी मौसम में पालक की बंपर पैदावार हासिल करने के लिए कई अहम सुझाव साझा किए हैं।

खेती में आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों का इस्तेमाल करके किसान कम लागत में अपनी आय को कई गुना बढ़ा रहे हैं। मुरादाबाद क्षेत्र में कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता के अनुसार यदि किसान वैज्ञानिक पद्धति से पालक की खेती करते हैं, तो वे प्रति एकड़ 50 हजार रुपये से लेकर 1 लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई आसानी से कर सकते हैं। सही समय पर बुआई, उन्नत बीजों का चुनाव, उचित जल प्रबंधन और नियमित देखभाल के बल पर यह फसल कम समय में किसानों को बेहतरीन रिटर्न देती है।

रबी सीजन में बुआई का सही समय और बीज की मात्रा

पालक की अगेती और बेहतर पैदावार के लिए रबी का सीजन सबसे उपयुक्त माना जाता है। कृषि वैज्ञानिक डॉ. दीपक मेहंदीरत्ता का कहना है कि पालक की बुआई के लिए सितंबर से अक्टूबर का महीना सबसे आदर्श होता है। इस अवधि में मौसम में हल्की ठंडक और मिट्टी में जरूरी नमी बनी रहती है, जिससे बीजों का अंकुरण तेजी से होता है। एक एकड़ खेत में बुआई के लिए लगभग 8 से 12 किलोग्राम बीज की आवश्यकता होती है। पौधों को मजबूत और स्वस्थ बनाने के लिए बीजों को मिट्टी में 1.5 से 2 इंच गहराई पर बोना चाहिए, जिससे जड़ें गहराई तक जाकर सही पोषण ले सकें।

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बुआई की प्रमुख विधियां और छंटाई का तरीका

पालक की खेती मुख्य रूप से दो तरीकों से की जाती है, जिनमें छिटकवां विधि और लाइन बुआई विधि शामिल हैं। छिटकवां विधि में बीजों को पूरे खेत में समान रूप से बिखेर दिया जाता है। इस विधि से बुआई करने पर पौधों के बीच भीड़ जमा हो जाती है। इसलिए बुआई के 15 से 20 दिन बाद अतिरिक्त पौधों की छंटाई करना बेहद जरूरी होता है ताकि बचे हुए पौधों को पर्याप्त धूप, हवा और पोषक तत्व मिल सकें। दूसरी ओर, लाइन में बुआई करते समय दो लाइनों के बीच 20 से 25 सेंटीमीटर की दूरी रखी जाती है। लाइन विधि से खेती करने पर निराई, गुड़ाई, कटाई और फसल की देखभाल करना काफी आसान हो जाता है और पत्तियों की गुणवत्ता भी काफी बेहतर होती है।

कटाई की समयावधि, उत्पादन और बाजार में मांग

पालक की फसल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह बहुत तेजी से तैयार होती है। बुआई करने के महज 25 से 40 दिनों के भीतर पहली कटाई की जा सकती है। एक बार बुआई करने के बाद उचित सिंचाई और खाद प्रबंधन से किसान कई बार कटाई कर सकते हैं। प्रत्येक कटाई के तुरंत बाद खेत की हल्की निराई-गुड़ाई करके आवश्यकतानुसार पानी और खाद देने से अगली कटाई में भी पत्तियों की गुणवत्ता बेहतरीन रहती है। अगर किसान उचित प्रबंधन रखें तो एक एकड़ खेत से 50 से 80 क्विंटल तक पालक का उत्पादन प्राप्त किया जा सकता है। बाजार में हरी सब्जियों और पालक की मांग पूरे साल बनी रहती है, जिससे किसानों को मंडी में इसे बेचकर नियमित अंतराल पर नकद कमाई हासिल होती है।

सवाल-जवाब

वैज्ञानिक विधि से पालक की खेती करने पर प्रति एकड़ कितना लाभ हो सकता है?
सही देखभाल और प्रबंधन के साथ वैज्ञानिक तरीके से पालक की खेती करने पर प्रति एकड़ 50 हजार रुपये से 1 लाख रुपये तक की शुद्ध कमाई हो सकती है।
पालक की बुआई के लिए कौन सा समय सबसे उत्तम माना जाता है?
पालक की बुआई के लिए रबी सीजन का सितंबर से अक्टूबर महीना सबसे उपयुक्त माना जाता है।
एक एकड़ खेत में पालक की बुआई के लिए कितने बीज की जरूरत होती है?
एक एकड़ खेत के लिए लगभग 8 से 12 किलोग्राम पालक के बीजों की आवश्यकता होती है।
बुआई के कितने दिनों बाद पालक की पहली कटाई की जा सकती है?
पालक की पहली कटाई बुआई के 25 से 40 दिनों के भीतर आसानी से की जा सकती है।
प्रति एकड़ पालक का कुल उत्पादन कितना मिल सकता है?
सही समय पर कटाई और उचित देखभाल करने से प्रति एकड़ 50 से 80 क्विंटल तक पालक का उत्पादन मिल सकता है।
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