उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा राज्य की सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों को पूरी तरह से गड्डामुक्त और चमकदार बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन धरातल पर स्थिति बिल्कुल इसके उलट नजर आ रही है। मिर्जापुर जिले से गुजरने वाला राष्ट्रीय राजमार्ग 35 इस समय राहगीरों के लिए किसी गंभीर खतरे से कम नहीं है। ग्रामीण सड़कों की बात तो दूर, प्रयागराज को जोड़ने वाला यह प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग बारिश के मौसम में जलभराव के कारण तालाब जैसा दिखाई देने लगा है, जिससे यात्रियों और वाहन चालकों की जान हर समय जोखिम में रहती है।
शीतला मंदिर से नटवा तिराहे के बीच बने मौत के कुएं
मिर्जापुर शहर के भीतर शीतला मंदिर तिराहा से लेकर नटवा तिराहा तक फैला करीब 5 किलोमीटर का सड़क पैच सबसे अधिक खस्ताहाल स्थिति में है। इस छोटे से हिस्से में ही 20 से अधिक छोटे और बड़े गड्ढे बन चुके हैं। इनमें से कई गड्ढे इतने गहरे हैं कि स्थानीय लोग इन्हें मौत का कुआं कहने लगे हैं। मानसून के दौरान जब बारिश का पानी इन गड्ढों में भर जाता है, तो वाहन चालकों को गहराई का अंदाजा नहीं मिल पाता और थोड़ी सी चूक होते ही गंभीर हादसे घटित हो जाते हैं।
दो स्थानों पर टोल वसूली, फिर भी एक साल से अनदेखी
करीब 90 किलोमीटर लंबे इस राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रियों से दो अलग-अलग स्थानों पर नियमित रूप से टोल टैक्स वसूला जाता है। इसके बावजूद सड़क की मरम्मत और देखरेख की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। पिछले करीब एक साल से इस सड़क की हालत इसी तरह जर्जर बनी हुई है। इस मुख्य मार्ग से शासन-प्रशासन के आला अधिकारियों से लेकर सरकार के मंत्रियों का आवागमन लगातार होता रहता है, परंतु इसके बाद भी किसी भी जिम्मेदार अधिकारी या जन प्रतिनिधि की नजर इस बदहाली पर नहीं पड़ी है और न ही इसे ठीक कराने का प्रयास किया गया है।
अस्थाई मरम्मत का दिखावा और घायलों का दर्द
स्थानीय निवासी फूलवती देवी के अनुसार सड़क पर कई स्थानों पर बहुत बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। प्रशासन और ठेकेदार मरम्मत के नाम पर सिर्फ सूखी गिट्टी लाकर डाल देते हैं, जो केवल एक या दो दिनों के भीतर ही वाहनों के दबाव से गायब हो जाती है। उन्होंने बताया कि सड़क की जर्जर स्थिति के कारण हाल ही में एक व्यक्ति दुर्घटना का शिकार होकर चोटिल हो गया, फिर भी जिम्मेदार मौन साधे हुए हैं। वहीं एक अन्य स्थानीय निवासी उमेश का कहना है कि ठेकेदार दो बार जमीनी हकीकत का जायजा लेने आ चुके हैं, लेकिन वे भी सिर्फ गिट्टी डालकर चले जाते हैं। एक साल से लगातार हादसे हो रहे हैं, परंतु स्थाई निर्माण की तरफ किसी का ध्यान नहीं है।



















