उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले में बड़े पैमाने पर किसान धान की खेती करते हैं। धान की सफल पैदावार से किसानों को अच्छी आमदनी होती है, लेकिन मानसून के दौरान अगस्त महीने में खरपतवार की तेज बढ़ोतरी उनकी चिंता बढ़ा देती है। यदि रोपाई के बाद शुरुआती दौर में खरपतवार पर प्रभावी नियंत्रण न पाया जाए, तो फसल के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है।
खरपतवार से फसल नुकसान की चुनौती
अगस्त के महीने में लगातार होने वाली बारिश के कारण खेतों में पर्याप्त नमी बनी रहती है। साथ ही गर्म मौसम खरपतवारों के तेजी से पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करता है। खेतों में उगने वाली जंगली घास, मोथा और चौड़ी पत्ती वाले खरपतवार मुख्य धान के पौधों के साथ पानी, आवश्यक पोषक तत्वों और धूप के लिए सीधा मुकाबला करने लगते हैं। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार समय रहते रोकथाम न करने पर फसल की कुल पैदावार में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा, यदि इस सत्र में खरपतवार को नियंत्रित नहीं किया गया, तो अगली फसल के दौरान भी किसानों को इसी तरह की गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।
रोपाई के बाद सही समय और बचाव के तरीके
धान की रोपाई के शुरुआती 30 से 45 दिन खरपतवार प्रबंधन के लिए सबसे अधिक संवेदनशील और महत्वपूर्ण माने जाते हैं। लखीमपुर खीरी समेत तराई क्षेत्र के कई किसान खरपतवार से राहत पाने के लिए खेतों में मजदूरों के जरिए निराई करवाते हैं। हालांकि बड़े खेतों में यह प्रक्रिया काफी कठिन और समय लेने वाली होती है। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रदीप बिसेन ने किसानों को सही खरपतवारनाशी दवाओं का उचित मात्रा में छिड़काव करने की सलाह दी है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रदीप बिसेन द्वारा सुझाई गई दवाएं
कृषि वैज्ञानिक डॉ प्रदीप बिसेन के अनुसार, धान के खेतों में खरपतवारों के प्रभावी उन्मूलन के लिए बिस्पायरीबैक सोडियम 10% एससी (Bispyribac Sodium 10% SC) और मेटसल्फ्यूरॉन मिथाइल + क्लोरिम्यूरॉन इथाइल (Metsulfuron Methyl + Chlorimuron Ethyl) का छिड़काव बेहद कारगर सिद्ध होता है। विशेष रूप से मेटसल्फ्यूरॉन मिथाइल + क्लोरिम्यूरॉन इथाइल का प्रयोग चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों और मोथा वर्ग की घासों को नियंत्रित करने में अत्यधिक उपयोगी होता है।
छिड़काव के समय ध्यान रखने योग्य सावधानियां
दवा के बेहतर असर के लिए छिड़काव का सही तरीका और मौसम का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है। कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, खरपतवारनाशी का छिड़काव हल्की से मध्यम धूप के दौरान करना चाहिए। इस दौरान पौधों की पत्तियां दवा को अच्छी तरह अवशोषित कर लेती हैं और दवा पत्तियों पर मजबूती से चिपकती है। बहुत तेज धूप, अत्यधिक तापमान या लू चलने के दौरान स्प्रे करने से बचना चाहिए, क्योंकि इससे रसायन का असर घट जाता है और मुख्य फसल को भी नुकसान पहुंचने की संभावना रहती है। इसके अलावा छिड़काव के समय बारिश की संभावना न हो और तेज हवा न चल रही हो। किसान भाइयों को अपने स्प्रे पंप में अच्छी गुणवत्ता वाले नोजल का उपयोग करना चाहिए, ताकि दवा का समान वितरण पूरे खेत में एक बराबर हो सके।



















